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Lakhimpur Kheri News: पांच साल तो दिखे नहीं, अब सभी को प्रणाम-आदाब
Wed, 10 Dec 2025 11:44 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 10 Dec 2025 11:44 PM IST
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लखीमपुर खीरी। पंचायत चुनाव की सरगर्मियां बढ़ते ही गांवों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीते पांच वर्षों से गांवों में कम दिखाई देने वाले प्रधान और बीडीसी प्रतिनिधि अब हर दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। उम्र कोई भी हो, वोट की चाहत में सबको प्रणाम व आदाब कर रहे हैं।
वर्ष 2021 के चुनाव में बड़े वादों के साथ सत्ता में आए कुछ प्रधान जनता की समस्याओं से दूर हो गए थे। सड़क, नाली, बिजली, राशन, आवास जैसी जरूरतों पर लोगों को महीनों तक चक्कर लगवाए, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही वही प्रतिनिधि गांव के प्रत्येक कार्यक्रम और चौपाल में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास तो कागजों में अधिक दिखा, जमीन पर कम। कई ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि नेता जी पांच साल संदेशों तक का जवाब नहीं देते, पर अब हर किसी के लिए दरवाजा पकड़कर नमस्ते जरूर कर रहे हैं। बुजुर्ग भी कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि अदब और मिलनसारी स्वभाव सिर्फ चुनाव के मौसम में ही देखने को मिलता है।
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हालांकि, कुछ प्रधान अपनी अनुपस्थिति के पीछे सरकारी कामकाज और योजनाओं के दबाव को वजह बता रहे हैं, लेकिन गांव की जनता इस बार सोच-समझकर ही बटन दबाने का मन बना रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विनम्रता की यह बयार चुनाव बाद भी कायम रहती है या नहीं।
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वर्ष 2021 के चुनाव में बड़े वादों के साथ सत्ता में आए कुछ प्रधान जनता की समस्याओं से दूर हो गए थे। सड़क, नाली, बिजली, राशन, आवास जैसी जरूरतों पर लोगों को महीनों तक चक्कर लगवाए, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही वही प्रतिनिधि गांव के प्रत्येक कार्यक्रम और चौपाल में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि विकास तो कागजों में अधिक दिखा, जमीन पर कम। कई ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि नेता जी पांच साल संदेशों तक का जवाब नहीं देते, पर अब हर किसी के लिए दरवाजा पकड़कर नमस्ते जरूर कर रहे हैं। बुजुर्ग भी कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि अदब और मिलनसारी स्वभाव सिर्फ चुनाव के मौसम में ही देखने को मिलता है।
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हालांकि, कुछ प्रधान अपनी अनुपस्थिति के पीछे सरकारी कामकाज और योजनाओं के दबाव को वजह बता रहे हैं, लेकिन गांव की जनता इस बार सोच-समझकर ही बटन दबाने का मन बना रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विनम्रता की यह बयार चुनाव बाद भी कायम रहती है या नहीं।