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Lakhimpur Kheri News: मांगी नाव न केवट आना, कहहि तुम्हार मरमु मैं जाना
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श्रीराम कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। सुहेला के श्रीहनुमान मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में व्यास ने भगवान श्रीराम और केवट के संवाद का प्रसंग सुनाया। यहां भावपूर्ण प्रसंग सुन श्रोता भाव-विभोर हो गए।
श्रीराम कथा में कथा व्यास प्रशांत जी महाराज ने कहा कि श्रीराम और केवट का संवाद भक्त और भगवान, आत्मा और परमात्मा के मध्य संवाद का प्रेरक उद्धरण है। यह संवाद इस बात का भी प्रमाण है कि जब भक्त भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है, तो भगवान स्वयं आकर भक्त को दर्शन देते हैं। भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती, वह प्रारब्ध बनकर अपना कार्य करती है। यही कारण है भक्त केवट का उद्घार करने भगवान स्वयं चल कर आए हैं।
आज भक्त केवट अपने सम्मुख प्रभु श्रीराम को खड़ा देखकर अपने जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाना चाहता है। इसीलिए वह सशर्त प्रभुराम को अपनी नाव पर बिठाना चाहता है, किंतु वह चरण धोने के लिए सुंदर नारी अहिल्या का उदाहरण देता है। भक्त केवट चतुर है। वह जानता है कि अपने और अपने पूर्वजों का उद्धार करने के लिए इससे अच्छा अवसर और क्या होगा।
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जैसे ही प्रभु श्रीराम ने भक्त की इच्छा का मान रखते हुए चरण प्रच्छालन की अनुमति प्रदान की। श्रीराम द्वारा उतराई स्वरूप मुद्रिका दिए जाने पर भी वह लेने को तैयार नहीं है। यह प्रसंग भगवान की भक्त-वत्सलता का प्रमुख साक्षी है। इस मौके पर विशेष वर्मा, अनिल शुक्ला, रामकिशोर दीक्षित, सुधीर शुक्ला, नरेंद्र कुमार अग्निहोत्री, नीना देवी, सुधा देवी, वेद प्रकाश अग्निहोत्री, आनू कुमार आदि मौजूद रहे।
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श्रीराम कथा में कथा व्यास प्रशांत जी महाराज ने कहा कि श्रीराम और केवट का संवाद भक्त और भगवान, आत्मा और परमात्मा के मध्य संवाद का प्रेरक उद्धरण है। यह संवाद इस बात का भी प्रमाण है कि जब भक्त भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है, तो भगवान स्वयं आकर भक्त को दर्शन देते हैं। भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती, वह प्रारब्ध बनकर अपना कार्य करती है। यही कारण है भक्त केवट का उद्घार करने भगवान स्वयं चल कर आए हैं।
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आज भक्त केवट अपने सम्मुख प्रभु श्रीराम को खड़ा देखकर अपने जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाना चाहता है। इसीलिए वह सशर्त प्रभुराम को अपनी नाव पर बिठाना चाहता है, किंतु वह चरण धोने के लिए सुंदर नारी अहिल्या का उदाहरण देता है। भक्त केवट चतुर है। वह जानता है कि अपने और अपने पूर्वजों का उद्धार करने के लिए इससे अच्छा अवसर और क्या होगा।
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जैसे ही प्रभु श्रीराम ने भक्त की इच्छा का मान रखते हुए चरण प्रच्छालन की अनुमति प्रदान की। श्रीराम द्वारा उतराई स्वरूप मुद्रिका दिए जाने पर भी वह लेने को तैयार नहीं है। यह प्रसंग भगवान की भक्त-वत्सलता का प्रमुख साक्षी है। इस मौके पर विशेष वर्मा, अनिल शुक्ला, रामकिशोर दीक्षित, सुधीर शुक्ला, नरेंद्र कुमार अग्निहोत्री, नीना देवी, सुधा देवी, वेद प्रकाश अग्निहोत्री, आनू कुमार आदि मौजूद रहे।