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Lakhimpur Kheri News: रंग ला रही कोशिश... बाघों की संख्या में हुआ इजाफा

Mon, 29 Jul 2024 02:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:58 AM IST
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Efforts are bearing fruit...number of tigers has increased
दुधवा में चहल-कदमी करता बाघ।
बांकेगंज। देशभर में चल रहे बाघों के संरक्षण और संवर्द्धन की कोशिशें रंग ला रही हैं। खीरी जिले में भारत नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में 2022 तक बाघों की संख्या बढ़कर 153 से अधिक हो गई है। इस तरह बाघों की आबादी के लिहाज से दुधवा टाइगर रिजर्व देश के 51 टाइगर रिजर्व की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
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पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाघ संरक्षण दिवस पर भारत सरकार ने टाइगर एस्टीमेशन 2022 की रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में दुधवा टाइगर रिजर्व में 153 बाघ पाए गए। यह संख्या वर्ष 2018 के टाइगर एस्टीमेशन की अपेक्षा 46 अधिक है। यूपी में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों का मनपसंद स्थान माना जाता है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां बाघों के अनुकूल हैं, जिससे उनकी संख्या में इजाफा दर्ज किया जाता रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की वृद्धि दर करीब 45 फीसदी रही है। वर्ष 2018 में यहां 107 बाघ मिले थे। जबकि यहां 135 बाघ होने की संभावना जताई गई थी। टाइगर रिजर्व के 20 से 25 बाघ हमेशा जंगल छोड़ कर गन्ने के खेतों में बसेरा बनाए रहते हैं। टाइगर एस्टीमेशन के दौरान केवल जंगल में कैमरे लगाए जाते हैं, खेतों में नहीं। इससे खेतों में रहने वाले बाघों की तस्वीरें कैमरे में ट्रैप नहीं हो पाती। यह बाघ एस्टीमेशन में छूट जाते हैं। यदि इन्हें एस्टीमेशन में शामिल किया जा सकता तो यह संख्या करीब 175 तक पहुंच सकती थी।
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बाघों की आबादी में इस तरह हो रही बढ़ोतरी
वर्ष - बाघ
1977 ................ 50
1980 ................ 57
2000.................. 77
2006 - 70
2010................ 80
2014 - 68
2018 - 107
2022 - 153


मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं बढ़ने से कम हो रही सहअस्तित्व की भावना
इंसानों और बाघों के बीच सदियों से चली आ रही सहअस्तित्व की भावना कम होती जा रही है। जंगल के किनारे बसे लोगों की जंगल पर बढ़ती निर्भरता के कारण वे जंगल में घुसपैठ कर रहे हैं, जबकि बाघों की बढ़ती आबादी के चलते उन्हें अपनी टेरिटरी बनाने के लिए जंगल से बाहर गन्ने के खेतों तक पैठ बनानी पड़ रही है। इंसानों और बाघों के बीच लगातार टकराव बढ़ रहा है।

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बाघों के सरंक्षण के साथ जंगल में पूरी पारिस्थितिकी का संरक्षण होता है, इसलिए बाघों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है। दुधवा में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी संतोषजनक है। बाघ और इंसानों के सहजीवन में कुछ कमी आई है, लेकिन दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन इस दिशा में अपना काम कर रहा है।
- ललित कुमार वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
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