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मोहाना, करनाली के कटान से बदला सीमाई इलाके का भूगोल
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फूलबेहड़ क्षेत्र में बनी वन चौकी कटान के कगार पर। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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तिकुनियां। भारत-नेपाल सीमा पर मोहाना और करनाली नदी ने बीते पांच वर्षों में बाढ़ और कटान करके इलाके का भूगोल ही बदल दिया है। सैकड़ों एकड़ फसलें नदी में समा गईं। वही सूरतनगर गांव, कई स्कूल भी नदी में समा चुके हैं।
सूरतनगर गांव के लोगों को तिकुनिया स्थित नयापुरवा गांव के नाम से प्रशासन ने भूमि खरीद करके दी है जहां उन्हें बसाया गया। अब नया पिंड, पुरबिया बस्ती और चोगुर्जी गांव भी उजड़ने के कगार पर हैं।
सीमाई इलाके में कटान पीड़ितों का दर्द सुनने के लिए दो दिन पहले कमिश्नर नया पिंड गांव पहुंचे तो सबसे पहले यहां के कटान पीड़ितों ने उनसे यही सवाल किया कि हम लोगों को आप कहां ठिकाना देंगे। जिस पर कमिश्नर ने आश्वासन दिया जल्दी ही जगह देकर बसाया जाएगा।
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इस समय मोहाना और करनाली नदियां ग्राम पंचायत गंगानगर के मजरा गांव पुरबिया बस्ती, इंदर नगर का तेजी से कटान कर रहीं हैं। पुरबिया बस्ती की नौलखिया बताती हैं कि घर नदी में समा गया अगर प्रशासन चेता होता तो घर नहीं कटते। गांव के ही तारा सिंह बताते हैं कि तहसीलदार विपिन दुबे आए थे त्रिपाल दे गए थे और कहा था जो भी मदद होगी की जाएगी लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
मलकीत सिंह बताते हैं कि उनका गांव दो तरफ से मुहाना और करनाली नदियों से घिरा है जो टापू जैसा दिखाई देता है। यह नदियां निरंतर कटान कर रहीं हैं। गांव के 6 लोगों के घर कट चुके हैं। गांव से बाजार तिकुनियां आने के लिए एक किलोमीटर से अधिक चौड़ी महा नदी को नाव से पार करना पड़ता है जो बहुत जोखिम भरा है।
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पलिया : जंगल नंबर छह और बरूआ कलां की जमीन खतरे में
पलियाकलां। बनबसा बैराज से कई दिनों से पानी न छोड़े जाने से शारदा नदी का जलस्तर कम होने लगा है पर कटान बढ़ गया है।
जंगल नंबर छह में नदी ने तेजी से धान व गन्ने की खड़ी फसल को काटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों शिव कुमार, मायाराम, नेकीराम, चमनलाल, सुधीर शर्मा, महेश शर्मा आदि किसानों की फसल को शारदा नदी काट चुकी है। वहीं बरूआ कलां गांव में भी नदी खेतिहर इलाके में तेजी से कटान कर रही है। यहां पर मटैहिया, बोझवा, दौलतापुर गांव के किसानों की जमीनें हैं जिनपर धान व गन्ने की फसल बोई हुई है। लेकिन नदी तेजी से कटान कर रही है। संवाद
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सूरतनगर गांव के लोगों को तिकुनिया स्थित नयापुरवा गांव के नाम से प्रशासन ने भूमि खरीद करके दी है जहां उन्हें बसाया गया। अब नया पिंड, पुरबिया बस्ती और चोगुर्जी गांव भी उजड़ने के कगार पर हैं।
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सीमाई इलाके में कटान पीड़ितों का दर्द सुनने के लिए दो दिन पहले कमिश्नर नया पिंड गांव पहुंचे तो सबसे पहले यहां के कटान पीड़ितों ने उनसे यही सवाल किया कि हम लोगों को आप कहां ठिकाना देंगे। जिस पर कमिश्नर ने आश्वासन दिया जल्दी ही जगह देकर बसाया जाएगा।
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इस समय मोहाना और करनाली नदियां ग्राम पंचायत गंगानगर के मजरा गांव पुरबिया बस्ती, इंदर नगर का तेजी से कटान कर रहीं हैं। पुरबिया बस्ती की नौलखिया बताती हैं कि घर नदी में समा गया अगर प्रशासन चेता होता तो घर नहीं कटते। गांव के ही तारा सिंह बताते हैं कि तहसीलदार विपिन दुबे आए थे त्रिपाल दे गए थे और कहा था जो भी मदद होगी की जाएगी लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
मलकीत सिंह बताते हैं कि उनका गांव दो तरफ से मुहाना और करनाली नदियों से घिरा है जो टापू जैसा दिखाई देता है। यह नदियां निरंतर कटान कर रहीं हैं। गांव के 6 लोगों के घर कट चुके हैं। गांव से बाजार तिकुनियां आने के लिए एक किलोमीटर से अधिक चौड़ी महा नदी को नाव से पार करना पड़ता है जो बहुत जोखिम भरा है।
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पलिया : जंगल नंबर छह और बरूआ कलां की जमीन खतरे में
पलियाकलां। बनबसा बैराज से कई दिनों से पानी न छोड़े जाने से शारदा नदी का जलस्तर कम होने लगा है पर कटान बढ़ गया है।
जंगल नंबर छह में नदी ने तेजी से धान व गन्ने की खड़ी फसल को काटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों शिव कुमार, मायाराम, नेकीराम, चमनलाल, सुधीर शर्मा, महेश शर्मा आदि किसानों की फसल को शारदा नदी काट चुकी है। वहीं बरूआ कलां गांव में भी नदी खेतिहर इलाके में तेजी से कटान कर रही है। यहां पर मटैहिया, बोझवा, दौलतापुर गांव के किसानों की जमीनें हैं जिनपर धान व गन्ने की फसल बोई हुई है। लेकिन नदी तेजी से कटान कर रही है। संवाद