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Lakhimpur Kheri News: मां से बिछड़े तेंदुए शावक की कटीले तारों में फंसकर मौत
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गोला गोकर्णनाथ। गोला वन रेंज पश्चिमी बीट में पुनर्भू ग्रंट के पास जंगल किनारे छुट्टा पशुओं से गन्ने के रखवाली के लिए लगाए कटीले तारों में फंसकर तेंदुए के मादा शावक की मौत हो गई। वन विभाग का कहना है कि शायद की उम्र नौ-दस माह है। शायद मां से बिछड़ गया होगा। पोस्टमॉर्टम के बाद वन रेंज परिसर में ही शव जला दिया गया।
सोमवार की सुबह जंगल के किनारे बाल गोविंद वर्मा के गन्ने के खेत की मेड़ पर लगाए गए कटीले तारों में तेंदुए का शावक फंस गया। उसे फंसा देख पड़ोस में सिंचाई कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। फॉरेस्टर अजीत श्रीवास्तव और अफजल खान आदि वनकर्मी मौके पर पहुंचे। तारों में फंसे शावक को जाल डालकर निकालने की कोशिश हुई।
रेस्क्यू के दौरान शावक ने हमला कर वाचर कमलेश कुमार के बाएं हाथ को घायल कर दिया। मुश्किल से शावक को बाहर निकाला गया। पास के ट्यूबवेल का पानी पिलाया गया, लेकिन रेस्क्यू के करीब आधे घंटे के बाद उसकी मौत हो गई। शावक उम्र करीब 9 से 10 माह बताई है। गोला वन रेंज में एसडीओ अभय प्रताप की मौजूदगी में डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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डीएफओ ने नकारी शिकारियों के फंदे की बात
डीएफओ ने शिकारियों के फंदे की बात को नकारते हुए कहा कि यह एक दुर्घटना है। जंगल की निगरानी की जाती है। फंदा या शिकार बाघ के लिए होता है न कि तेंदुए के लिए। डीएफओ का कहना है कि जिस जगह पर घटना हुई है, वहां बाघ की आवाजाही रहती है।
डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
एसडीओ अभय प्रताप सिंह, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी विश्व प्रगति निधि दबीर हसन और रोहित रवि की मौजूदगी में कतर्निया घाट के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा, डा. सुरेश चंद्र और बांकेगंज के पशु चिकित्सा अधिकारी डाक्टर अंकुर वर्मा के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया और उसके बाद गोला वन रेंज परिसर में शव जला दिया गया।
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मादा तेंदुआ शावक है, जो खेत के कटीले तारों में फंस गया था। रेस्क्यू करने के बाद जंगल में छोड़ने की तैयारी थी, लेकिन उसकी मौत हो गई। यह एक दुर्घटना है।
संजय विश्वाल, डीएफओ
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सोमवार की सुबह जंगल के किनारे बाल गोविंद वर्मा के गन्ने के खेत की मेड़ पर लगाए गए कटीले तारों में तेंदुए का शावक फंस गया। उसे फंसा देख पड़ोस में सिंचाई कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। फॉरेस्टर अजीत श्रीवास्तव और अफजल खान आदि वनकर्मी मौके पर पहुंचे। तारों में फंसे शावक को जाल डालकर निकालने की कोशिश हुई।
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रेस्क्यू के दौरान शावक ने हमला कर वाचर कमलेश कुमार के बाएं हाथ को घायल कर दिया। मुश्किल से शावक को बाहर निकाला गया। पास के ट्यूबवेल का पानी पिलाया गया, लेकिन रेस्क्यू के करीब आधे घंटे के बाद उसकी मौत हो गई। शावक उम्र करीब 9 से 10 माह बताई है। गोला वन रेंज में एसडीओ अभय प्रताप की मौजूदगी में डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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डीएफओ ने नकारी शिकारियों के फंदे की बात
डीएफओ ने शिकारियों के फंदे की बात को नकारते हुए कहा कि यह एक दुर्घटना है। जंगल की निगरानी की जाती है। फंदा या शिकार बाघ के लिए होता है न कि तेंदुए के लिए। डीएफओ का कहना है कि जिस जगह पर घटना हुई है, वहां बाघ की आवाजाही रहती है।
डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
एसडीओ अभय प्रताप सिंह, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी विश्व प्रगति निधि दबीर हसन और रोहित रवि की मौजूदगी में कतर्निया घाट के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा, डा. सुरेश चंद्र और बांकेगंज के पशु चिकित्सा अधिकारी डाक्टर अंकुर वर्मा के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया और उसके बाद गोला वन रेंज परिसर में शव जला दिया गया।
मादा तेंदुआ शावक है, जो खेत के कटीले तारों में फंस गया था। रेस्क्यू करने के बाद जंगल में छोड़ने की तैयारी थी, लेकिन उसकी मौत हो गई। यह एक दुर्घटना है।
संजय विश्वाल, डीएफओ