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Lakhimpur Kheri News: नहीं मिली जमीन, दो साल से अटका 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल की तर्ज पर जिला मुख्यालय पर 50 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल खोलने पर शासन की योजना को बट्टा लगा है। 2021 से शुरू हुई कवायद अब तक पूरी नहीं हुई है। जमीन तक नहीं तलाशी जा सकी है। खास बात ये कि क्षेत्रों में अस्पताल संचालित हैं, लेकिन जिला मुख्यालय पर आयुर्वेदिक अस्पताल का सपना फिलहाल अधूरा है।
जिला मुख्यालय पर 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनाए जाने का फरमान वर्ष 2021 में शासन से आया था। आदेश आते ही विभागीय अफसरों ने जमीन की तलाश शुरू कर दी। शुरुआती दिनों में एक दो जगह जमीन देखी मगर चयन नहीं हो पाया। अस्पताल निर्माण के लिए करीब एक एकड़ जमीन की जरूरत थी, जो शहर के आसपास होनी चाहिए। लाख कोशिश के बाद भी विभाग को शहर के आसपास अस्पताल के मुताबिक जमीन नहीं मिली तो विभाग ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी। तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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जिले में 36 अस्पताल, मुख्यालय पर एक भी नहीं
जनपद में 36 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इसमें खीरी टाउन और गोला गोकर्णनाथ में 25-25 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। जबकि जनपद के 29 अन्य अस्पताल चार-चार बेड के हैं। बेलरायां, फूलबेहड़, अलीगंज, मूड़ा गालिब, उचौलिया आदि अस्पतालों में सिर्फ ओपीडी की सुविधा हैं। जिला मुख्यालय पर एक भी आयुर्वेदिक अस्पताल न होने पर शासन ने 50 बेड अस्पताल की सौगात दी थी, लेकिन जमीन के अभाव में वह सौगात पूरी नहीं हो सकी।
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38 की जगह मात्र 22 डॉक्टर
आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ की भारी कमी है। जनपद में 38 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में मात्र 22 से काम चलाया जा रहा है। एक डॉक्टर पर दो अस्पतालों की जिम्मेदारी है। ऐसे में रोजाना कोई न कोई अस्पताल डॉक्टर विहीन रह जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के साथ ही मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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जिला मुख्यालय पर 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनना था, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। जमीन न मिलने की सूचना शासन को भेजी जा चुकी है।
- डॉ. हरबंश कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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जिला मुख्यालय पर 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनाए जाने का फरमान वर्ष 2021 में शासन से आया था। आदेश आते ही विभागीय अफसरों ने जमीन की तलाश शुरू कर दी। शुरुआती दिनों में एक दो जगह जमीन देखी मगर चयन नहीं हो पाया। अस्पताल निर्माण के लिए करीब एक एकड़ जमीन की जरूरत थी, जो शहर के आसपास होनी चाहिए। लाख कोशिश के बाद भी विभाग को शहर के आसपास अस्पताल के मुताबिक जमीन नहीं मिली तो विभाग ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी। तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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जिले में 36 अस्पताल, मुख्यालय पर एक भी नहीं
जनपद में 36 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इसमें खीरी टाउन और गोला गोकर्णनाथ में 25-25 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। जबकि जनपद के 29 अन्य अस्पताल चार-चार बेड के हैं। बेलरायां, फूलबेहड़, अलीगंज, मूड़ा गालिब, उचौलिया आदि अस्पतालों में सिर्फ ओपीडी की सुविधा हैं। जिला मुख्यालय पर एक भी आयुर्वेदिक अस्पताल न होने पर शासन ने 50 बेड अस्पताल की सौगात दी थी, लेकिन जमीन के अभाव में वह सौगात पूरी नहीं हो सकी।
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38 की जगह मात्र 22 डॉक्टर
आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ की भारी कमी है। जनपद में 38 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में मात्र 22 से काम चलाया जा रहा है। एक डॉक्टर पर दो अस्पतालों की जिम्मेदारी है। ऐसे में रोजाना कोई न कोई अस्पताल डॉक्टर विहीन रह जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों के साथ ही मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला मुख्यालय पर 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनना था, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। जमीन न मिलने की सूचना शासन को भेजी जा चुकी है।
- डॉ. हरबंश कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी