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Lakhimpur Kheri News: ...एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है
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गोला के चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर गीत गाते गीतकार संतोष आनंद।
गोला गोकर्णनाथ। नगर के प्राचीन चैती मेला की रात कवियों और गीतकारों के नाम रही। मशहूर गीतकार संतोष आनंद का एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है तराना गूंजा। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों का काव्य पाठ सुनने के लिए श्रोता रातभर बैठे रहे।
सोमवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों ने विविध रसों का काव्य पाठ कर कविताओं, गीतों की महफिल सजाई। प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद व्हीलचेयर से मंच पर पहुंचे ताे कवियों, अतिथियों सहित पूरी महफिल ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। शृंगार रस की डॉ. कीर्ति काले नई दिल्ली ने मातृ पितृ भक्ति कुछ यूं बयां की-अयोध्या में अगर ढूंढोगे तो श्रीराम मिलते हैं। वृंदावन में ढूंढोगे तो फिर घनश्याम मिलते हैं।
संयोजक लखीमपुर के आशीष अनल ने पढ़ा कि आओ मैं सुनाऊ तुम्हें जनता का मन, फरीदाबाद के डॉ. दिनेश रघुवंशी ने-दिल में उल्फत संभाल के रखना, ये इबादत संभाल कर रखना। गाजियाबाद से हास्य रस के कवि खुशाल कौशलेन्द्र ने कि खुशी सुख चैन अब सबे घराने में नहीं मिलती, सुकूं की पिंडगी हमाके दुकानों में नहीं मिलती।
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मेरठ के अजहर इकबाल ने यूं बयां किया-इतना संगीन पाप कौन करे, मेरे दुख पर विलाप कौन करे। हास्य एवं व्यंग्य कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल दिल्ली- तू ही मेरी एक बी है तू ही मेरी इंतहा है, साइट भी तू ही मेरी और मेरा न तू। सुदीप भोला जबलपुर ने- पापा ने हैप्पी बर्थ डे पर मोबाइल दिलवाया था।
दिव्या मीरा ने बयां किया- बरसों पहले का बोया इश्क, खिलखिला गया है अभी अभी भला इश्क भी, बूढ़ा हुआ है कभी। संतोष आनंद ने इक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है, जिंदगी कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है। डॉ. हरिओम पवार- मैं ताजों के लिए समर्पण वंदन गीत नहीं गाता। कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि एसडीएम न्यायिक मधुसूदन गुप्ता, विशिष्ट अतिथि डॉ. आशुतोष गुप्ता, नायब तहसीलदार सर्वेश यादव, विद्यालय प्रबंधक प्रधानाचार्य कल्याण समिति प्रदेश महामंत्री शैलेंद्र सक्सेना और नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक इन्द्रजीत सिंह ने दीप जलाकर की। कवियों को सम्मानित किया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता तहसीलदार सुखवीर सिंह व संचालन मेला प्रभारी मोहित गिरि ने किया।
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सोमवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों ने विविध रसों का काव्य पाठ कर कविताओं, गीतों की महफिल सजाई। प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद व्हीलचेयर से मंच पर पहुंचे ताे कवियों, अतिथियों सहित पूरी महफिल ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। शृंगार रस की डॉ. कीर्ति काले नई दिल्ली ने मातृ पितृ भक्ति कुछ यूं बयां की-अयोध्या में अगर ढूंढोगे तो श्रीराम मिलते हैं। वृंदावन में ढूंढोगे तो फिर घनश्याम मिलते हैं।
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संयोजक लखीमपुर के आशीष अनल ने पढ़ा कि आओ मैं सुनाऊ तुम्हें जनता का मन, फरीदाबाद के डॉ. दिनेश रघुवंशी ने-दिल में उल्फत संभाल के रखना, ये इबादत संभाल कर रखना। गाजियाबाद से हास्य रस के कवि खुशाल कौशलेन्द्र ने कि खुशी सुख चैन अब सबे घराने में नहीं मिलती, सुकूं की पिंडगी हमाके दुकानों में नहीं मिलती।
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मेरठ के अजहर इकबाल ने यूं बयां किया-इतना संगीन पाप कौन करे, मेरे दुख पर विलाप कौन करे। हास्य एवं व्यंग्य कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल दिल्ली- तू ही मेरी एक बी है तू ही मेरी इंतहा है, साइट भी तू ही मेरी और मेरा न तू। सुदीप भोला जबलपुर ने- पापा ने हैप्पी बर्थ डे पर मोबाइल दिलवाया था।
दिव्या मीरा ने बयां किया- बरसों पहले का बोया इश्क, खिलखिला गया है अभी अभी भला इश्क भी, बूढ़ा हुआ है कभी। संतोष आनंद ने इक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है, जिंदगी कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है। डॉ. हरिओम पवार- मैं ताजों के लिए समर्पण वंदन गीत नहीं गाता। कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि एसडीएम न्यायिक मधुसूदन गुप्ता, विशिष्ट अतिथि डॉ. आशुतोष गुप्ता, नायब तहसीलदार सर्वेश यादव, विद्यालय प्रबंधक प्रधानाचार्य कल्याण समिति प्रदेश महामंत्री शैलेंद्र सक्सेना और नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक इन्द्रजीत सिंह ने दीप जलाकर की। कवियों को सम्मानित किया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता तहसीलदार सुखवीर सिंह व संचालन मेला प्रभारी मोहित गिरि ने किया।