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डॉक्टर महंगी दवाएं लिख मरीजों की जेब कर रहे खाली
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लखीमुपर खीरी। सस्ता और बढ़िया इलाज मिलने की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को डॉक्टर अपने लाभ के लिए बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में मरीजों को जेबें खाली हो रही हैं। शासन के निर्देशों के बावजूद डॉक्टर मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं और बेचारे मरीजों को जिला अस्पताल का इलाज काफी महंगा पड़ रहा है।
सदर ब्लॉक के गांव कालाआम निवासी जितेंद्र कुमार बुखार पीड़ित छह साल की पुत्री सृष्टि को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपनी बेटी को बाल रोग विशेषज्ञ को दिखलाया। डॉक्टर ने पर्चे पर कुछ जांच लिखकर दवाएं बाहर से लेने के लिए पर्ची थमा थी। जितेंद्र कुमार जब दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर गए तो उनकी कीमत पांच सौ रुपये हुई। मामला बच्ची के ठीक होने का था, इसलिए जितेंद्र कुमार को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ी। जिला अस्पताल के डॉक्टर द्वारा बाहर से लिखी जा रही दवाओं की पर्ची रविवार को सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। हालांकि इस मामले पर अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। बता दें कि सीएमएस ने अस्पताल की ही दवाएं मरीजों को लिखने और न होने की स्थित में जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखने के निर्देश जारी कर रखे हैं, लेकिन कमीशन के लालच में डॉक्टर मरीजों को न तो अस्पताल की दवाएं लिखते हैं और न ही जन औषधि केंद्र की। ऐसे में सस्ता और बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल आने वाले मरीजों का वहां का इलाज काफी महंगा पड़ रहा है।
दवाएं बाहर की न लिखें, इसके लिए डॉक्टरों को निर्देशित किया जा चुका है। दवाएं नहीं हैं तो उसके लिए शासन ने जनऔषधि केंद्र खुलवाया है। मरीज को बाहर की दवाएं लिखे जाने की जानकारी नहीं है। यदि पीड़ित शिकायत करता है तो जांच कराकर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। -डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
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सदर ब्लॉक के गांव कालाआम निवासी जितेंद्र कुमार बुखार पीड़ित छह साल की पुत्री सृष्टि को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपनी बेटी को बाल रोग विशेषज्ञ को दिखलाया। डॉक्टर ने पर्चे पर कुछ जांच लिखकर दवाएं बाहर से लेने के लिए पर्ची थमा थी। जितेंद्र कुमार जब दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर गए तो उनकी कीमत पांच सौ रुपये हुई। मामला बच्ची के ठीक होने का था, इसलिए जितेंद्र कुमार को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ी। जिला अस्पताल के डॉक्टर द्वारा बाहर से लिखी जा रही दवाओं की पर्ची रविवार को सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। हालांकि इस मामले पर अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे है। बता दें कि सीएमएस ने अस्पताल की ही दवाएं मरीजों को लिखने और न होने की स्थित में जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखने के निर्देश जारी कर रखे हैं, लेकिन कमीशन के लालच में डॉक्टर मरीजों को न तो अस्पताल की दवाएं लिखते हैं और न ही जन औषधि केंद्र की। ऐसे में सस्ता और बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल आने वाले मरीजों का वहां का इलाज काफी महंगा पड़ रहा है।
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दवाएं बाहर की न लिखें, इसके लिए डॉक्टरों को निर्देशित किया जा चुका है। दवाएं नहीं हैं तो उसके लिए शासन ने जनऔषधि केंद्र खुलवाया है। मरीज को बाहर की दवाएं लिखे जाने की जानकारी नहीं है। यदि पीड़ित शिकायत करता है तो जांच कराकर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। -डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
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