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Lakhimpur Kheri News: जंगली हाथियों को भा रही दुधवा की आबोहवा, बढ़ रहा कुनबा

Sat, 12 Aug 2023 12:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 12 Aug 2023 12:02 AM IST
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Dudhwa's climate is pleasing to wild elephants, increasing family
दुधवा टाइगर रिजर्व में विचरण करते हाथी
लखीमपुर खीरी। हाथियों को दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल की आबोहवा बेहद रास आ रही है। यही कारण है कि यहां बाघों के साथ-साथ हाथियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व में मौजूदा समय में हाथियों की संख्या करीब 180 तक पहुंच गई है। वर्ष 2020 में हाथियों की संख्या 149 थी। प्रदेश में इस समय करीब 295 हाथी हैं। इनमें सबसे ज्यादा दुधवा टाइगर रिजर्व में हैं। वर्ष 2020 में प्रदेश में हाथियों की संख्या 252 थी।
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करीब 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में साल सागौन के हरे भरे जंगल अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। यहां 253 बाघों और एक सींग वाले 46 गैंडों का कुनबा है, तो 180 जंगली हाथियों की चिंघाड़ भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। दुधवा में विचरण करने वाले हाथियों की संख्या जहां सात साल पहले 70 थी, वह 2020 में बढ़कर 149 हो गई है।
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तीन साल के अंतराल में इनकी संख्या बढ़कर तक 180 तक पहुंच गई है। मंद प्रजनन क्षमता वाले हाथियों की बढ़ती आबादी काफी उत्साहजनक है। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ही नहीं वन्यजीव प्रेमी भी काफी खुश हैं।
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नेपाली हाथियों ने भी दुधवा टाइगर रिजर्व को बनाया आशियाना

दुधवा टाइगर रिजर्व का जंगल पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के हाथियों को भी खूब भाता है। बड़ी संख्या में नेपाली हाथियों ने दुधवा जंगल को ही अपना आशियाना बना लिया। दुधवा जंगल में आसानी से भोजन-पानी की उपलब्धता और विश्राम के लिए घने जंगल नेपाली हाथियों को इतने पसंद आते हैं कि वह अपने घर वापसी के बजाय दुधवा के जंगल को ही अपना बसेरा बना लेते हैं। वैसे हर साल नेपाल से हाथियों के झुंड यहां आकर प्रवास करते हैं और कुछ महीनों बाद वापस लौट जाते हैं।

तराई एलिफैंट रिजर्व से जंगली हाथियों के संरक्षण को मिलेंगे नए आयाम
तराई क्षेत्र में जंगली हाथियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के मद्देनजर सरकार ने अक्तूबर 2022 में दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी और गोला रेंज जंगल को मिलाकर तराई एलिफैंट रिजर्व घोषित किया है। यह देश का 33वां और प्रदेश का दूसरा एलिफैंट रिजर्व है। इसका कुल क्षेत्रफल 3049.39 वर्ग किलोमीटर है। यह एलिफैंट रिजर्व चार जिलों लखीमपुर खीरी, बहराइच, पीलीभीत और शाहजहांपुर तक फैला है। तराई एलिफैंट रिजर्व बन जाने से तराई में जंगली हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनका कुनबा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एलिफैंट कॉरिडोर का पता लगाकर बाधा रहित किए जाएंगे रास्ते
तराई एलिफैंट रिजर्व बनने के बाद अब दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में डीटीआर प्रशासन हाथियों के आने जाने के नए कॉरिडोर खोजेगा। यही नहीं, जहां नेपाल के हाथियों के झुंड निकलते हैं और महीनों तक रहते हैं, उन कॉरिडोर का पता लगाकर उसे बाधामुक्त किया जाएगा। मसलन वहां पास के खेतों में अगर बिजली की लाइन होगी तो उसे हटाया जाएगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि हाथी उन्हीं रास्तों से आवागमन करते हैं, जिन रास्तों से उनके पूर्वज आवागमन करते रहे हैं। हाथी अपनी जेनेटिक मेमोरी के चलते ऐसा कर पाते हैं।


दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ-साथ हाथियों की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। अब तराई एलिफैंट रिजर्व बन जाने से तराई में हाथियों का संरक्षण और संवर्धन का कार्य और बेहतर ढंग से हो सकेगा। जंगली हाथियों के कॉरिडोर चिह्नित कर उन्हें निर्बाध बनाया जाएगा।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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