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लखीमपुर खीरी: दूसरे दिन भी किसानों के लगाए ताले नहीं खुले, अनशन जारी
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पलिया चीनी मिल के सामने क्रमिक अनशन पर बैठे किसान।
मिल के मुख्य गेट, जीएम कार्यालय व गोदाम, मिल जाने वाले गेट पर किसानों ने सोमवार को लगाए थे ताले
संवाद न्यूज एजेंसी
पलियाकलां। सोमवार को पलिया चीनी मिल के गेट पर किसानों की तालाबंदी दूसरे दिन भी जारी रही। किसानों ने देर रात जीएम कार्यालय पर धरना खत्म कर वापस मिल के सामने लगाए गए टेंट में क्रमिक अनशन जारी रखा है।
करीब एक माह के अधिक समय से बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों द्वारा क्रमिक अनशन किया जा रहा है। सोमवार को किसानों ने मिल के मुख्य गेट के साथ ही जीएम कार्यालय व गोदाम जाने वाले रास्तों पर तालाबंदी कर दी थी। जीएम कार्यालय का ताला टूटने के बाद किसानों ने वहीं पर धरना शुरू कर दिया था। देर रात दस बजे किसानों ने वहां से धरना हटाकर मिल गेट के बाहर क्रमिक अनशनस्थल पर अनशन पर बैठ गए हैं।
किसानों का कहना है कि फरवरी के तीसरे सप्ताह तक संपूर्ण बकाया की बात हुई थी, लेकिन अब बात 15 मार्च की हो रही है। वहीं मिल द्वारा सवा तीन करोड़ रुपये का भुगतान खातों में मंगलवार को डालने की बात कही गई है, लेकिन इस तरह से कम-कम भुगतान होने से बकाया भुगतान मिलने में देरी होगी। इसी के लिए तालाबंदी जारी है ताकि मिल प्रशासन किसानों की बात बेहतर ढंग से समझ सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलियाकलां। सोमवार को पलिया चीनी मिल के गेट पर किसानों की तालाबंदी दूसरे दिन भी जारी रही। किसानों ने देर रात जीएम कार्यालय पर धरना खत्म कर वापस मिल के सामने लगाए गए टेंट में क्रमिक अनशन जारी रखा है।
करीब एक माह के अधिक समय से बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों द्वारा क्रमिक अनशन किया जा रहा है। सोमवार को किसानों ने मिल के मुख्य गेट के साथ ही जीएम कार्यालय व गोदाम जाने वाले रास्तों पर तालाबंदी कर दी थी। जीएम कार्यालय का ताला टूटने के बाद किसानों ने वहीं पर धरना शुरू कर दिया था। देर रात दस बजे किसानों ने वहां से धरना हटाकर मिल गेट के बाहर क्रमिक अनशनस्थल पर अनशन पर बैठ गए हैं।
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किसानों का कहना है कि फरवरी के तीसरे सप्ताह तक संपूर्ण बकाया की बात हुई थी, लेकिन अब बात 15 मार्च की हो रही है। वहीं मिल द्वारा सवा तीन करोड़ रुपये का भुगतान खातों में मंगलवार को डालने की बात कही गई है, लेकिन इस तरह से कम-कम भुगतान होने से बकाया भुगतान मिलने में देरी होगी। इसी के लिए तालाबंदी जारी है ताकि मिल प्रशासन किसानों की बात बेहतर ढंग से समझ सके।
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