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Lakhimpur Kheri News: प्रदेश में पहली बार शावक के साथ पकड़ी गई बाघिन

Wed, 23 Apr 2025 11:48 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:48 PM IST
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For the first time in the state, a tigress was caught with her cub
मौके पर मौजूद एपीसीसीएफ,साथ में डीएफओ संजय बिश्वाल। स्रोत-विभाग। - फोटो : अर्जुन बांध के निरीक्षण के बाद काकुन गांव में पार्टी पदा​धिकारियों से वार्ता करते जलश​क्ति मंत्री। संवाद
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। कई दिनों की मशक्कत के बाद ममरी के इमलिया गांव में दहशत का पर्याय बनी बाघिन को शावक के साथ पकड़ लिया गया है। डीएफओ संजय विश्वाल के मुताबिक, ऐसा प्रदेश में पहली बार हुआ है, जब शावक और बाघिन पकड़े गए। जांच में दोनों स्वस्थ निकले हैं। शावक की उम्र चार से पांच माह बताई गई।
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पिछले वर्ष माह अगस्त और सितंबर में ग्राम इमलिया निवासी किसान अमरेश कुमार और मूड़ा अस्सी निवासी किसान जाकिर अली को मौत के घाट उतारने वाली बाघिन ने 12 अप्रैल को ग्राम मूड़ा जवाहर निवासी किसान मुन्नालाल पर भी हमला करके गंभीर घायल कर दिया था।
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इसके बढ़ते हमलों से क्षेत्र में इस कदर दहशत थी कि लोगों ने खेतों पर जाना बंद कर दिया था। बाघिन, शावक के साथ सरायन नदी की झाड़ी में मौजूद थी। हालांकि वनकर्मी बाघिन को खदेड़ने की कोशिश में लगे थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर क्षेत्रवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल 15 अप्रैल को गोला विधायक अमन गिरि के साथ लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला और उन्हें समस्या से अवगत कराया।
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मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को बाघिन पकड़वाने के निर्देश दिए। बीस अप्रैल को बाघिन को बेहोश कर पकड़ने की अनुमति मिली। रेंजर निर्भय प्रताप शाही ने बताया कि झाड़ी के आसपास खाबड़ भी लगाई गई थी। सोमवार की रात बाघिन का शावक जब खाबड़ में फंस गया तो विशेषज्ञ टीम ने उसे खाबड़ से निकाल कर पिंजरे में बंद कर लिया।
मंगलवार की शाम बाघिन जब शावक की तलाश में झाड़ी से बाहर निकली, तो एक्सपर्ट टीम के डॉक्टर दीपक और डॉक्टर दयाशंकर ने उसे ट्रैंक्युलाइज कर पिंजरे में बंद कर लिया। बताया कि पिंजरे में कैद शावक और बाघिन को वनकर्मियों और डॉक्टरों की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। जिन्हें महफूज स्थान पर ले जाने के लिए अधिकारियों से विचार-विमर्श चल रहा है। ऐसा प्रदेश में पहली बार हुआ है, जब बाघिन और शावक पकड़े गए।

दोपहर में पहुंची अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) लखनऊ मंडल रेनू सिंह बुधवार दोपहर मौके पर पहुंची। जहां उन्होंने दोनों की बेहतर देखभाल के लिए वनाधिकारियों और वन कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। डीएफओ संजय बिश्वाल ने बताया कि उच्चाधिकारियों से बाघिन और उसके शावक को जंगल में छोड़ने की अभी अनुमति नहीं मिली है। अनुमति मिलते ही दोनों को स्वछंद विचरण के लिए सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा।
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