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Lakhimpur Kheri News: मादा गैंडा दीपिका ने शिशु को दिया जन्म, दुधवा में खुशियां
Wed, 01 Oct 2025 01:10 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 01 Oct 2025 01:10 AM IST
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दुधवा के खुले जंगल में शिशु के साथ विचरण करती मादा गैंडा दीपिका। स्रोत : वन विभाग
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडा पुनर्वासन योजना का अगला चरण भी कामयाबी की कहानी गढ़ने लगा है। जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ी गई मादा गैंडा दीपिका ने हाल में एक बच्चे को जन्म देकर दुधवा में खुशियां बिखेर दी हैं।
दुधवा में करीब 41 साल पहले अपने पुरखों की धरती पर गैंडों को फिर से आबाद करने के लिए 1984 में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना का अगला चरण तब शुरू हुआ, जब नवंबर-दिसंबर 2024 में दो चरणों में चार गैंडों को सौर उर्जा चालित बाड़ से निकालकर दुधवा जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा गया था। इनमें एक नर और तीन मादा गैंडा थीं। दीपिका नामक मादा गैंडा ने हाल ही में एक शिशु को जन्म दिया है।
हालांकि, अभी उसके लिंग की पहचान नहीं हो सकी है। शिशु को जन्म देने के बाद अब दुधवा के खुले जंगल में गैंडो की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। दुधवा में जब वर्ष 1984 में यह गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुई थी, तब दक्षिण सोनारीपुर रेंज में 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बनाए गए सौर उर्जा चालित बाड़ में इन्हें रखा गया था। जहां इनकी लगातार बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न हुई अत: प्रजनन की समस्या से बचने के लिए 2018 में बेलरायां रेंज के छंगानाला में 13 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का चयन कर गैंडों को एक नया घर दिया गया। इसके बाद असम के काजीरंगा नेशनल पार्क की तरह दुधवा में गैंडों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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प्रयोग के तौर पर नवंबर-दिसंबर 2024 में चार गैंडों को जंगल में छोड़ा गया। अब एक बच्चे के जन्म होने के बाद इनकी संख्या पांच हो गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन गैंडा शिशु के जन्म से काफी खुश है। साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। इसके तहत मादा गैंडा और शिशु की लगातार निगरानी की जा रही है। वन कर्मियों की टीमें खास दूरी बनाकर नजर रख रही हैं।
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दुधवा में करीब 41 साल पहले अपने पुरखों की धरती पर गैंडों को फिर से आबाद करने के लिए 1984 में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना का अगला चरण तब शुरू हुआ, जब नवंबर-दिसंबर 2024 में दो चरणों में चार गैंडों को सौर उर्जा चालित बाड़ से निकालकर दुधवा जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा गया था। इनमें एक नर और तीन मादा गैंडा थीं। दीपिका नामक मादा गैंडा ने हाल ही में एक शिशु को जन्म दिया है।
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हालांकि, अभी उसके लिंग की पहचान नहीं हो सकी है। शिशु को जन्म देने के बाद अब दुधवा के खुले जंगल में गैंडो की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। दुधवा में जब वर्ष 1984 में यह गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुई थी, तब दक्षिण सोनारीपुर रेंज में 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बनाए गए सौर उर्जा चालित बाड़ में इन्हें रखा गया था। जहां इनकी लगातार बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न हुई अत: प्रजनन की समस्या से बचने के लिए 2018 में बेलरायां रेंज के छंगानाला में 13 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का चयन कर गैंडों को एक नया घर दिया गया। इसके बाद असम के काजीरंगा नेशनल पार्क की तरह दुधवा में गैंडों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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प्रयोग के तौर पर नवंबर-दिसंबर 2024 में चार गैंडों को जंगल में छोड़ा गया। अब एक बच्चे के जन्म होने के बाद इनकी संख्या पांच हो गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन गैंडा शिशु के जन्म से काफी खुश है। साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। इसके तहत मादा गैंडा और शिशु की लगातार निगरानी की जा रही है। वन कर्मियों की टीमें खास दूरी बनाकर नजर रख रही हैं।