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बालिका शिक्षा के महत्व को समझना जरूरी: शुचिता
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लखीमपुर खीरी। एक पैलेस में रविवार को मातृ शक्ति सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी ने कहा कि बहनों को जागना होगा।
महिला अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को खोज रही है। अपनी परंपरा और धर्म को फिर से पहचान कर खोया हुआ अस्तित्व पाना चाहती हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रही नैमिषारण्य से आईं आंध्र प्रदेश की साध्वी ने भारत माता के जयकारे लगवाए। आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वीणा गोपाल ने भी चर्चा की। सत्र का संचालन बाल कल्याण समिति लखनऊ की पूर्व सदस्य डॉक्टर संगीता शर्मा एवं एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अर्पिता कपूर ने किया।
चर्चा सत्र में महिलाओं ने गरीबी, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजना परिवार टूटने के कारण आदि पर प्रश्न किये। जिला अस्पताल की अधीक्षक डॉक्टर ज्योति मेहरोत्रा ने बालिकाओं में शारीरिक दुर्बलता का कारण फास्ट फूड को बताया। मुख्य वक्ता प्रयागराज से आये प्रख्यात कथा वाचक संत शांतनु जी महाराज ने लिंग भेद पर कटाक्ष करते हुए आह्वान किया कि मातृशक्ति जैसे पुत्र के जन्म में उत्सव मनाती है, उसी प्रकार पुत्री के उत्पन्न होने पर भी मनाने का संकल्प लें।
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महिला अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को खोज रही है। अपनी परंपरा और धर्म को फिर से पहचान कर खोया हुआ अस्तित्व पाना चाहती हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रही नैमिषारण्य से आईं आंध्र प्रदेश की साध्वी ने भारत माता के जयकारे लगवाए। आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वीणा गोपाल ने भी चर्चा की। सत्र का संचालन बाल कल्याण समिति लखनऊ की पूर्व सदस्य डॉक्टर संगीता शर्मा एवं एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अर्पिता कपूर ने किया।
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चर्चा सत्र में महिलाओं ने गरीबी, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजना परिवार टूटने के कारण आदि पर प्रश्न किये। जिला अस्पताल की अधीक्षक डॉक्टर ज्योति मेहरोत्रा ने बालिकाओं में शारीरिक दुर्बलता का कारण फास्ट फूड को बताया। मुख्य वक्ता प्रयागराज से आये प्रख्यात कथा वाचक संत शांतनु जी महाराज ने लिंग भेद पर कटाक्ष करते हुए आह्वान किया कि मातृशक्ति जैसे पुत्र के जन्म में उत्सव मनाती है, उसी प्रकार पुत्री के उत्पन्न होने पर भी मनाने का संकल्प लें।
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