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गांव में बाढ़ का कहर, तहसीलों की रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य
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मंझरी में घर और खेतों को काटती नदी।
पलिया क्षेत्र में कई गांव पानी से घिरे, खेतों में पहुंचना हुआ मुश्किल
धौरहरा क्षेत्र में करीब एक दर्जन घर नदी के कटान की भेंट चढ़े
लखीमपुर खीरी। जनपद में पिछले कुछ दिनों से अच्छी बारिश होने के साथ ही धौरहरा व पलिया तहसील क्षेत्रों में कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। धौरहरा क्षेत्र में कटान की जद में आकर दर्जन भर मकान नदी में समा गए हैं। वहीं तहसील व जिला प्रशासन की नजर में अभी हालात सामान्य बने हुए हैं।
पलिया क्षेत्र में कई गांवों के लोगों का आवागमन बाधित है, जिससे कामकाज के सिलसिले में बाहर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर कई किलोमीटर का फेर लगाना पड़ रहा है। बावजूद इसके किसी तहसील से बाढ़-कटान को लेकर कोई रिपोर्ट आपदा राहत विभाग को नहीं दी गई है। इससे बचाव व राहत कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। बाढ़ में फंसे लोगों तक सरकारी मदद पहुंचाने की कार्रवाई भी प्रारंभ नहीं की गई है।
नदी के कटान से 17 दिन में मिर्जापुरवा के एक दर्जन घर घाघरा नदी में समाए
धौरहरा। ब्लॉक ईसानगर के ग्राम पंचायत मिर्जापुरवा में नदी के कटान से पिछले 17 दिनों में एक दर्जन से अधिक घर नदी में समा चुके हैं, जबकि आधा गांव कटान की जद में है। ग्राम पंचायत के ही मजरा गनापुर, भदईपुरवा, हटवा और साहबदीनपुरवा में रास्तों पर जलभराव होने कारण आवागमन में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। बाढ़ खंड द्वारा आवास और कृषि भूमि को कटान से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन मिर्जापुरवा में घाघरा का अब भी तांडव जारी है।
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बरसात के मौसम में हर साल घरों को खेतों को निगलने वाली घाघरा नदी इस साल भी उफान पर है। अभी बाढ़ के हालात तो नहीं हैं, लेकिन धार तेज होने के कारण तेजी से कटान हो रहा है। इस बार शारदा नदी के किनारे बसे गांव अभी कटान की जद से दूर हैं। फिर भी खतरा टला नहीं है। चहमलपुर गांव में कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने जो ठोकरें बनाई थीं, उसके बगल से होकर नदी कटान कर रही है। इससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि के लिए खतरा पैदा हो गया है।
बाढ़ खंड के अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि शारदा नदी में शारदा बैराज से 135.30 लाख क्यूसेक और गिरिजापुरी बैराज से घाघरा नदी में 135.60 लाख क्यूसेक पानी रिलीज किया गया है। इससे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। सिंचाई विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
12 किलोमीटर चलकर खेतों पर पहुंच रहे ग्रामीण
पलियाकलां। शारदा नदी के जलस्तर में रविवार को मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बोझवा की ठोकर नंबर जीरो व एक पर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे बोझवा समेत मटैहिया व दौलतापुर के ग्रामीण नदी पार अपने खेतों में 12 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर जाने को विवश हैं।
जल आयोग के मुताबिक, शारदा नदी का जलस्तर घटा है, लेकिन नदी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बोझवा गांव में लाइन पार ठोकर नंबर जीरो व एक आती है। इस ठोकर का रास्ता हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है, जिससे ग्रामीण खेतों में चारा लाने के लिए नाव से जाते हैं। बीते तीन दिनों से नदी का जलस्तर लगातार घट बढ़ रहा है, जिससे इन ठोकरों के रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए है। अब ग्रामीण अपने खेतों में भीरा होते हुए गुरुद्वारा के आगे बैरियर को पार कर लंबी दूरी का चक्कर लगाकर खेतों में जा रहे हैं। इससे धन के साथ समय का भी दुरुपयोग होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अभी गांवों में बाढ़ का असर नहीं है। किसी तहसील से अब तक इस संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे अभी राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है और न ही खाद्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है। बाढ़-कटान की विभीषिका से निपटने के लिए बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया जा चुका है और प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित हैं। इससे स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। तहसीलों को आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
- संजय कुमार सिंह, एडीएम
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धौरहरा क्षेत्र में करीब एक दर्जन घर नदी के कटान की भेंट चढ़े
लखीमपुर खीरी। जनपद में पिछले कुछ दिनों से अच्छी बारिश होने के साथ ही धौरहरा व पलिया तहसील क्षेत्रों में कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। धौरहरा क्षेत्र में कटान की जद में आकर दर्जन भर मकान नदी में समा गए हैं। वहीं तहसील व जिला प्रशासन की नजर में अभी हालात सामान्य बने हुए हैं।
पलिया क्षेत्र में कई गांवों के लोगों का आवागमन बाधित है, जिससे कामकाज के सिलसिले में बाहर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर कई किलोमीटर का फेर लगाना पड़ रहा है। बावजूद इसके किसी तहसील से बाढ़-कटान को लेकर कोई रिपोर्ट आपदा राहत विभाग को नहीं दी गई है। इससे बचाव व राहत कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। बाढ़ में फंसे लोगों तक सरकारी मदद पहुंचाने की कार्रवाई भी प्रारंभ नहीं की गई है।
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नदी के कटान से 17 दिन में मिर्जापुरवा के एक दर्जन घर घाघरा नदी में समाए
धौरहरा। ब्लॉक ईसानगर के ग्राम पंचायत मिर्जापुरवा में नदी के कटान से पिछले 17 दिनों में एक दर्जन से अधिक घर नदी में समा चुके हैं, जबकि आधा गांव कटान की जद में है। ग्राम पंचायत के ही मजरा गनापुर, भदईपुरवा, हटवा और साहबदीनपुरवा में रास्तों पर जलभराव होने कारण आवागमन में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। बाढ़ खंड द्वारा आवास और कृषि भूमि को कटान से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन मिर्जापुरवा में घाघरा का अब भी तांडव जारी है।
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बरसात के मौसम में हर साल घरों को खेतों को निगलने वाली घाघरा नदी इस साल भी उफान पर है। अभी बाढ़ के हालात तो नहीं हैं, लेकिन धार तेज होने के कारण तेजी से कटान हो रहा है। इस बार शारदा नदी के किनारे बसे गांव अभी कटान की जद से दूर हैं। फिर भी खतरा टला नहीं है। चहमलपुर गांव में कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने जो ठोकरें बनाई थीं, उसके बगल से होकर नदी कटान कर रही है। इससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि के लिए खतरा पैदा हो गया है।
बाढ़ खंड के अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि शारदा नदी में शारदा बैराज से 135.30 लाख क्यूसेक और गिरिजापुरी बैराज से घाघरा नदी में 135.60 लाख क्यूसेक पानी रिलीज किया गया है। इससे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। सिंचाई विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
12 किलोमीटर चलकर खेतों पर पहुंच रहे ग्रामीण
पलियाकलां। शारदा नदी के जलस्तर में रविवार को मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बोझवा की ठोकर नंबर जीरो व एक पर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे बोझवा समेत मटैहिया व दौलतापुर के ग्रामीण नदी पार अपने खेतों में 12 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर जाने को विवश हैं।
जल आयोग के मुताबिक, शारदा नदी का जलस्तर घटा है, लेकिन नदी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बोझवा गांव में लाइन पार ठोकर नंबर जीरो व एक आती है। इस ठोकर का रास्ता हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है, जिससे ग्रामीण खेतों में चारा लाने के लिए नाव से जाते हैं। बीते तीन दिनों से नदी का जलस्तर लगातार घट बढ़ रहा है, जिससे इन ठोकरों के रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए है। अब ग्रामीण अपने खेतों में भीरा होते हुए गुरुद्वारा के आगे बैरियर को पार कर लंबी दूरी का चक्कर लगाकर खेतों में जा रहे हैं। इससे धन के साथ समय का भी दुरुपयोग होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अभी गांवों में बाढ़ का असर नहीं है। किसी तहसील से अब तक इस संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे अभी राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है और न ही खाद्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है। बाढ़-कटान की विभीषिका से निपटने के लिए बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया जा चुका है और प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित हैं। इससे स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। तहसीलों को आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
- संजय कुमार सिंह, एडीएम