{"_id":"578d13ee4f1c1b9432c4bfe8","slug":"from-sunday-night-to-harass-the-rural-tigress","type":"story","status":"publish","title_hn":" रविवार रात बाघिन से हलकान रहे ग्रामीण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रविवार रात बाघिन से हलकान रहे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां-चंदनचौकी (लखीमपुर खीरी)।
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
बाघिन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवार को मसानखंभ गांव में मृत मिली बाघिन ने रविवार की रात एक युवक को जख्मी कर दिया था। इससे लोग दहशत में तो थे ही रात में फिर यह बाघिन फिर गांव आ गई और फिर उसी युवक की बकरी को मार डाला। हालांकि जाग होने पर वह बकरी को खाए बिना ही चली गई। इससे ग्रामीण पूरी रात हलकान रहे। सुबह उसका शव घारी से मिला। बताया जा रहा है कि बाघिन इस गांव के खेतों में एक दिन पहले डेरा जमाए हुए थी। पार्क कर्मी और ग्रामीणों ने उसे खदेड़ने का प्रयास भी किया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी। रविवार को उसने कल्लू पुत्र घुम्मन को जख्मी भी कर दिया। देर रात करीब दो बजे बाघिन खेतों की ओर से फिर कल्लू के घर पहुंची और उसकी बकरी को मार डाला। इस बीच जगार हो गई तो बाघिन बकरी को छोड़कर वापस लौट गई। सुबह उसका शव चंदर की घारी में मिला। --
मौत की खबर पर बुलाए गए हाथी वापस
पार्क प्रशासन ने रविवार को इस बाघिन को खदेड़ कर जंगल ले जाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई थी। रेंजर मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि हाथियों से कांबिंग कर बाघिन को जंगल की ओर खदेड़ने की योजना बनी। सुबह दुधवा के तीन हाथी चल भी दिए। वह सौनहा गांव पहुंचे थे, तभी बाघिन का शव मिलने की खबर मिली। हाथी दल वहीं से वापस हो गया।
जख्मों पर पड़े कीड़े से शिकार की आशंका पर लगा विराम
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हटेगा पर्दा
बाघिन का शव युवक को जख्मी करने के बाद मिला, इससे स्थिति वन्यजीव मानव संघर्ष की ओर इशारा करने लगी लेकिन बाघिन के शरीर पर मिले घाव और उसमें पड़े कीड़ों ने इस आशंका पर विराम लगा दिया।
विज्ञापन
रविवार को जब बाघिन ने मसानखंभ के कल्लू पर हमला किया तो गांव वालों के भीतर डर के साथ गुस्सा भी पनपने लगा। ठीक उसी सुबह गांव के भीतर एक ग्रामीण की जानवर बांधने वाली घारी में उसी बाघिन का शव पड़ा होने की जानकारी मिली तो यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। अधिकारियों में हड़कंप था और आम लोग हैरत में थे। खबर सुनने से यही लग रहा था कि जैसा कई घटनाओं में हो चुका है वैसा ही हुआ होगा लेकिन जब मौके पर हालात दिखाई दिए तो सोच पर विराम लग गया । बाघिन के सिर से लेकर पीठ और पूंछ और उसके निचले हिस्से में कई घाव हैं जिनमें तमाम कीड़े पड़े हुए हैं। बाघिन उम्रदराज होने के कारण काफी कमजोर भी थी। घाव देखकर नहीं लग रहा था कि यह नए जख्म हैं। चिकित्सकीय पैनल ने भी इसे काफी पुराना जख्म बताया है। फौरी तौर पर बाघिन की मौत का कारण वन्यजीव मानव संघर्ष नहीं लग रहा है। अब पार्क प्रशासन को पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है।
विज्ञापन
मौत की खबर पर बुलाए गए हाथी वापस
पार्क प्रशासन ने रविवार को इस बाघिन को खदेड़ कर जंगल ले जाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई थी। रेंजर मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि हाथियों से कांबिंग कर बाघिन को जंगल की ओर खदेड़ने की योजना बनी। सुबह दुधवा के तीन हाथी चल भी दिए। वह सौनहा गांव पहुंचे थे, तभी बाघिन का शव मिलने की खबर मिली। हाथी दल वहीं से वापस हो गया।
विज्ञापन
जख्मों पर पड़े कीड़े से शिकार की आशंका पर लगा विराम
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हटेगा पर्दा
बाघिन का शव युवक को जख्मी करने के बाद मिला, इससे स्थिति वन्यजीव मानव संघर्ष की ओर इशारा करने लगी लेकिन बाघिन के शरीर पर मिले घाव और उसमें पड़े कीड़ों ने इस आशंका पर विराम लगा दिया।
विज्ञापन
रविवार को जब बाघिन ने मसानखंभ के कल्लू पर हमला किया तो गांव वालों के भीतर डर के साथ गुस्सा भी पनपने लगा। ठीक उसी सुबह गांव के भीतर एक ग्रामीण की जानवर बांधने वाली घारी में उसी बाघिन का शव पड़ा होने की जानकारी मिली तो यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। अधिकारियों में हड़कंप था और आम लोग हैरत में थे। खबर सुनने से यही लग रहा था कि जैसा कई घटनाओं में हो चुका है वैसा ही हुआ होगा लेकिन जब मौके पर हालात दिखाई दिए तो सोच पर विराम लग गया । बाघिन के सिर से लेकर पीठ और पूंछ और उसके निचले हिस्से में कई घाव हैं जिनमें तमाम कीड़े पड़े हुए हैं। बाघिन उम्रदराज होने के कारण काफी कमजोर भी थी। घाव देखकर नहीं लग रहा था कि यह नए जख्म हैं। चिकित्सकीय पैनल ने भी इसे काफी पुराना जख्म बताया है। फौरी तौर पर बाघिन की मौत का कारण वन्यजीव मानव संघर्ष नहीं लग रहा है। अब पार्क प्रशासन को पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है।