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Lakhimpur Kheri News: हाथियों का झुंड लौटने की सूचना से घबराए किसान
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खुटार। नेपाल के पांच हाथियों का झुंड फिर से खुटार रेंज में पहुंचने की सूचना है। इसकी पुष्टि दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी ललित कुमार वर्मा ने की है।
उनका कहना है कि एक टस्कर के साथ 4-5 जंगली हाथी किशनपुर सेंक्चुरी होते हुए बफरजोन मैलानी रेंज के जंगल से खुटार गोला हाईवे पार कर खुटार रेंज के जंगल में चले गए हैं। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उधर, खुटार के रेंजर मनोज श्रीवास्तव ने हाथियों के खुटार रेंज के जंगल में आने की जानकारी होने से इन्कार किया है।
इससे साफ है कि रेंज के वनकर्मी हाथियों के मूवमेंट से अनजान हैं। ऐसे में हाथियों के जंगल किनारे आकर फसलों को नुकसान पहुंचाने और रखवाली कर रहे लोगों पर हमला करने से बड़ी घटना हो सकती है।
दस से 15 नेपाली हाथियों का झुंड हर वर्ष सितंबर, अक्तूबर में मैलानी, खुटार रेंज होते हुए महेशपुर रेंज के जंगलों में आता है, जो जनवरी की शुरुआत में लौट जाता है। इस बार भी हाथी आए थे, जो लौट गए थे।
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सर्दियों में हाथियों के वापस आने को लेकर जंगल के आसपास के किसानों में तमाम तरह की चर्चाएं हैं। किसानों के अनुसार, खाने के लिए गन्ना आदि की भरपूर उपलब्धता के चलते नेपाली हाथी खुटार से लेकर महेशपुर रेंज को ठिकाना बनाने लगे हैं। जंगल के बीच बह रही कठिना नदी के कारण पानी की समस्या भी नहीं है। घने जंगलों में हाथियों को सुरक्षा का भी एहसास होता है।
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उनका कहना है कि एक टस्कर के साथ 4-5 जंगली हाथी किशनपुर सेंक्चुरी होते हुए बफरजोन मैलानी रेंज के जंगल से खुटार गोला हाईवे पार कर खुटार रेंज के जंगल में चले गए हैं। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उधर, खुटार के रेंजर मनोज श्रीवास्तव ने हाथियों के खुटार रेंज के जंगल में आने की जानकारी होने से इन्कार किया है।
इससे साफ है कि रेंज के वनकर्मी हाथियों के मूवमेंट से अनजान हैं। ऐसे में हाथियों के जंगल किनारे आकर फसलों को नुकसान पहुंचाने और रखवाली कर रहे लोगों पर हमला करने से बड़ी घटना हो सकती है।
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दस से 15 नेपाली हाथियों का झुंड हर वर्ष सितंबर, अक्तूबर में मैलानी, खुटार रेंज होते हुए महेशपुर रेंज के जंगलों में आता है, जो जनवरी की शुरुआत में लौट जाता है। इस बार भी हाथी आए थे, जो लौट गए थे।
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सर्दियों में हाथियों के वापस आने को लेकर जंगल के आसपास के किसानों में तमाम तरह की चर्चाएं हैं। किसानों के अनुसार, खाने के लिए गन्ना आदि की भरपूर उपलब्धता के चलते नेपाली हाथी खुटार से लेकर महेशपुर रेंज को ठिकाना बनाने लगे हैं। जंगल के बीच बह रही कठिना नदी के कारण पानी की समस्या भी नहीं है। घने जंगलों में हाथियों को सुरक्षा का भी एहसास होता है।