नागपंचमी: देवकली में होगा कालसर्प योग शांति महायज्ञ, नासिक के बाद दूसरा ऐसा तीर्थ, जहां होता है ये अनुष्ठान
देवकली तीर्थ पर पिछले 25 वर्षों से हर नागपंचमी के दिन कालसर्प योग शांति महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। इसकी शुरुआत यहां चंद्रकला आश्रम की स्थापना करने वाले नेपाली बाबा ने की थी।
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लखीमपुर खीरी में जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर महाभारतकालीन देवकली तीर्थ कालसर्प दोष के निदान के लिए जाना जाता है। नागपंचमी के दिन कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। देवकली तीर्थ पर पिछले 25 वर्षों से हर नागपंचमी के दिन कालसर्प योग शान्ति महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। इसकी शुरुआत यहां चंद्रकला आश्रम की स्थापना करने वाले नेपाली बाबा ने की थी। तब से यहां यहां परंपरा अनवरत जारी है।
चंद्रकला आश्रम देवकली के मौजूदा महंत प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि एक महीने पहले से ही कालसर्प दोष ग्रसित जातकों का वैदिक ब्राह्मणों द्वारा जप एवं रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस वर्ष कालसर्प दोष निवारण के लिए 90 लोगों का पंजीकरण हुआ है। कालसर्प शांति महायज्ञ की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। सोमवार 21 अगस्त को नागपंचमी है। इस मौके पर देवकली में कालसर्प महायज्ञ और कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान सामूहिक रूप से किया जाएगा।
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महंत प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि काल सर्प दोष शांति अनुष्ठान के लिए भारत में प्रमुख रूप से नासिक एवं दूसरा स्थान देवकली तीर्थ स्थल है, क्योंकि कालसर्प दोष शांति के लिए त्रयंम्बकेश्वर एवं गोदावरी नदी परम आवश्यक है। इसलिए नासिक अति उत्तम है। देवकली तीर्थ स्थल पर महाभारतकालीन अभिमन्यु के पौत्र और राजा परीक्षित के पुत्र राजा जनमेजय ने सर्प विनाश यज्ञ किया था। नेपाली बाबा ने यहां द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित त्रियंबकेश्वर की स्थापना की। देवकली तीर्थ गोदावरी जल सहित 'देवतीर्थ' विभूषित हैं।
क्या है काल सर्प दोष कैसे करें निवारण
पंडित प्रमोद प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि जन्म कुंडली के बारह भावों में विभिन्न ग्रहों की स्थितियां बनती हैं। इनके आधार पर विश्लेषण करने पर योग बनते हैं। इन्हीं योगों में एक स्थिति बनती हैं कालसर्प दोष की।
काल सर्पयोग में काल अर्थात राहु के नक्षत्र के स्वामी 'काल' और सर्प अर्थात केतु के नक्षत्र स्वामी अश्लेषा के स्वामी सर्प से मिल कर बनता है। इस योग में राहु और केतु के बीच सभी गृह आते हैं। इसीलिए इन दोनों छाया ग्रहों का जातक के सम्पूर्ण भाग्य पर प्रभाव पड़ता है। कालसर्प योग से जातक के सभी कार्यों में बाधा आती है। कड़ी मेहनत का कोई परिणाम नहीं निकलता, संतान से कष्ट मिलता है और शत्रु हावी होने लगते हैं।
कालसर्प दोष की शांति करना बहुत आवश्यक हैं। सुखमय जीवन के लिए किसी विद्वान पुरोहित से मिलकर इस दोष की शांति कराना चाहिए।
12 प्रकार के होते हैं कालसर्प योग
प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि कालसर्प योग प्रमुख 12 प्रकार का होता हैं और विभिन्न रूपों को जोड़कर 3456 प्रकार का (आंशिक रुप से) पाया जाता हैं। 12 भावों के हिसाब से पूरे बारह कालसर्प योग बनते हैं।
1- अनंत कालसर्प योग
2- कुलिक कालसर्प योग
3- वासुकि कालसर्प योग
4- शंखपाल कालसर्प योग
5- पद्म कालसर्प योग
6- महापद्म कालसर्प योग
7- शेषनाग कालसर्प योग
8- विषाक्त कालसर्प योग
9- घातक कालसर्प योग
10- तक्षक कालसर्प योग
11- कर्कोटक कालसर्प योग
12- शंखनाद कालसर्प योग