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Lakhimpur Kheri News: दहेज हत्या में पति को उम्रकैद, जेठ बरी
Sat, 08 Aug 2026 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:15 AM IST
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लखीमपुर खीरी। 11 साल पुराने दहेज हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेनू सिंह ने पति आलोक मिश्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 28 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, सह आरोपी जेठ कालीचरन को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
मितौली थाना क्षेत्र के भीखमपुर निवासी आलोक मिश्र का विवाह सात मई 2015 को नीमगांव थाना क्षेत्र के मदारपुर निवासी स्वतंत्र तिवारी की पुत्री सुभाषिनी से हुआ था। आरोप है कि विवाह के बाद अतिरिक्त दहेज में टीवी और मोटरसाइकिल की मांग को लेकर सुभाषिनी को प्रताड़ित किया जाने लगा।
दो अगस्त, 2015 को सुभाषिनी ससुराल में गंभीर रूप से झुलसी मिली। अभियोजन के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय उसने बयान दिया कि जेठ गज्जू मिश्र ने उसके हाथ पकड़े, गज्जू की पत्नी ने पैर पकड़े, ननद ने मिट्टी का तेल दिया और पति आलोक ने तेल डालकर आग लगा दी। इस बयान की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। इलाज के दौरान लखीमपुर में उसकी मौत हो गई।
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पुलिस ने पति, जेठ-जेठानी समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद पति आलोक मिश्र, जेठ कालीचरन और गज्जू उर्फ संतसरन के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान गज्जू उर्फ संतसरन की मृत्यु हो गई। अदालत ने स्वतंत्र तिवारी, कालिन्द्री, डॉ. बृजमोहन, हरिओम तिवारी, तत्कालीन सीओ मिथलेश दीक्षित, सेवानिवृत्त तहसीलदार ओम प्रकाश मिश्र, महिला सिपाही सुभाषिनी और एसआई विशम्भर दयाल सिंह समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आलोक मिश्र को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 28 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि कालीचरन को बरी कर दिया।
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अदालत की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने कहा कि पढ़े-लिखे परिवेश में पली-बढ़ी युवती स्वयं को जलाकर जान नहीं दे सकती। विवाहिता को जिस तरह प्रताड़ित कर विभत्स मौत दी गई, वह अत्यंत गंभीर है। ऐसे अपराध दया या नरमी के पात्र नहीं हैं।
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मितौली थाना क्षेत्र के भीखमपुर निवासी आलोक मिश्र का विवाह सात मई 2015 को नीमगांव थाना क्षेत्र के मदारपुर निवासी स्वतंत्र तिवारी की पुत्री सुभाषिनी से हुआ था। आरोप है कि विवाह के बाद अतिरिक्त दहेज में टीवी और मोटरसाइकिल की मांग को लेकर सुभाषिनी को प्रताड़ित किया जाने लगा।
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दो अगस्त, 2015 को सुभाषिनी ससुराल में गंभीर रूप से झुलसी मिली। अभियोजन के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय उसने बयान दिया कि जेठ गज्जू मिश्र ने उसके हाथ पकड़े, गज्जू की पत्नी ने पैर पकड़े, ननद ने मिट्टी का तेल दिया और पति आलोक ने तेल डालकर आग लगा दी। इस बयान की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। इलाज के दौरान लखीमपुर में उसकी मौत हो गई।
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पुलिस ने पति, जेठ-जेठानी समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद पति आलोक मिश्र, जेठ कालीचरन और गज्जू उर्फ संतसरन के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान गज्जू उर्फ संतसरन की मृत्यु हो गई। अदालत ने स्वतंत्र तिवारी, कालिन्द्री, डॉ. बृजमोहन, हरिओम तिवारी, तत्कालीन सीओ मिथलेश दीक्षित, सेवानिवृत्त तहसीलदार ओम प्रकाश मिश्र, महिला सिपाही सुभाषिनी और एसआई विशम्भर दयाल सिंह समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आलोक मिश्र को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 28 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि कालीचरन को बरी कर दिया।
अदालत की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने कहा कि पढ़े-लिखे परिवेश में पली-बढ़ी युवती स्वयं को जलाकर जान नहीं दे सकती। विवाहिता को जिस तरह प्रताड़ित कर विभत्स मौत दी गई, वह अत्यंत गंभीर है। ऐसे अपराध दया या नरमी के पात्र नहीं हैं।