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Lakhimpur Kheri News: केंचुआ खाद व मछली पालन से बदली आर्थिक स्थिति

Sun, 03 Aug 2025 11:27 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 03 Aug 2025 11:27 PM IST
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Economic condition changed due to earthworm compost and fish farming
डीडी कृ​षि गिरीश चंद्र किसान राम नरेश से मछली पालन से संबं​धित जानकारी लेते हुए। स्रोत : विभाग - फोटो : संवाद
लखीमपुर खीरी। वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) और मछली पालन से सदर ब्लाॅक के पिपरा करमचंद्र गांव निवासी किसान राम नरेश की आर्थिक स्थिति बदल गई है। प्रगतिशील किसान बनकर अब वे दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।
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राम नरेश के पास तीन एकड़ खेती है। रामनरेश पहले खेती पर ही निर्भर थे। ऐसे में उनका गुजारा बमुश्किल से हो पाता था। अब उनके पास एक एकड़ में दो तालाब हैं। एक स्वयं से व दूसरा खेत तालाब योजना से बनवाया। दोनों तालाब में मछली पालन कर वे हर वर्ष दो लाख रुपये से ज्यादा का लाभ उठाते हैं। तालाब किनारे वे केले के खेती करते हैं, जो 20 प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं। अमरूद, आंवला, नींबू आदि के पौधे भी उन्होंने लगा रखे हैं।
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उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने बताया कि किसान रामनरेश के पास 14 पशु हैं, जो रोजाना करीब 40 लीटर दूध देते हैं। कंपोस्ट के लिए गोबर भी होता है। इससे वर्मी कंपोस्ट (केंचुओं से तैयार खाद) बनाते हैं।
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वर्मी कम्पोस्ट 10 से 12 रुपये प्रति किलो की दर से नर्सरियों को वे देते हैं। इतना ही नहीं, यह खाद जिले के बाहर बहराइच सहित अन्य जनपदों में भी वे आपूर्ति करते हैं। कम्पोस्ट पिट पर छाया के लिए लौकी और तरोई की बेल फैला रखी है। इससे केंचुओं के लिए छाया के साथ ही बिक्री के लिए लौकी और तरोई भी हो जाती है।

-----पाली हाउस पर मिलता है 50 प्रतिशत अनुदान-----
उपकृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने जिले के किसानों से अपील की है कि परंपरागत खेती के साथ ही राम नरेश की तरह पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, सब्जी उत्पादन आदि व्यावसायिक चीजों को जोड़ सकते हैं। सरकार कई उत्पादनों पर अनुदान भी देती है। संरक्षित खेती के लिए पाली हाउस पर उद्यान विभाग से 50 प्रतिशत तक अनुदान है। इससे किसानों की आय दोगुनी हो सकती है।
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