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पिंजड़े में घुसकर बकरी को खींच ले गया तेंदुआ
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लखीमपुर खीरी। टेड़ी गौढ़ी में एक सप्ताह पहले एक बालक की जान लेने वाले तेंदुआ अपने को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजड़े से बकरी को ही खींचकर ले गया। निगरानी में लगी वन विभाग की टीम हाथ मलते रह गई। अब अधिकारी कह रहे हैं कि यह पता लगाया जाएगा कि तेंदुए के अंदर घुसने पर पिंजड़े का गेट आखिर बंद क्यों नहीं हुआ। हालांकि माना जा रहा है कि लीवर पर पैर न पड़ने से पिंजड़े का गेट बंद नहीं हुआ।
ईसानगर के बेलागढ़ी गांव के मजरा टेड़ी गौढ़ी में 11 नवंबर को नदी किनारे खेत में अपनी मां के साथ पुआल बटोर रहे सात वर्षीय मनोज पर तेंदुए ने हमला कर दिया था, जिसमें बालक को बचाने में उसकी मां भी घायल हुई थी। बालक की मौत हो गई थी। इसके बाद से वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के डॉ. दया के नेतृत्व में टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए जुटी है। टीम ने लोहे के पिंजड़े को प्राकृतिक रूप देने के लिए उस पर घास-फूस लगाई, ताकि तेंदुए को पिंजड़े का अहसास तक न हो पाए और वह बकरी को निवाला बनाने की कोशिश में बंद हो जाए। गांव में पिंजड़े की जगह कई बार बदली भी गई, मगर सफलता नहीं मिली। वहीं रविवार रात तेंदुआ चकमा देकर पिंजड़े में बंधी बकरी को ही खींच ले गया। बकरी के हालांकि आसपास कहीं अवशेष नहीं मिले। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पिंजड़े में दो हिस्से होते हैं, जिसके बीच में ही लीवर होता है जिस पर पैर पड़ते ही पिंजड़ा बंद हो जाता है। तेंदुआ पिंजड़े में घुसा जरूर, मगर लीवर नहीं दाब और वह दूसरे हिस्से में बंधी बकरी को खींचकर भाग निकला।
बेलागढ़ी के पास नदी का कछार और उसमें खड़ी बड़ी घास में तेंदुआ आसानी से छिप जा रहा है, तो पास में गन्ने के खेत भी तेंदुए के छिपने के आसान ठिकाने बने हुए हैैं। पकड़ने के लिए मशक्कत कर रही टीम पगचिह्नों के सहारे तेंदुए का पीछा कर रही हैै और उसके एक ठिकाने पर पिंजड़ा लगाया है।
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बालक को मारने के बाद तेंदुए ने एक बछड़े का शिकार किया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए डब्ल्यूटीआई की प्रशिक्षित टीम लगी है। पिंजड़े से बकरी का शिकार करके तेंदुआ बच निकला है, लेकिन उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। -डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीडी बफर जोन
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ईसानगर के बेलागढ़ी गांव के मजरा टेड़ी गौढ़ी में 11 नवंबर को नदी किनारे खेत में अपनी मां के साथ पुआल बटोर रहे सात वर्षीय मनोज पर तेंदुए ने हमला कर दिया था, जिसमें बालक को बचाने में उसकी मां भी घायल हुई थी। बालक की मौत हो गई थी। इसके बाद से वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के डॉ. दया के नेतृत्व में टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए जुटी है। टीम ने लोहे के पिंजड़े को प्राकृतिक रूप देने के लिए उस पर घास-फूस लगाई, ताकि तेंदुए को पिंजड़े का अहसास तक न हो पाए और वह बकरी को निवाला बनाने की कोशिश में बंद हो जाए। गांव में पिंजड़े की जगह कई बार बदली भी गई, मगर सफलता नहीं मिली। वहीं रविवार रात तेंदुआ चकमा देकर पिंजड़े में बंधी बकरी को ही खींच ले गया। बकरी के हालांकि आसपास कहीं अवशेष नहीं मिले। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पिंजड़े में दो हिस्से होते हैं, जिसके बीच में ही लीवर होता है जिस पर पैर पड़ते ही पिंजड़ा बंद हो जाता है। तेंदुआ पिंजड़े में घुसा जरूर, मगर लीवर नहीं दाब और वह दूसरे हिस्से में बंधी बकरी को खींचकर भाग निकला।
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बेलागढ़ी के पास नदी का कछार और उसमें खड़ी बड़ी घास में तेंदुआ आसानी से छिप जा रहा है, तो पास में गन्ने के खेत भी तेंदुए के छिपने के आसान ठिकाने बने हुए हैैं। पकड़ने के लिए मशक्कत कर रही टीम पगचिह्नों के सहारे तेंदुए का पीछा कर रही हैै और उसके एक ठिकाने पर पिंजड़ा लगाया है।
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बालक को मारने के बाद तेंदुए ने एक बछड़े का शिकार किया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए डब्ल्यूटीआई की प्रशिक्षित टीम लगी है। पिंजड़े से बकरी का शिकार करके तेंदुआ बच निकला है, लेकिन उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। -डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीडी बफर जोन