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प्रशासन की खानापूरी से नाउम्मीद हैं किसान

Thu, 16 Apr 2015 08:11 PM IST
निघासन।
निघासन। Updated Thu, 16 Apr 2015 08:11 PM IST
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Farmers are pessimistic of administration FILLIN
बारिश और ओले गिरने से बर्बाद हुई गेहूं और मसूर की फसल से बर्बाद किसानों को मुआवजे की उम्मीद बंधी थी, लेकिन प्रशासन ने सर्वे के नाम पर खानापूरी की तो इधर से भी उन्हें नाउम्मीद होना पड़ा। आलम यह है कि खेत में लेखपाल गए नहीं और सर्वे हो गया। बड़े किसानों की गेहूं और मसूर की फसल बरसात और ओलों ने तबाह कर डाली। राजस्व विभाग ने जो सर्वे किया है उसमें बड़े किसानों को काफी दूर रखा गया है। बैलहा के किसान नरेंद्र सिंह भदौरिया और विनोद जायसवाल ने बताया कि महंगाई के चलते करीब तीन एकड़ मसूर की फसल बोई थी। उसको काटने वाला नहीं मिल रहा है। एक तरफ किसान कर्ज के बोझ को सहन नहीं कर पा रहा है, दूसरी तरफ बर्बाद हुई फसल को लेकर काफी परेशान हैं।
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क्या कहते हैं किसान
नहीं मिल रहे मजदूर
साढ़े बारह बीघा मसूर की फसल बोई थी। शुरू में फसल अच्छी होने के कारण काफी उम्मीदें जगी थीं, लेकिन आंधी-पानी और ओलों ने सारी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया।
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-नरेंद्र्र सिंह भदौरिया बैलहा
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सर्वे को कोई नहीं आया
भले ही ओलों से हुई क्षति का सर्वे करने के लिए लेखपाल गांवों में घूम रहा हो, लेकिन हमारे गांव में बर्बाद हुई फसल की सुधि लेने के लिए कोई नहीं आया है। पूरी फसल आंधी और पानी में पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।
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-गुरदीप सिंह, सहतेपुरवा
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हाथ लगा सिर्फ  भूसा
सात बीघा गेहूं की फसल बोई थी। गेहूं के साथ में भूसा मिलने का भी लालच था, लेकिन बिन मौसम बरसात के कारण गेहूं नहीं मिले, लेकिन मवेशियों के लिए भूसे का इंतजाम जरूर हो गया है।
-विनोद जायसवाल, लुधौरी
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कैसे मिले निवाला
गेहूं की चार बीघा फसल बर्बाद हो गई। बाढ़ से कुछ गन्ना बचा था, जिसको गुलरिया चीनी मिल में बेचा था। उसका भी भुगतान नहीं हो पाया है, जिससे परिवार के लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
-ब्रजलाल, रानीगंज

हरहाल में किसानों को दिलाएंगे मुआवजा  
जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने के बाद भी यहां पर सर्वे के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए डीएम और मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।

-लेखराम भास्कर, प्रधान-लुधौरी


तमाम किसानों के सर्वे में फसल मुआवजे से वंचित होने की शिकायतें मिली थीं, जिस पर दोबारा सर्वे कराया गया है। अब अधिकतर किसान मुआवजे के हकदार हो गए हैं, फिर भी यदि कोई किसान इससे वंचित है तो उसकी शिकायत का निस्तारण कराया जाएगा।
-हरिकेश चौरसिया, एडीएम
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