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Lakhimpur Kheri News: दुधवा की दुलारी भवानी अब गोरखपुर में पलेगी-बढ़ेगी
Thu, 02 Jul 2026 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:20 PM IST
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दुधवा में नन्हीं हथिनी भवानी को दुलारती दुर्गा। स्रोत : सैलानी
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की दुलारी नन्ही हथिनी भवानी को अब गोरखपुर स्थित शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान के लार्ज मैमल रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा।
दुधवा प्रशासन के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अनुराधा वेमुरी ने दो वर्ष आठ माह की भवानी के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। दुधवा प्रशासन का कहना है कि बेहतर देखभाल, निगरानी और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जबकि वन्यजीव प्रेमी इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
दुधवा प्रशासन ने 29 जून को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को स्थानांतरण का प्रस्ताव भेजा था। अगले ही दिन 30 जून को इसे मंजूरी मिल गई। इसके बाद भवानी को गोरखपुर भेजने की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
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वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि दुधवा में विनायक, सुहेली और मसकली जैसे हाथी जन्म से पलकर बड़े हुए और आज राजकीय हाथी के रूप में पेट्रोलिंग तथा वन्यजीव प्रबंधन का दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि दुधवा प्रशासन एक नन्ही हथिनी की देखभाल के लिए उसे बाहर क्यों भेज रहा है।
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मुख्यमंत्री ने गौरी का नाम रखा था भवानी
बिजनौर वन प्रभाग के जंगल में मां से बिछड़ी 21 दिन की नन्ही हथिनी को 13 अक्तूबर 2023 को रेस्क्यू कर दुधवा लाया गया था। यहां उसका नाम गौरी रखा गया। 26 अप्रैल 2025 को दुधवा दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसका नाम बदलकर भवानी कर दिया।
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दुर्गा ने दिया मां जैसा स्नेह
दुधवा लाए जाने के समय भवानी महज 21 दिन की थी और मां से बिछड़ने के कारण बेहद कमजोर व तनावग्रस्त थी। शुरुआत में अन्य मादा हाथियों ने उसे नहीं अपनाया, लेकिन दुधवा में रह रही नौ वर्ष की मादा हथिनी दुर्गा ने उसे अपना लिया। दुर्गा ने भवानी की देखभाल कर उसे मां जैसा स्नेह और सुरक्षा दी।
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दुधवा पार्क के सोनारीपुर बेस कैंप में महावतों और चारा काटने वाले कर्मचारियों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष स्टाफ कम है। इसके कारण भवानी की समुचित देखभाल में कठिनाई हो रही है। उसकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए उसे रेस्क्यू सेंटर भेजने का निर्णय लिया गया है।
-डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा प्रशासन के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अनुराधा वेमुरी ने दो वर्ष आठ माह की भवानी के स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। दुधवा प्रशासन का कहना है कि बेहतर देखभाल, निगरानी और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जबकि वन्यजीव प्रेमी इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
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दुधवा प्रशासन ने 29 जून को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को स्थानांतरण का प्रस्ताव भेजा था। अगले ही दिन 30 जून को इसे मंजूरी मिल गई। इसके बाद भवानी को गोरखपुर भेजने की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
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वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि दुधवा में विनायक, सुहेली और मसकली जैसे हाथी जन्म से पलकर बड़े हुए और आज राजकीय हाथी के रूप में पेट्रोलिंग तथा वन्यजीव प्रबंधन का दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि दुधवा प्रशासन एक नन्ही हथिनी की देखभाल के लिए उसे बाहर क्यों भेज रहा है।
मुख्यमंत्री ने गौरी का नाम रखा था भवानी
बिजनौर वन प्रभाग के जंगल में मां से बिछड़ी 21 दिन की नन्ही हथिनी को 13 अक्तूबर 2023 को रेस्क्यू कर दुधवा लाया गया था। यहां उसका नाम गौरी रखा गया। 26 अप्रैल 2025 को दुधवा दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसका नाम बदलकर भवानी कर दिया।
दुर्गा ने दिया मां जैसा स्नेह
दुधवा लाए जाने के समय भवानी महज 21 दिन की थी और मां से बिछड़ने के कारण बेहद कमजोर व तनावग्रस्त थी। शुरुआत में अन्य मादा हाथियों ने उसे नहीं अपनाया, लेकिन दुधवा में रह रही नौ वर्ष की मादा हथिनी दुर्गा ने उसे अपना लिया। दुर्गा ने भवानी की देखभाल कर उसे मां जैसा स्नेह और सुरक्षा दी।
दुधवा पार्क के सोनारीपुर बेस कैंप में महावतों और चारा काटने वाले कर्मचारियों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष स्टाफ कम है। इसके कारण भवानी की समुचित देखभाल में कठिनाई हो रही है। उसकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए उसे रेस्क्यू सेंटर भेजने का निर्णय लिया गया है।
-डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व