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Lakhimpur Kheri News: गन्ना समिति अरनीखाना की बिक्री पर किसानों का विरोध, सौंपा ज्ञापन
Mon, 18 Aug 2025 11:39 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 18 Aug 2025 11:39 PM IST
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अतिरिक्त एसडीएम मनीषा कुमारी को ज्ञापन सौंपते किसान। स्रोत : किसान
लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के किसान नेताओं और किसानों ने सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड अरनीखाना की भूमि बिक्री के विरोध में जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतिलिपि गन्ना आयुक्त, प्रमुख सचिव गन्ना विकास और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवकुमार वर्मा के नेतृत्व में किसानों ने समिति की भूमि के पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद उसकी बिक्री होने पर गहरा रोष जताया। किसानों का कहना है कि समिति की अंश पूंजी और सदस्यता शुल्क के रूप में जमा करोड़ों रुपये उनके खून-पसीने की कमाई हैं, जो अब संकट में हैं।
ज्ञापन में बताया गया कि अरनीखाना गन्ना समिति किसानों के गन्ना उत्पादन, बिक्री और भुगतान की व्यवस्था करती है। समिति की भूमि लीज पर थी, जिसका पट्टा समाप्त होने के बावजूद जिला गन्ना अधिकारी और समिति सचिव ने कोई कदम नहीं उठाया। इससे समिति की भूमि बिक्री हो गई, जिससे आगामी गन्ना पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना आपूर्ति और भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
किसानों ने पूछा कि उनकी जमा पूंजी किसके खाते में जाएगी और समिति के पत्राचार का रखरखाव कैसे होगा। किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी के निलंबन और गन्ना आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि समिति का गलत संचालन किसानों के हितों पर कुठाराघात है। प्रतिनिधिमंडल में जयपाल सिंह यादव, संतोष सिंह भदौरिया, अनिल कुमार वर्मा सहित कई किसान शामिल रहे।
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बकाया भुगतान से अग्रिम धनराशि की हो कटौती
किसान संगठन ने डीएम को एक और ज्ञापन और सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड खंभारखेड़ा चीनी मिल की जमीन नीलामी में किसानों को प्राथमिकता दी जाए। ज्ञापन में कहा गया कि गोला गोकर्णनाथ, खंभारखेड़ा और पलिया की बजाज चीनी मिलों पर किसानों का करीब 606.05 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों ने गन्ना आयुक्त द्वारा नौ मई 2025 को जारी वसूली प्रमाण पत्र के बावजूद भुगतान में देरी और नीलामी प्रक्रिया में अस्पष्टता पर रोष जताया।
किसानों ने आरोप लगाया कि खंभारखेड़ा चीनी मिल की होने वाली नीलामी की विज्ञप्ति में गाटा संख्या, रकबा, अग्रिम धनराशि और स्थान का उल्लेख नहीं है, जो चीनी मिल और अधिकारियों की मिलीभगत दर्शाता है। संगठन ने मांग की कि नीलामी में किसानों को प्रथम स्थान मिले और बकाया भुगतान से अग्रिम धनराशि कटौती की जाए। नीलामी से प्राप्त धन किसानों के खाते में तत्काल हस्तांतरित हो, अन्यथा सितंबर में विशाल सत्याग्रह शुरू होगा।
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ज्ञापन में बताया गया कि अरनीखाना गन्ना समिति किसानों के गन्ना उत्पादन, बिक्री और भुगतान की व्यवस्था करती है। समिति की भूमि लीज पर थी, जिसका पट्टा समाप्त होने के बावजूद जिला गन्ना अधिकारी और समिति सचिव ने कोई कदम नहीं उठाया। इससे समिति की भूमि बिक्री हो गई, जिससे आगामी गन्ना पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना आपूर्ति और भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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किसानों ने पूछा कि उनकी जमा पूंजी किसके खाते में जाएगी और समिति के पत्राचार का रखरखाव कैसे होगा। किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी के निलंबन और गन्ना आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि समिति का गलत संचालन किसानों के हितों पर कुठाराघात है। प्रतिनिधिमंडल में जयपाल सिंह यादव, संतोष सिंह भदौरिया, अनिल कुमार वर्मा सहित कई किसान शामिल रहे।
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बकाया भुगतान से अग्रिम धनराशि की हो कटौती
किसान संगठन ने डीएम को एक और ज्ञापन और सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड खंभारखेड़ा चीनी मिल की जमीन नीलामी में किसानों को प्राथमिकता दी जाए। ज्ञापन में कहा गया कि गोला गोकर्णनाथ, खंभारखेड़ा और पलिया की बजाज चीनी मिलों पर किसानों का करीब 606.05 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों ने गन्ना आयुक्त द्वारा नौ मई 2025 को जारी वसूली प्रमाण पत्र के बावजूद भुगतान में देरी और नीलामी प्रक्रिया में अस्पष्टता पर रोष जताया।
किसानों ने आरोप लगाया कि खंभारखेड़ा चीनी मिल की होने वाली नीलामी की विज्ञप्ति में गाटा संख्या, रकबा, अग्रिम धनराशि और स्थान का उल्लेख नहीं है, जो चीनी मिल और अधिकारियों की मिलीभगत दर्शाता है। संगठन ने मांग की कि नीलामी में किसानों को प्रथम स्थान मिले और बकाया भुगतान से अग्रिम धनराशि कटौती की जाए। नीलामी से प्राप्त धन किसानों के खाते में तत्काल हस्तांतरित हो, अन्यथा सितंबर में विशाल सत्याग्रह शुरू होगा।