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लखीमपुर खीरी: जीएएस पोर्टल से जुड़ीं जिले की गोशालाएं

Tue, 14 Feb 2023 11:58 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 11:58 PM IST
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Gaushalas of the district linked to GAS portal
गोला ब्लाक में स्थित गोशाला
- गोआश्रय स्थलों की निगरानी के लिए गठित की गई प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट
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- जिले के 61 गोआश्रय स्थलों में 19726 गोवंशी पशुओं को मिली पनाह
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। गोशालाओं के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए जिले की सभी गोशालाओं को जीएएस पोर्टल से जोड़कर ऑनलाइन कर दिया गया है। जिले के सभी खंड विकास अधिकारियों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब इस पोर्टल पर गोवंशी पशुओं की संख्या, चारे की व्यवस्था, बीमार गायों का विवरण और उनके इलाज की स्थिति सब कुछ ऑनलाइन पता चल सकेगा।
गोशालाओं में चारे की कमी और गायों की देखरेख में खामियों, पशुओं के बीमार होने जैसी शिकायतें आम थीं। अब इन शिकायतों का तुरंत निस्तारण हो सकेगा। गोशाला में गायों की संख्या बढ़ने पर उनकी टैगिंग कर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। जब तक गोशाला में शामिल गोवंश को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जाएगा तब तक उसके लिए चारे की धनराशि नहीं मिल सकेगी। अब चारे के लिए धनराशि की मांग भी पोर्टल के माध्यम से होगी। अब गोशालाओं को चारे की धनराशि चेक के जरिए न भेजकर खाते में ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा।
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किसी भी पशु की मौत होने पर भी उसका विवरण पोर्टल पर डालना होगा। पशु की मौत की सूचना अपलोड होते ही उसके चारे की धनराशि में कटौती कर दी जाएगी। पोर्टल पर चारे की उपलब्धता का विवरण भी रहेगा। इसके साथ ही यदि कोई गोवंश बीमार होता है तो उसकी सूचना पोर्टल पर अपलोड होते ही पशु चिकित्सक गोशाला में जाकर बीमार पशु का इलाज करेगा, साथ ही वह इलाज का पूरा विवरण पोर्टल पर अपलोड करेगा।
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जिला स्तर पर गठित हुई प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट गोशालों के बेहतर रखरखाव के लिए जिला पर प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट का गठन किया गया है, जो गोशालाओं की व्यवस्था की निगरानी करेगी। गोशालाओं के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं जो लगातार गोशालाओं की व्यवस्था पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तरीय अधिकारियों को संपूर्ण समाधान दिवस में जाने वाले अधिकारियों को निकटवर्ती गोशालाओं का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले के गोआश्रय स्थलों और आश्रय पाने वाले पशुओं की स्थिति
गोआश्रय स्थल श्रेणी संख्या संरक्षित गोवंश
अस्थायी गोआश्रय स्थल 49 15270
वृहद गोसंरक्षण केंद्र 05. 2654
जिला पंचायत से संचालित 02 582
नगरीय निकायो से संचालित 05 1220
योग 61 19726

पशुओं को पकड़ने के लिए कैटल कैचर.............07
इस वित्तीय वर्ष में और प्रस्तावित गोशला........30

ऐसे होती है गोशालाओं में चारे की व्यवस्था
गोशालों में आश्रय पाए गोवंश के लिए प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाता है। इसके अलावा जिला स्तर पर भूसा बैंक स्थापित किया गया है। जिसमें 12008 क्विंटल भूसा उपलब्ध है। गोशालाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए सीडीओ अनिल कुमार सिंह की पहल पर और डीपीआरओ के सहयोग से ग्राम पंचायतों ने 33,71,526 रुपये की धनराशि पूल की गई है। काऊ प्रोटेक्शन फंड में भी 23,79,242 रुपये की धनराशि जमा है।



गोशालाओं के बेहतर प्रबंधन और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए जिले की सभी 61 गोशालाओं को जीएएस पोर्टल से जोड़कर ऑन लाइन कर दिया गया है। जिले में दो माह पहले तक 49 गोआश्रय स्थल थे जिनकी संख्या बढ़कर अब 61 हो गई है। 28 फरवरी तक 30 और गोआश्रय स्थल बनाए जाने हैं। गोआश्रय स्थलों की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट का भी गठन किया गया है।
- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ, लखीमपुर खीरी।

गोला ब्लाक में स्थित गोशाला

गोला ब्लाक में स्थित गोशाला

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