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सीपेज से बंजर हो रही सैकड़ों एकड़ जमीन
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज।
Updated Fri, 10 Feb 2017 10:38 PM IST
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बंजर जमीन
- फोटो : अमर उजाला
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- किसानों के खेतों में खीरी ब्रांच नहर और बरौंछा नाला के सीपेज का भरता है पानी
- आजादी के बाद से किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं दिया ध्यान, तबाह हो रहे किसान
ब्लाक की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10, जटपुरा और हरदुआ में खीरी ब्रांच नहर और बरौंछा नाले के दोनों ओर सैकड़ों एकड़ जमीन सीपेज के कारण बंजर हो चुकी है। इसके चलते किसान 54 हेक्टेयर जमीन में कई दशकों से धान के अलावा कोई दूसरी फसल नहीं उगा पा रहे हैं। लगातार सीपेज की नमी के चलते इस जमीन पर फसल तो होती नहीं, अलबत्ता स्थानीय भाषा में गोंदी कही जाने वाली लंबी झाड़ीनुमा घास जरूर लहलहा रही है।
मैलानी रेंज के जटपुरा बीट से सटा बरौंछा नाला जंगल से निकलकर उल्ल नदी में गिरता है। इस नाले में पूरे साल खीरी ब्रांच नहर की सीपेज का पानी भरा रहता है। ड्रेन के दोनों ओर ग्राम ढ़ाका, हरदुआ, जटपुरा, कुकरा, बांकेगंज, रत्नापुर सैकड़ों भूमिधरी किसानों की 135 एकड़ (54.6326 हेक्टेयर) जमीन है। किसानों का कहना है कि पहले यह नाला काफी गहरा था। धीरे-धीरे सिल्ट जमा होने के कारण गहराई कम होती गई। इससे दोनों तरफ सीपेज की समस्या बढ़ गई। हालत यह है कि अब यहां धान के अलावा दूसरी फसल उगती नहीं है। किसान अपनी समस्या से अधिकारियों के अलावा सांसदों और विधायकों को भी अवगत करा चुके है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
भूस्वामी होने के बावजूद भूमिहीन हैं किसान
इलाकाई किसानों का कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरी जमीन भी नहीं है। इसके चलते वह भूस्वामी होते हुए भी भूमिहीन बन गए हैं। वह इस जमीन को निरर्थक मानने लगे हैं।
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बैंक भी नहीं देती इस भूमि पर कर्ज
किसान मोहम्मद जाबिर, जगतार सिंह, रामकिशुन, श्याम लाल, वीरेन्द्र कुमार, साधू सिंह, रामशंकर, रामस्वरूप आदि ने बताया कि बैंक भी इस जमीन पर कर्ज नहीं देतीं। खरीददार भी दुर्दशा देखकर लौट जाते हैं।
नाले के आसपास बाघ और बाघिन का पूरे साल रहता बसेरा
बरौंछा नाले में पूरे साल पानी भरा रहने और लंबी झाड़ीनुमा घास खड़ी रहने से यहां हिरनों के साथ ही बाघ और बाघिन भी अपना बसेरा बनाते है। यह उनकी पसंदीदा जगह बन गई है। पिछले साल खेतों में गेहूं फसल कटाई कर रही ग्राम ढ़ाका निवासी किरन पर बाघ ने हमला कर मार डाला था। बाघों की मौजूदगी से किसान यह घास साफ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
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- आजादी के बाद से किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं दिया ध्यान, तबाह हो रहे किसान
ब्लाक की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10, जटपुरा और हरदुआ में खीरी ब्रांच नहर और बरौंछा नाले के दोनों ओर सैकड़ों एकड़ जमीन सीपेज के कारण बंजर हो चुकी है। इसके चलते किसान 54 हेक्टेयर जमीन में कई दशकों से धान के अलावा कोई दूसरी फसल नहीं उगा पा रहे हैं। लगातार सीपेज की नमी के चलते इस जमीन पर फसल तो होती नहीं, अलबत्ता स्थानीय भाषा में गोंदी कही जाने वाली लंबी झाड़ीनुमा घास जरूर लहलहा रही है।
मैलानी रेंज के जटपुरा बीट से सटा बरौंछा नाला जंगल से निकलकर उल्ल नदी में गिरता है। इस नाले में पूरे साल खीरी ब्रांच नहर की सीपेज का पानी भरा रहता है। ड्रेन के दोनों ओर ग्राम ढ़ाका, हरदुआ, जटपुरा, कुकरा, बांकेगंज, रत्नापुर सैकड़ों भूमिधरी किसानों की 135 एकड़ (54.6326 हेक्टेयर) जमीन है। किसानों का कहना है कि पहले यह नाला काफी गहरा था। धीरे-धीरे सिल्ट जमा होने के कारण गहराई कम होती गई। इससे दोनों तरफ सीपेज की समस्या बढ़ गई। हालत यह है कि अब यहां धान के अलावा दूसरी फसल उगती नहीं है। किसान अपनी समस्या से अधिकारियों के अलावा सांसदों और विधायकों को भी अवगत करा चुके है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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भूस्वामी होने के बावजूद भूमिहीन हैं किसान
इलाकाई किसानों का कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरी जमीन भी नहीं है। इसके चलते वह भूस्वामी होते हुए भी भूमिहीन बन गए हैं। वह इस जमीन को निरर्थक मानने लगे हैं।
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बैंक भी नहीं देती इस भूमि पर कर्ज
किसान मोहम्मद जाबिर, जगतार सिंह, रामकिशुन, श्याम लाल, वीरेन्द्र कुमार, साधू सिंह, रामशंकर, रामस्वरूप आदि ने बताया कि बैंक भी इस जमीन पर कर्ज नहीं देतीं। खरीददार भी दुर्दशा देखकर लौट जाते हैं।
नाले के आसपास बाघ और बाघिन का पूरे साल रहता बसेरा
बरौंछा नाले में पूरे साल पानी भरा रहने और लंबी झाड़ीनुमा घास खड़ी रहने से यहां हिरनों के साथ ही बाघ और बाघिन भी अपना बसेरा बनाते है। यह उनकी पसंदीदा जगह बन गई है। पिछले साल खेतों में गेहूं फसल कटाई कर रही ग्राम ढ़ाका निवासी किरन पर बाघ ने हमला कर मार डाला था। बाघों की मौजूदगी से किसान यह घास साफ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।