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दुधवा में विदेशियों के मुकाबले भारतीय सैलानियों पर जोर
सार
भारतीय पर्यटकों ने विजिटर्स बुक में अनुभव किए साझा
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विस्तार
किशनपुर हो या दुधवा सैलानी बाघों को देखकर जता रहे खुशी
बांकेगंज। कोरोना संक्रमण के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से दुधवा में विदेशी सैलानियों की संख्या में काफी कमी आई है। ऐसे में दुधवा की आय और सैलानियों की संख्या कम न हो इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन विदेशियों के मुकाबले भारतीय सैलानियों पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संबंध में बीते दिनों टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन की बैठक हुई, जिसमें भारतीय पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बड़े शहरों में रोड शो आयोजित करने का फैसला लिया गया।
प्रदेश के इकलौते दुधवा नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैवविविधता के चलते देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पहचान रखते हैं। शारदा नदी से सटे जंगल के बीच किशनपुर सेंक्चुरी का खूबसूरत झादीताल और दुधवा के भादीताल किनारे कुलाचे भरते हिरन और बाघों की दहाड़ के बीच रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों का कलरव विदेशी समेत भारतीय सैलानियों को खूब लुभाता है।
इको टूरिज्म के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने से वर्ष 2021 में दुधवा के नए पर्यटन सत्र का 15 नवंबर से शुभारंभ हुआ था। पर्यटन सत्र की शुरूआत होते ही यहां सैलानियों का जमाबाड़ा शुरू हो गया। जिसके चलते 30 नवंबर तक दुधवा में एक विदेशी समेत 1613 भारतीय सैलानियों ने जिप्सियों में बैठकर भ्रमण कर दुधवा के जंगलों के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार किए। दुधवा भ्रमण पर लखनऊ, सीतापुर, कानपुर समेत अन्य बड़े शहरों से आए सैलानियों ने जंगल भ्रमण के दौरान बाघों के दीदार होने पर विजिटर्स बुक में अपने अनुभव साझा किए हैं। इन सैलानियों ने लिखा है कि दुधवा हो या किशनपुर सेंक्चुरी। यहां के जंगल की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, घास के मैदान और विचरण करते बाघ और अन्य दुर्लभ वन्यजीव उन्हें खूब रोमांचित करते हैं।
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30 नवंबर तक दुधवा घूमने आ चुके हैं 1613 भारतीय सैलानी
दुधवा नेशनल पार्क का पर्यटन सत्र शुरू हुए करीब एक माह हो रहा है। इस दौरान दुधवा में 1613 भारतीय और मात्र एक विदेशी सैलानी जंगल भ्रमण पर आए।
कोरोना संक्रमण के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से यहां विदेशी सैलानी तो नहीं आ रहे हैं, लेकिन भारतीय सैलानियों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। सैलानी दुधवा पर्यटन से काफी रोमांचित हैं। इसका अंदाजा विजिटर्स बुक से लगाया जा सकता है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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बांकेगंज। कोरोना संक्रमण के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से दुधवा में विदेशी सैलानियों की संख्या में काफी कमी आई है। ऐसे में दुधवा की आय और सैलानियों की संख्या कम न हो इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन विदेशियों के मुकाबले भारतीय सैलानियों पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संबंध में बीते दिनों टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन की बैठक हुई, जिसमें भारतीय पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बड़े शहरों में रोड शो आयोजित करने का फैसला लिया गया।
प्रदेश के इकलौते दुधवा नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैवविविधता के चलते देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पहचान रखते हैं। शारदा नदी से सटे जंगल के बीच किशनपुर सेंक्चुरी का खूबसूरत झादीताल और दुधवा के भादीताल किनारे कुलाचे भरते हिरन और बाघों की दहाड़ के बीच रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों का कलरव विदेशी समेत भारतीय सैलानियों को खूब लुभाता है।
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इको टूरिज्म के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने से वर्ष 2021 में दुधवा के नए पर्यटन सत्र का 15 नवंबर से शुभारंभ हुआ था। पर्यटन सत्र की शुरूआत होते ही यहां सैलानियों का जमाबाड़ा शुरू हो गया। जिसके चलते 30 नवंबर तक दुधवा में एक विदेशी समेत 1613 भारतीय सैलानियों ने जिप्सियों में बैठकर भ्रमण कर दुधवा के जंगलों के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार किए। दुधवा भ्रमण पर लखनऊ, सीतापुर, कानपुर समेत अन्य बड़े शहरों से आए सैलानियों ने जंगल भ्रमण के दौरान बाघों के दीदार होने पर विजिटर्स बुक में अपने अनुभव साझा किए हैं। इन सैलानियों ने लिखा है कि दुधवा हो या किशनपुर सेंक्चुरी। यहां के जंगल की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, घास के मैदान और विचरण करते बाघ और अन्य दुर्लभ वन्यजीव उन्हें खूब रोमांचित करते हैं।
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30 नवंबर तक दुधवा घूमने आ चुके हैं 1613 भारतीय सैलानी
दुधवा नेशनल पार्क का पर्यटन सत्र शुरू हुए करीब एक माह हो रहा है। इस दौरान दुधवा में 1613 भारतीय और मात्र एक विदेशी सैलानी जंगल भ्रमण पर आए।
कोरोना संक्रमण के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से यहां विदेशी सैलानी तो नहीं आ रहे हैं, लेकिन भारतीय सैलानियों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। सैलानी दुधवा पर्यटन से काफी रोमांचित हैं। इसका अंदाजा विजिटर्स बुक से लगाया जा सकता है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व