{"_id":"612a93108ebc3e79f250f090","slug":"janmashtmi-lakhimpur-news-bly457828587","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव कल, सज गए बाजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव कल, सज गए बाजार
विज्ञापन
जन्माष्टमी के लिए खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर बाजार सज गए हैं। शनिवार को दुकानों पर नन्हें कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए महिलाएं खरीदारी करते दिखीं। पुरोहितों के मुताबिक इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सोमवार को भाद्रपद की अष्टमी को मनाया जाएगा, जिसको लेकर बाजार सज गए हैं। कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए दुकानों पर भक्तों की भीड़ जुट रही है। भाद्रपद की अष्टमी की आधी रात को भक्त जन कृष्ण कन्हैया की प्रतिमा को नहला धुलाकर, पंचास्नान कराकर विधिवत उनका जन्मोत्सव मनाते हैं, जो कि अगले छह दिन तक चलता है, और कृष्ण की छठी पर पूर्ण होता है। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर महिलाएं दुकानों पर कान्हा की प्रतिमाएं, उनके वस्त्र, साज शृंगार और मिठाइयां व भोग खरीदते नजर आईं।
--
पूजा का समय
देवकली तीर्थ के आचार्य प्रमोद दीक्षित के मुताबिक भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 29 अगस्त को रविवार को रात 10 बजकर 25 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि 30 अगस्त को रात में 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इस हिसाब से व्रत के लिए उदया तिथि को मानते हुए 30 अगस्त को जन्माष्टमी होगी।
विज्ञापन
-----
शुभ योग
पूजा का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात को 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। भाद्रपद माह में ही भगवान श्रीकृष्ण ने रोहिणी नक्षत्र के वृष लग्न में जन्म लिया था। 30 अगस्त को रोहणी नक्षत्र व हर्षण योग रहेगा। देश भर के सभी कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी विशेष धूमधाम के साथ मनाई जाती है। जन्माष्टमी के दिन अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं, इसे जयंती योग मानते हैं और इसलिए ये संयोग और बेहतर है. द्वापरयुग में जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब भी जयंती योग पड़ा था।
विज्ञापन
कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सोमवार को भाद्रपद की अष्टमी को मनाया जाएगा, जिसको लेकर बाजार सज गए हैं। कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए दुकानों पर भक्तों की भीड़ जुट रही है। भाद्रपद की अष्टमी की आधी रात को भक्त जन कृष्ण कन्हैया की प्रतिमा को नहला धुलाकर, पंचास्नान कराकर विधिवत उनका जन्मोत्सव मनाते हैं, जो कि अगले छह दिन तक चलता है, और कृष्ण की छठी पर पूर्ण होता है। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर महिलाएं दुकानों पर कान्हा की प्रतिमाएं, उनके वस्त्र, साज शृंगार और मिठाइयां व भोग खरीदते नजर आईं।
विज्ञापन
--
पूजा का समय
देवकली तीर्थ के आचार्य प्रमोद दीक्षित के मुताबिक भाद्रमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 29 अगस्त को रविवार को रात 10 बजकर 25 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि 30 अगस्त को रात में 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इस हिसाब से व्रत के लिए उदया तिथि को मानते हुए 30 अगस्त को जन्माष्टमी होगी।
विज्ञापन
-----
शुभ योग
पूजा का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात को 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। भाद्रपद माह में ही भगवान श्रीकृष्ण ने रोहिणी नक्षत्र के वृष लग्न में जन्म लिया था। 30 अगस्त को रोहणी नक्षत्र व हर्षण योग रहेगा। देश भर के सभी कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी विशेष धूमधाम के साथ मनाई जाती है। जन्माष्टमी के दिन अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं, इसे जयंती योग मानते हैं और इसलिए ये संयोग और बेहतर है. द्वापरयुग में जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब भी जयंती योग पड़ा था।