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जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन
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लखीमपुर खीरी। राजापुर आवासीय योजना को लेकर शनिवार को भी किसानों ने आपत्तियां जमा कीं। प्रदर्शन करके ज्यादातर किसानों ने किसी हाल में जमीन न देने और कुछ किसानों ने उचित मुआवजा मिलने पर ही जमीन देने की बात कही है। इस दौरान दो पक्षों के बीच विवाद भी हुआ, जिससे कोतवाली पुलिस को बुलाना पड़ा। जिम्मेदार अधिकारियों के कैंप में न आने से किसानों में नाराजगी दिखी।
आवास विकास परिषद लखनऊ द्वारा राजापुर आवासीय योजना के नाम पर किसानों की जमीनों की अधिगृहीत करने के लिए शुक्रवार को लखनऊ के अतिरिक्त डीएम कार्यालय के कर्मचारियों ने कैंप लगाया था, पहले दिन जमीन मालिकों को नोटिस दिए गए। इसमें एवार्ड (मुआवजा) तय करने के लिए पुराने 1894 एक्ट के नोटिस दी है और किसानों को आपत्ति दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। जबकि जमीनों का अधिग्रहण आवास अधिनियम 1965 के तहत किया गया है। इससे नाराज काफी किसानों ने पहले दिन ही नाराजगी जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें किसानों ने आवास विकास परिषद को जमीन न देने की बात कही है। दूसरे दिन कैंप में पहुंचकर उन्होंने अपनी बात रखते हुए प्रदर्शन किया।
राजापुर आवासीय योजना के तहत वर्ष 2010 में राजापुर, पिपरिया और बांसखेड़ा गांवों के 165 किसानों की 317 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई थी, लेकिन अभी तक किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया है। जमीन के मुआवजे को लेकर तकरार की स्थिति बनी हुई है।
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किसान अपनी कीमती जमीन को कौडिय़ों के भाव बेचना नहीं चाहते हैं, जिसको लेकर कई बार विरोध भी जता चुके हैं। 2016-17 में परिषद के अधिकारियों ने किसानों को 88 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर के दोगुने 1.76 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेअर मूल्य देने की बात कही थी, लेकिन अब अधिकारियों ने फिर से किसानों को भ्रमित करना शुरू कर दिया है। लखनऊ से आए अमीन राकेश श्रीवास्तव, कनिष्ठ सहायक हरिप्रकाश त्रिपाठी ने कलेक्ट्रेट स्थित निरीक्षण भवन में कैंप लगाकर किसानों को नोटिस वितरित की, जिसके बाद शनिवार को आपत्तियां जमा करकेे चले गए। किसी जिम्मेदार अधिकारी के कैंप में न आने से किसानों के सवालों का जवाब नहीं मिल सका।
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आवास विकास परिषद लखनऊ द्वारा राजापुर आवासीय योजना के नाम पर किसानों की जमीनों की अधिगृहीत करने के लिए शुक्रवार को लखनऊ के अतिरिक्त डीएम कार्यालय के कर्मचारियों ने कैंप लगाया था, पहले दिन जमीन मालिकों को नोटिस दिए गए। इसमें एवार्ड (मुआवजा) तय करने के लिए पुराने 1894 एक्ट के नोटिस दी है और किसानों को आपत्ति दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। जबकि जमीनों का अधिग्रहण आवास अधिनियम 1965 के तहत किया गया है। इससे नाराज काफी किसानों ने पहले दिन ही नाराजगी जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें किसानों ने आवास विकास परिषद को जमीन न देने की बात कही है। दूसरे दिन कैंप में पहुंचकर उन्होंने अपनी बात रखते हुए प्रदर्शन किया।
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राजापुर आवासीय योजना के तहत वर्ष 2010 में राजापुर, पिपरिया और बांसखेड़ा गांवों के 165 किसानों की 317 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई थी, लेकिन अभी तक किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया है। जमीन के मुआवजे को लेकर तकरार की स्थिति बनी हुई है।
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किसान अपनी कीमती जमीन को कौडिय़ों के भाव बेचना नहीं चाहते हैं, जिसको लेकर कई बार विरोध भी जता चुके हैं। 2016-17 में परिषद के अधिकारियों ने किसानों को 88 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर के दोगुने 1.76 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेअर मूल्य देने की बात कही थी, लेकिन अब अधिकारियों ने फिर से किसानों को भ्रमित करना शुरू कर दिया है। लखनऊ से आए अमीन राकेश श्रीवास्तव, कनिष्ठ सहायक हरिप्रकाश त्रिपाठी ने कलेक्ट्रेट स्थित निरीक्षण भवन में कैंप लगाकर किसानों को नोटिस वितरित की, जिसके बाद शनिवार को आपत्तियां जमा करकेे चले गए। किसी जिम्मेदार अधिकारी के कैंप में न आने से किसानों के सवालों का जवाब नहीं मिल सका।