फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Forest department got land after 62 years of fight

Lakhimpur Kheri News: 62 साल की लड़ाई के बाद वन विभाग को मिली जमीन

Wed, 13 Nov 2024 11:17 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2024 11:17 PM IST
विज्ञापन
Forest department got land after 62 years of fight
लखीमपुर खीरी। ग्रामसभा और वन विभाग के बीच दशकों से चल रही जमीन की लड़ाई का 62 साल बाद फैसला हो गया है। वन विभाग लगातार अपनी दावेदारी मजबूती के साथ पेश करता रहा। अब चकबंदी विभाग ने इस जमीन को वन विभाग के खाते में दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।
विज्ञापन

निघासन के बैलहा गांव स्थित जमीन की दावेदारी को लेकर वन विभाग सहित दो पक्षों में वर्ष 1962 से मामला चल रहा था। यह जमीन चंद्रभाल आदि के नाम दर्ज थी। वन विभाग ने इस पर आपत्ति लगाते हुए अपनी जमीन होने का दावा किया।
विज्ञापन

राज्यपाल की ओर से भारतीय वन अधिनियम धारा-20 के तहत यह जमीन वन विभाग को घोषित कर दी गई। सुनवाई करते हुए चकबंदी अधिकारी अंतिम अभिलेख द्वितीय ने इस जमीन को वन विभाग के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जारी आदेश में कहा है कि वनाधिकारी दक्षिण निघासन रेंज उत्तर खीरी की आपत्ति स्वीकार की जाती है। दर्ज खातों में अंकित गाटा संख्या 1621/1.513 हेक्टेयर लिखित खातेदार से खारिज करके वन भूमि में दर्ज की जाए।
यह मामला दशकों से चल रहा था। चकबंदी अधिकारी द्वितीय आरके गुप्ता ने बताया यह जमीन ग्राम सभा के नवीन पर्ती के खाते में दर्ज थी। इस पर वन विभाग ने आपत्ति दाखिल की थी।

चकबंदी अधिकारी द्वितीय के न्यायालय में मामला चला, जिसमें पाया गया कि धारा-20 की घोषित वन भूमि मानी जाती है। इसके बाद यह जमीन वन विभाग के खाते में दर्ज की दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed