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शोभायात्राएं निकालकर नदियों में किया देवी मूर्तियों का विसर्जन
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लखीमपुर खीरी में विसर्जन के लिए देवी प्रतिमाएं ले जाते श्रद्धालु।
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लखीमपुर खीरी। नवरात्र के बाद शुक्रवार को श्रद्घालुओं ने देवी मूर्तियों का पवित्र नदियों में विसर्जन किया। मूर्ति विसर्जन से पहले श्रद्घालुओं ने मां के जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा की शुरुआत संकटा देवी मंदिर से हुई। यहां स्थापित भव्य देवी प्रतिमा का पूजन और आरती करने के बाद वाहन पर लेकर शहर में शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा में शामिल लोग गुलाल उड़ाते और मां के जयकारे लगा रहे थे। शहर में शोभायात्रा निकालने के बाद इन मूर्तियों को शारदा नगर ले जाकर पवित्र शारदा नदी में विसर्जित किया। शीतला देवी मंदिर और वंकटा देवी मंदिर में स्थापित मूर्तियों का भी विधि विधान से विसर्जन किया गया। शुक्रवार को पूरे दिन मूर्ति विसर्जन की धूम रही। शहर में अलग अलग शोभायात्राएं निकाली गईं। कारोना गाइडलाइन के चलते इस बार मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में कम लोग शामिल रहे। इस दौरान रास्ते पर प्रसाद भी वितरित किया गया।
गोला गोकर्णनाथ। शुक्रवार को नगर और क्षेत्र में धूमधाम से नवरात्र में सजी देवी मां की मूर्तियों की विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। नगर के मुख्य मार्गों पर निकली विसर्जन शोभायात्रा में देवी मां की मूर्तियों को वाहनों पर सजा कर रखा गया। श्रद्धालुओं की टोलियां भक्ति गीतों पर थिरकते हुई अबीर गुलाल उड़ाते हुए चल रही थी। देवी मां के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में मूर्तियों को अलीगंज रोड स्थित उल्ल नदी में विसर्जित किया गया।
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बेलरायां। श्रद्धालुओं ने मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्रालियों में लेकर मोतीपुर जोरहा नदी में विसर्जित किया। रेलवे स्टेशन रोड के शिव मंदिर पर शुक्रवार को मां दुर्गा मूर्ति का पूजन पुजारी बालक राम तिवारी ने किया। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्राली पर रखकर रेलवे स्टेशन रोड, कुशाही बाजार, मोतीपुर होते हुए माता के जयकारे लगाते हुए सरयू नदी के मोतीपुर घाट विधिविधान के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया।
बिजुआ। नौ दिन तक चले नवरात्र के दौरान पंडालों मे स्थापित माता दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन का शुक्रवार को विविध विधान से विसर्जन किया गया। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार इस बार मूर्तियों को जल में प्रवाहित नहीं किया गया। शारदा नदी के किनारे गड्ढे खोदकर मूर्तियों को भू समाधि दी गई। भीरा, मटेहिया, बोझवा, जंगल नंबर सात, बरमबाबा, कुंअरपुर कलां, रामनगर कलां, पकरिया, पडरिया तुला, गुलरिया नौसरजोगी, बिजुआ, इटकुटी, भानपुर, बेलहासिकटिहा में भी मूर्तियां विसर्जित की गईं।
बांकेगंज। राधाकृष्ण मंदिर में आयोजित दुर्गा पूजा समारोह के अंतिम दिन माता रानी की शोभायात्रा निकाली गई। इससे पहले शास्त्री कुसुम कुमार वाजपेयी ने विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां दुर्गा का पूजन किया। दोपहर करीब दो बजे मंदिर प्रांगण से मां दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए बैंड बाजे के साथ कस्बा की सड़कों पर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में मौजूद महिलाओं ने माता रानी के भजनों का गायन करते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ बड़ी नहर के तट पर मां दुर्गा मूर्ति का विसर्जन किया।
नौ दिनों तक गाजे-बाजे, भजन कीर्तन के साथ पूजा अर्चना की गई। इसके बाद शुक्रवार को शारदा नदी तट पर बनाए गए अस्थायी तालाब में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इलाके के बोझवा गांव में नौ दिनों से हो रहे भजन कीर्तन, कथा का समापन भी किया गया। यहां कथावाचक पंडित आशीष दीक्षित, कथावाचिका रंगोली पटेल ने कथा का बखान किया। संवाद
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शोभायात्रा में शामिल लोग गुलाल उड़ाते और मां के जयकारे लगा रहे थे। शहर में शोभायात्रा निकालने के बाद इन मूर्तियों को शारदा नगर ले जाकर पवित्र शारदा नदी में विसर्जित किया। शीतला देवी मंदिर और वंकटा देवी मंदिर में स्थापित मूर्तियों का भी विधि विधान से विसर्जन किया गया। शुक्रवार को पूरे दिन मूर्ति विसर्जन की धूम रही। शहर में अलग अलग शोभायात्राएं निकाली गईं। कारोना गाइडलाइन के चलते इस बार मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में कम लोग शामिल रहे। इस दौरान रास्ते पर प्रसाद भी वितरित किया गया।
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गोला गोकर्णनाथ। शुक्रवार को नगर और क्षेत्र में धूमधाम से नवरात्र में सजी देवी मां की मूर्तियों की विसर्जन शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। नगर के मुख्य मार्गों पर निकली विसर्जन शोभायात्रा में देवी मां की मूर्तियों को वाहनों पर सजा कर रखा गया। श्रद्धालुओं की टोलियां भक्ति गीतों पर थिरकते हुई अबीर गुलाल उड़ाते हुए चल रही थी। देवी मां के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में मूर्तियों को अलीगंज रोड स्थित उल्ल नदी में विसर्जित किया गया।
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बेलरायां। श्रद्धालुओं ने मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्रालियों में लेकर मोतीपुर जोरहा नदी में विसर्जित किया। रेलवे स्टेशन रोड के शिव मंदिर पर शुक्रवार को मां दुर्गा मूर्ति का पूजन पुजारी बालक राम तिवारी ने किया। इसके बाद कमेटी के सदस्यों ने मूर्तियों को ट्रैक्टर ट्राली पर रखकर रेलवे स्टेशन रोड, कुशाही बाजार, मोतीपुर होते हुए माता के जयकारे लगाते हुए सरयू नदी के मोतीपुर घाट विधिविधान के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया।
बिजुआ। नौ दिन तक चले नवरात्र के दौरान पंडालों मे स्थापित माता दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन का शुक्रवार को विविध विधान से विसर्जन किया गया। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार इस बार मूर्तियों को जल में प्रवाहित नहीं किया गया। शारदा नदी के किनारे गड्ढे खोदकर मूर्तियों को भू समाधि दी गई। भीरा, मटेहिया, बोझवा, जंगल नंबर सात, बरमबाबा, कुंअरपुर कलां, रामनगर कलां, पकरिया, पडरिया तुला, गुलरिया नौसरजोगी, बिजुआ, इटकुटी, भानपुर, बेलहासिकटिहा में भी मूर्तियां विसर्जित की गईं।
जयकारों के साथ मूर्ति विसर्जन को गए श्रद्घालु
मैलानी। नवरात्र के दौरान नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। दोपहर में यहां से श्रद्घालु मां के जयकारों के साथ मूर्तियों को विसर्जन करने के लिए यहां से ले गए। इस दौरान श्रद्घालु आपस में रंग, अबीर, गुलाल लगा रहे थे।बांकेगंज। राधाकृष्ण मंदिर में आयोजित दुर्गा पूजा समारोह के अंतिम दिन माता रानी की शोभायात्रा निकाली गई। इससे पहले शास्त्री कुसुम कुमार वाजपेयी ने विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां दुर्गा का पूजन किया। दोपहर करीब दो बजे मंदिर प्रांगण से मां दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए बैंड बाजे के साथ कस्बा की सड़कों पर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में मौजूद महिलाओं ने माता रानी के भजनों का गायन करते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ बड़ी नहर के तट पर मां दुर्गा मूर्ति का विसर्जन किया।
शारदा नदी के तट पर बनाए तालाब में हुआ मूर्ति विसर्जन
पलियाकलां। नवरात्रि के अवसर शहर के कई मोहल्लों के मंदिरों, घरों के अलावा गांवों में मूर्तियों की स्थापना की गई थी।नौ दिनों तक गाजे-बाजे, भजन कीर्तन के साथ पूजा अर्चना की गई। इसके बाद शुक्रवार को शारदा नदी तट पर बनाए गए अस्थायी तालाब में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इलाके के बोझवा गांव में नौ दिनों से हो रहे भजन कीर्तन, कथा का समापन भी किया गया। यहां कथावाचक पंडित आशीष दीक्षित, कथावाचिका रंगोली पटेल ने कथा का बखान किया। संवाद