{"_id":"5d45d4408ebc3e6d250dc30c","slug":"hospital-lakhimpur-news-bly371167429","type":"story","status":"publish","title_hn":"छापेमारी के बाद बरी हो गया अपंजीकृत अस्प्ताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छापेमारी के बाद बरी हो गया अपंजीकृत अस्प्ताल
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लखीमपुर खीरी/जंगबहादुरगंज। तीन सप्ताह पहले निघासन के एक प्राइवेट अस्पताल और फिर अब चार दिन पहले जंगबहादुर गंज के प्राइवेट अस्पतालों में आशा वर्करों की सांठगांठ के मामले पकड़े जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। निघासन में बड़ा खेल पकड़े जाने के बाद 30 आशा वर्करों को नोटिस दिया गया, मगर जब किसी ने जवाब नहीं दिया तो स्वास्थ्य विभाग भी मामले को भूल गया। वहीं जंग बहादुरगंज के मामले में नीचे के अधिकारियों ने सीएमओ को रिपोर्ट ही नहीं भेजी है।
निघासन के एक अस्पताल में तीन सप्ताह पहले सीएमओ ने छापा मारा था। वहां उन्हें तमाम अनियमितताएं तो मिली ही थीं, एक ऐसा रजिस्टर भी मिला, जिसमें डिलीवरी के लिए आईं महिलाओं के नाम के आगे आशा वर्कर का नाम भी लिखा था। बाद में छानबीन से पता चला कि ये आशा वर्कर इस प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के लिए महिलाएं लाती हैं तो उन्हें ऑपरेशन के बाद चार से पांच हजार रुपये मिलते हैं। जबकि सरकारी अस्पताल ले जाने पर उन्हें कुछ ही प्रोत्साहन राशि मिलती है। खेल सामने आने के बाद सीएमओ दफ्तर से 30 से अधिक आशा वर्करों को नोटिस दिए गए थे, मगर अब तक उनमें से किसी ने जवाब नहीं दिया है।
वहीं जंगबहादुर गंज में सीएचसी अधीक्षक गौरव खन्ना के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने 30 जुुलाई को एक प्राइवेट अस्पताल में छापा मारा था। शिकायत मिली थी कि आशा वर्कर वहां एक महिला को ऑपरेशन के लिए ले गई है। छापे के दौरान अधीक्षक को देखकर अस्पताल का स्टाफ भाग खड़ा हुआ था। इसके बाद सीएचसी टीम गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल ले गई और भर्ती कराने के बाद डिलीवरी कराई थी। शिकायत सही पाए जाने पर सीएचसी अधीक्षक ने अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही थी, लेकिन तीन दिन बाद अस्पताल बाकायदा रोजाना की तरह खुल गया। स्टाफ भी काम करने लगा। सीएचसी पसगवां अधीक्षक डॉ. गौरव खन्ना का कहना है कि वह सीएमओ से मिलकर उनकी गाइड लाइन के अनुसार ही प्राइवेट अस्पताल के विरुद्ध कदम उठाएंगे।
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निघासन वाले मामले में चिह्नित किसी आशा वर्कर ने जवाब नहीं दिया है, इसलिए उन्हें दोबारा नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जंगबहादुर गंज के अस्पताल के मामले की रिपोर्ट मुझे अभी नहीं मिली है। जरूरत पड़ी तो एडिशनल सीएमओ से जांच कराएंगे। - डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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निघासन के एक अस्पताल में तीन सप्ताह पहले सीएमओ ने छापा मारा था। वहां उन्हें तमाम अनियमितताएं तो मिली ही थीं, एक ऐसा रजिस्टर भी मिला, जिसमें डिलीवरी के लिए आईं महिलाओं के नाम के आगे आशा वर्कर का नाम भी लिखा था। बाद में छानबीन से पता चला कि ये आशा वर्कर इस प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के लिए महिलाएं लाती हैं तो उन्हें ऑपरेशन के बाद चार से पांच हजार रुपये मिलते हैं। जबकि सरकारी अस्पताल ले जाने पर उन्हें कुछ ही प्रोत्साहन राशि मिलती है। खेल सामने आने के बाद सीएमओ दफ्तर से 30 से अधिक आशा वर्करों को नोटिस दिए गए थे, मगर अब तक उनमें से किसी ने जवाब नहीं दिया है।
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वहीं जंगबहादुर गंज में सीएचसी अधीक्षक गौरव खन्ना के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने 30 जुुलाई को एक प्राइवेट अस्पताल में छापा मारा था। शिकायत मिली थी कि आशा वर्कर वहां एक महिला को ऑपरेशन के लिए ले गई है। छापे के दौरान अधीक्षक को देखकर अस्पताल का स्टाफ भाग खड़ा हुआ था। इसके बाद सीएचसी टीम गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल ले गई और भर्ती कराने के बाद डिलीवरी कराई थी। शिकायत सही पाए जाने पर सीएचसी अधीक्षक ने अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही थी, लेकिन तीन दिन बाद अस्पताल बाकायदा रोजाना की तरह खुल गया। स्टाफ भी काम करने लगा। सीएचसी पसगवां अधीक्षक डॉ. गौरव खन्ना का कहना है कि वह सीएमओ से मिलकर उनकी गाइड लाइन के अनुसार ही प्राइवेट अस्पताल के विरुद्ध कदम उठाएंगे।
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निघासन वाले मामले में चिह्नित किसी आशा वर्कर ने जवाब नहीं दिया है, इसलिए उन्हें दोबारा नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जंगबहादुर गंज के अस्पताल के मामले की रिपोर्ट मुझे अभी नहीं मिली है। जरूरत पड़ी तो एडिशनल सीएमओ से जांच कराएंगे। - डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ