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Lakhimpur Kheri News: सरकारी केंद्र खाली... आढ़तिये उठा रहे किसानों की मजबूरियाें का फायदा
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दलविंदर सिंह
लखीमपुर खीरी। सरकारी केंद्रों की लंबी प्रक्रिया और भुगतान में देरी किसानों को परेशान कर रही है। दिवाली के त्योहार को देखते हुए आढ़तिये भी किसानों की मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। एक क्विंटल धान पर किसान को करीब तीन से चार सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ये ठगी प्रशासन की आंख के सामने हो रही है, लेकिन रोकने वाला कोई नहीं है।
शुक्रवार को पड़ताल में सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया, लेकिन आढ़तें गुलजार थीं। इसकी सबड़े बड़ी वजह यह है कि आढ़तिये किसानों को तुरंत भुगतान कर देते हैं, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों की अपनी एक प्रक्रिया है। दिवाली जैसे त्योहार पर देरी से भुगतान की समस्या से बचने के लिए किसान आढ़तियों के पास पहुंच रहे हैं।
सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों को सामान्य धान 2300 रुपये व ग्रेड ए वाला धान 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।वहीं आढ़तों पर 1900 से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल तक ही धान की खरीद हो रही है। आढ़तिये किसानों की मजबूरियों का फायदा उठाकर मनमाने मूल्य पर धान खरीद रहे हैं।
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आढ़तों पर हाथ से नापी जा रही धान की नमी
सरकारी केंद्रों पर तो धान की नमी को नापने के लिए मशीनें हैं, लेकिन आढ़तों पर धान की नमी को हाथ से नापा जा रहा है। नमी देखने के बाद ही आढ़तिये फसल की बोली शुरू कराते हैं। दोनों की सहमति के बाद फसल तुलवाई जाती है। मंडी आने वाले किसानों ने बताया कि फसल सूखी होने के बाद भी आढ़तों पर सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
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शुक्रवार को पड़ताल में सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया, लेकिन आढ़तें गुलजार थीं। इसकी सबड़े बड़ी वजह यह है कि आढ़तिये किसानों को तुरंत भुगतान कर देते हैं, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों की अपनी एक प्रक्रिया है। दिवाली जैसे त्योहार पर देरी से भुगतान की समस्या से बचने के लिए किसान आढ़तियों के पास पहुंच रहे हैं।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों को सामान्य धान 2300 रुपये व ग्रेड ए वाला धान 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।वहीं आढ़तों पर 1900 से लेकर 1950 रुपये प्रति क्विंटल तक ही धान की खरीद हो रही है। आढ़तिये किसानों की मजबूरियों का फायदा उठाकर मनमाने मूल्य पर धान खरीद रहे हैं।
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आढ़तों पर हाथ से नापी जा रही धान की नमी
सरकारी केंद्रों पर तो धान की नमी को नापने के लिए मशीनें हैं, लेकिन आढ़तों पर धान की नमी को हाथ से नापा जा रहा है। नमी देखने के बाद ही आढ़तिये फसल की बोली शुरू कराते हैं। दोनों की सहमति के बाद फसल तुलवाई जाती है। मंडी आने वाले किसानों ने बताया कि फसल सूखी होने के बाद भी आढ़तों पर सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

दलविंदर सिंह

दलविंदर सिंह

दलविंदर सिंह

दलविंदर सिंह