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किसानों के भुगतान से बेपरवाह मिल
गोला गोकर्णनाथ
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:28 PM IST
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नगर में बजाज ग्रुप की शुगर मिल ने इस पेराई सत्र में ब्याज बचाने के उद्देश्य से गन्ना किसानों के भुगतान के लिए बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट नहीं बनवाई है। मिल एक अरब 95 करोड़ रुपये की चीनी तैयार कर बिक्री कर रही है, किंतु हाईकोर्ट और गन्ना आपूर्ति अधिनियम के आदेशानुसार किसानों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बजाज शुगर मिल ने 23 नवंबर से गन्ना पेराई सत्र शुरू किया था। एक लाख 40 हजार कुंटल दैनिक पेराई क्षमता वाली यह मिल 55 दिनों में 75लाख 60 हजार क्विंटल गन्ना पेराई कर छह लाख 50 हजार क्विंटल चीनी बना चुकी है। मिल को हाईकोर्ट के आदेश चीनी बिक्री राशि पर गन्ना किसान का पहला हक तथा उप्र गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियम) अधिनियम 1963 की धारा-17(5) एवं तत्संबंधी नियमावली 1954 के नियम 48 के प्राविधान के अंतर्गत चीनी बंधक या बिक्री से प्राप्त धनराशि की 85 प्रतिशत धनराशि गन्ना किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, किंतु चीनी मिल ने बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट नहीं बनवाई, न ही चीनी की बिक्री राशि से ही भुगतान किया जा रहा है।
शुगर केन कंट्रोल आर्डर 1966 में गन्ना मूल्य भुगतान 14 दिन से अधिक देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान किया गया है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट भी अपनी मुहर लगा चुका है। किंतु ब्याज तो दूर यहां किसानों को गन्ने के मूल भुगतान के भी लाले पड़े हैं।
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बजाज ग्रुप पर अधिकारी मेहरबान
गोला गोकर्णनाथ। जिले में बजाज ग्रुप की चीनी मिलें ही ऐसी हैं, जिन्होंने बीते गन्ना पेराई सत्र का अब पूूर्ण भुगतान किया है, जबकि अन्य चीनी मिलें पुराना भुगतान कर इस सत्र का भी काफी भुगतान कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का उल्लंघन करने पर भी अधिकारियों ने बजाज ग्रुप की चीनी मिलों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इस पेराई सत्र में यहां की बजाज चीनी मिल में किसानों के गन्ना भुगतान के लिए कैश क्रेडिट लिमिट नहीं बनवाई, न बिक्री चीनी से ही खरीदे गन्ने का भुगतान ही किया। बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया था कि किसानों का चीनी पर पहला हक है, इसलिए संबंधित जिलों के जिलाधिकारी मिलों में उत्पादित चीनी को अपनी संरक्षा में रखकर बिक्री की 85प्रतिशत राशि से किसान का भुगतान कराएं, किंतु इस नगर में बजाज मिल में 25 नवंबर से चीनी उत्पादन शुरू हो गया था। किंतु अधिकारियों ने चीनी संरक्षित करने पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। एक माह 10 दिन बाद पांच जनवरी को डीएम किंजल सिंह ने आदेश जारी कर एसडीएम विनोद कुमार गुप्त और सहकारी गन्ना विकास समिति के विशेष सचिव भूपेश कुमार राय को बजाज मिल का समस्त चीनी स्टाक मिल अध्यासी के साथ संयुक्त प्रभार में रखकर बिक्री के लिए चीनी निकासी करने को लिखा, किंतु आदेश के पूर्व ही चीनी मिल ने इस पेराई सत्र में निर्मित काफी चीनी की बिक्री कर ली थी।
इस बाबत बजाज मिल गोला के यूनिट हेड ओमपाल सिंह का कहना है कि भुगतान के लिए प्रबंधतंत्र का प्रयास जारी है। जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।
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बजाज शुगर मिल ने 23 नवंबर से गन्ना पेराई सत्र शुरू किया था। एक लाख 40 हजार कुंटल दैनिक पेराई क्षमता वाली यह मिल 55 दिनों में 75लाख 60 हजार क्विंटल गन्ना पेराई कर छह लाख 50 हजार क्विंटल चीनी बना चुकी है। मिल को हाईकोर्ट के आदेश चीनी बिक्री राशि पर गन्ना किसान का पहला हक तथा उप्र गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियम) अधिनियम 1963 की धारा-17(5) एवं तत्संबंधी नियमावली 1954 के नियम 48 के प्राविधान के अंतर्गत चीनी बंधक या बिक्री से प्राप्त धनराशि की 85 प्रतिशत धनराशि गन्ना किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, किंतु चीनी मिल ने बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट नहीं बनवाई, न ही चीनी की बिक्री राशि से ही भुगतान किया जा रहा है।
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शुगर केन कंट्रोल आर्डर 1966 में गन्ना मूल्य भुगतान 14 दिन से अधिक देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान किया गया है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट भी अपनी मुहर लगा चुका है। किंतु ब्याज तो दूर यहां किसानों को गन्ने के मूल भुगतान के भी लाले पड़े हैं।
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बजाज ग्रुप पर अधिकारी मेहरबान
गोला गोकर्णनाथ। जिले में बजाज ग्रुप की चीनी मिलें ही ऐसी हैं, जिन्होंने बीते गन्ना पेराई सत्र का अब पूूर्ण भुगतान किया है, जबकि अन्य चीनी मिलें पुराना भुगतान कर इस सत्र का भी काफी भुगतान कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का उल्लंघन करने पर भी अधिकारियों ने बजाज ग्रुप की चीनी मिलों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इस पेराई सत्र में यहां की बजाज चीनी मिल में किसानों के गन्ना भुगतान के लिए कैश क्रेडिट लिमिट नहीं बनवाई, न बिक्री चीनी से ही खरीदे गन्ने का भुगतान ही किया। बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया था कि किसानों का चीनी पर पहला हक है, इसलिए संबंधित जिलों के जिलाधिकारी मिलों में उत्पादित चीनी को अपनी संरक्षा में रखकर बिक्री की 85प्रतिशत राशि से किसान का भुगतान कराएं, किंतु इस नगर में बजाज मिल में 25 नवंबर से चीनी उत्पादन शुरू हो गया था। किंतु अधिकारियों ने चीनी संरक्षित करने पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। एक माह 10 दिन बाद पांच जनवरी को डीएम किंजल सिंह ने आदेश जारी कर एसडीएम विनोद कुमार गुप्त और सहकारी गन्ना विकास समिति के विशेष सचिव भूपेश कुमार राय को बजाज मिल का समस्त चीनी स्टाक मिल अध्यासी के साथ संयुक्त प्रभार में रखकर बिक्री के लिए चीनी निकासी करने को लिखा, किंतु आदेश के पूर्व ही चीनी मिल ने इस पेराई सत्र में निर्मित काफी चीनी की बिक्री कर ली थी।
इस बाबत बजाज मिल गोला के यूनिट हेड ओमपाल सिंह का कहना है कि भुगतान के लिए प्रबंधतंत्र का प्रयास जारी है। जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।