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तराई में दिखा दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का झुंड
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भीरा रेंज जंगल से सटे इलाके में झुंड में दिखे दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध।
वन्यजीव : विशेषज्ञों ने बताया व्हाइट बिल्ड बल्चर प्रजाति के हैं ये गिद्ध, कम ही दिखते हैं
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में अरसे बाद गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखा है। तेजी से लुप्त हो रहे गिद्धों के इतने बड़े झुंड को देखकर पर्यावरण प्रेमियों में खुशी है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, दिखाई पड़ा यह झुंड व्हाइट बिल्ड बल्चर प्रजाति का है, जो तराई में दुर्लभ माने जाते हैं।
भीरा रेंज की पल्हनापुर रेंज में बृहस्पतिवार की सुबह गश्त कर रहे रेंजर राकेश बाबू वर्मा, फॉरेस्टर मोहम्मद उमर को जंगल से सटे इलाके में गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई पड़ा। दुर्लभ प्रजाति के करीब 50 गिद्धों के झुंड को देखकर वन कर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले इन गिद्धों के लापता होने से पर्यावरण को शुद्ध रखने का संकट पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में भारत सरकार समेत पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं ने गिद्धों के संरक्षण के लिए एक अभियान के रूप में काम किया। परिणाम स्वरूप गिद्धों की आबादी में इजाफा शुरू हुआ। पिछले दो वर्षों से यदा-कदा गिद्धों के झुंड दिखाई पड़ने लगे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि गिद्ध संरक्षण के लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित होने के बाद गिद्धों को मिला जीवनदान
पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनिक दवा तराई के गिद्धों के लिए जानलेवा साबित हुई है। दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर बताते हैं कि संबंधित दवा के इस्तेमाल के बाद पशुओं की मृत्यु होने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है और उनकी मृत्यु हो जाती थी। नतीजतन व्हाइट बिल्ड बल्चर और किंग बल्चर प्रजाति के गिद्धों की संख्या तेजी से घटने लगी। गिद्धों की घटती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया। सरकार ने डाइक्लोफेनिक नामक दवा की बिक्री और इस्तेमाल दोनों पर प्रतिबंध लगाया। तराई क्षेत्र को डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित किए जाने के बाद गिद्धों को जीवनदान मिला।
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भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में व्हाइट बिल्ड बल्चर का झुंड दिखाई दिया है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुभ संकेत है। इनके संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार प्रयत्नशील है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में अरसे बाद गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखा है। तेजी से लुप्त हो रहे गिद्धों के इतने बड़े झुंड को देखकर पर्यावरण प्रेमियों में खुशी है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, दिखाई पड़ा यह झुंड व्हाइट बिल्ड बल्चर प्रजाति का है, जो तराई में दुर्लभ माने जाते हैं।
भीरा रेंज की पल्हनापुर रेंज में बृहस्पतिवार की सुबह गश्त कर रहे रेंजर राकेश बाबू वर्मा, फॉरेस्टर मोहम्मद उमर को जंगल से सटे इलाके में गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई पड़ा। दुर्लभ प्रजाति के करीब 50 गिद्धों के झुंड को देखकर वन कर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले इन गिद्धों के लापता होने से पर्यावरण को शुद्ध रखने का संकट पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में भारत सरकार समेत पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं ने गिद्धों के संरक्षण के लिए एक अभियान के रूप में काम किया। परिणाम स्वरूप गिद्धों की आबादी में इजाफा शुरू हुआ। पिछले दो वर्षों से यदा-कदा गिद्धों के झुंड दिखाई पड़ने लगे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि गिद्ध संरक्षण के लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
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डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित होने के बाद गिद्धों को मिला जीवनदान
पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनिक दवा तराई के गिद्धों के लिए जानलेवा साबित हुई है। दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर बताते हैं कि संबंधित दवा के इस्तेमाल के बाद पशुओं की मृत्यु होने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है और उनकी मृत्यु हो जाती थी। नतीजतन व्हाइट बिल्ड बल्चर और किंग बल्चर प्रजाति के गिद्धों की संख्या तेजी से घटने लगी। गिद्धों की घटती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया। सरकार ने डाइक्लोफेनिक नामक दवा की बिक्री और इस्तेमाल दोनों पर प्रतिबंध लगाया। तराई क्षेत्र को डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित किए जाने के बाद गिद्धों को जीवनदान मिला।
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भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में व्हाइट बिल्ड बल्चर का झुंड दिखाई दिया है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुभ संकेत है। इनके संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार प्रयत्नशील है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व