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गणेश चतुर्थी आज: घरों में ही रहकर करना होगा पूजन अर्चन
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Ganesh Chaturthi today: Will have to worship at home
गोला गोकर्णनाथ। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश जी का जन्म हुआ था, हिंदू धर्म में सभी प्रकार के शुभ कार्यों में प्रथम पूजनीय गणेश जी की ही पूजा अर्चना का विधान है। इसी कारण प्रत्येक वर्ष भाद्रमास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप मे यह पर्व मनाया जाएगा। कोविड संक्रमण के चलते इस बार सामूहिक पूजन पर रोक है लोगों को घरों पर ही श्री गणेश का पूजन अर्चन करना होगा।
खुटार रोड निवासी ज्योतिषाचार्य जितेंद्र वर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी का मुहूर्त 21 अगस्त भाद्रमास शुक्ल पक्ष तृतीया की रात्रि 11 बजकर 02 मिनट से प्रारंभ होकर 22 अगस्त शनिवार को शाम सात बजकर 57 मिनट तक है, हस्त नक्षत्र भी 7 बजकर 10 मिनट तक है। गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था इसलिए गणेश जी का पूजन मुहूर्त सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर एक बजकर 42 मिनट तक शुभ है। इस वार गणेश चतुर्थी का पर्व ऐसे समय में मनाया जा रहा है जिस समय सूर्य अपनी ही राशि सिंह और मंगल भी अपनी राशि में मेष में रहेंगे। यह संयोग 126 साल बाद पड़ने जा रहा है। इस प्रकार गणेश चतुर्थी पर यह एक ख़ास संयोग बन रहा है। दस दिन तक चलने बाला गणेश उत्सव, गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के ही दिन घरों में मिट्टी के गणेश जी की मूर्ति स्थापना कर अनंत चतुर्दशी के दिन जल मे विसर्जन करने की परंपरा है। इस बार एक सितंबर को मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। भारत वर्ष में यह पर्व विशेषकर महाराष्ट्र में बड़ी श्रद्धा के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। किंतु कोरोना महामारी के कारण इस बार अपने-अपने घरों में ही मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन किया जा सकेगा। संवाद
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खुटार रोड निवासी ज्योतिषाचार्य जितेंद्र वर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी का मुहूर्त 21 अगस्त भाद्रमास शुक्ल पक्ष तृतीया की रात्रि 11 बजकर 02 मिनट से प्रारंभ होकर 22 अगस्त शनिवार को शाम सात बजकर 57 मिनट तक है, हस्त नक्षत्र भी 7 बजकर 10 मिनट तक है। गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ था इसलिए गणेश जी का पूजन मुहूर्त सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर एक बजकर 42 मिनट तक शुभ है। इस वार गणेश चतुर्थी का पर्व ऐसे समय में मनाया जा रहा है जिस समय सूर्य अपनी ही राशि सिंह और मंगल भी अपनी राशि में मेष में रहेंगे। यह संयोग 126 साल बाद पड़ने जा रहा है। इस प्रकार गणेश चतुर्थी पर यह एक ख़ास संयोग बन रहा है। दस दिन तक चलने बाला गणेश उत्सव, गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के ही दिन घरों में मिट्टी के गणेश जी की मूर्ति स्थापना कर अनंत चतुर्दशी के दिन जल मे विसर्जन करने की परंपरा है। इस बार एक सितंबर को मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। भारत वर्ष में यह पर्व विशेषकर महाराष्ट्र में बड़ी श्रद्धा के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। किंतु कोरोना महामारी के कारण इस बार अपने-अपने घरों में ही मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन किया जा सकेगा। संवाद
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-जितेंद्र वर्मा।- फोटो : LAKHIMPUR