{"_id":"69502325ca92dc815d04fb69","slug":"dudhwa-is-ready-for-new-year-celebrations-huts-are-fully-booked-till-31st-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1008-164602-2025-12-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: नए साल के जश्न के लिए दुधवा तैयार, 31 तक हटों की बुकिंग फुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: नए साल के जश्न के लिए दुधवा तैयार, 31 तक हटों की बुकिंग फुल
Sat, 27 Dec 2025 11:49 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 27 Dec 2025 11:49 PM IST
विज्ञापन
दुधवा मुख्यालय में इंट्री के लिए लगी भीड़।संवाद
- फोटो : खैरगढ़ में मां काली मंदिर से घंटा, श्रृंगार का सामान और दानपात्र से नकदी चोरी की घटना के बाद का नजारा। संवाद
पलियाकलां। दुनिया के शोर-शराबे और रोशनी को पीछे छोड़ शांति, ताजी हवा और वन्यजीवों के सानिध्य में नए साल की शुरुआत करने वाले अब दुधवा की ओर रुख कर चुके हैं। इसी के चलते दुधवा में अब 31 दिसंबर तक सभी हट बुक हो चुके हैं।
बता दें कि तराई की सुंदरता और अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र दुधवा अपनी घनी हरियाली, ऊंचे साल के पेड़ों और दलदली घास के मैदानों के लिए मशहूर है। नए साल के समय दिसंबर जनवरी में यहां का मौसम बेहद सुहावना होता है। सुबह की धुंध और पेड़ों के बीच से छनकर आती सूरज की किरणें एक जादुई वातावरण बनाती है।
दुधवा टाइगर रिजर्व केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है अगर किस्मत अच्छी रही, तो नए साल की पहली सुबह जंगल के राजा के दर्शन हो सकते। यहां गैंडा पुनर्वास क्षेत्र है, दुधवा में बारहसिंगा को देखना एक अनूठा अनुभव है और सर्दियों में यहां साइबेरिया और अन्य ठंडे प्रदेशों से आए प्रवासी पक्षी चार चांद लगा देते हैं।
विज्ञापन
इस समय दुधवा में 31 दिसंबर तक रहने की व्यवस्था फुल हो चुकी है। माना जा रहा है कि यह स्थिति जनवरी पहले हफ्ते तक हो जाएगी। जंगल भ्रमण करने वाली गाड़ियां भी लगभग इसी तारीख तक फ्री नहीं होंगी। इधर वीआईपी की आमद से उसके रिजर्व रेस्ट हाउस और हट भी फुल चल रहें हैं। आगे भी हालत ऐसे ही रहने की उम्मीद दिख रही है। दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर ने बताया कि दुधवा की वीआईपी हट भी फुल चल रही हैं।
दुधवा में वन निगम के पास हैं कितने हट
दुधवा में वन निगम के पास 10 हट, दो डाॅरमेट्री, जिसमें महिला में 10 बेड और पुरुष में 15 बेड शामिल हैं।
-बनकटी के भी रेस्ट हाउस के चारकमरे यह जनवरी के पहले हफ्ते तक फुल।
-सोनारीपुर और सठियाना के गेस्ट हाउसों पर लटका ताला
एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत है ऐसा
दुधवा टाइगर रिजर्व के शौकीनों और पर्यटकों के लिए बुरी खबर है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की नई गाइडलाइन के बाद पार्क प्रशासन ने सोनारीपुर और सठियाना स्थित रेस्ट हाउसों को बंद कर दिया है। इसके चलते अब पर्यटक इन लोकेशनों पर रात नहीं बिता सकेंगे। सोनारीपुर रेंज स्थित रेस्ट हाउस के चार कक्षों को बंद कर दिया गया है। पर्यटकों को खूब पसंद आने वाले सठियाना रेंज में भी चार रेस्ट हाउस कमरे और चार लॉग हट पर ताले लटक गए हैं। सठियाना अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की सघनता के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां की रौनक गायब है। ऐसा इसलिए है कि एनटीसीए ने बाघों के प्राकृतिक आवास और उनके ''''''''कोर एरिया'''''''' में मानवीय दखल को कम करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं और इसके तहत कोर एरिया में पड़ने इन विश्रामगृह में पर्यटकों के ठहरने पर रोक लगा दी गई है।
गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में नहीं होगी हाथी की सवारी
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर गैंडा पुनर्वास परिक्षेत्र में हाथी की सवारी को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला क्षेत्र में जंगली हाथियों के मूवमेंट के चलते लिया गया है। गैंडा परिक्षेत्र के आसपास जंगली हाथियों के झुंड को देखा जा रहा है। जंगली हाथी कभी-कभी आक्रामक हो जाते हैं, जिससे पालतू हाथियों और उन पर सवार पर्यटकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, पर्यटकों को निराश होने की जरूरत नहीं है। पार्क प्रशासन ने केवल गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में ही यह अस्थाई पाबंदी लगाई गई बाकी पार्क के अन्य चिन्हित स्थानों पर हाथी की सवारी का संचालन हो रहा है।
विज्ञापन
बता दें कि तराई की सुंदरता और अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र दुधवा अपनी घनी हरियाली, ऊंचे साल के पेड़ों और दलदली घास के मैदानों के लिए मशहूर है। नए साल के समय दिसंबर जनवरी में यहां का मौसम बेहद सुहावना होता है। सुबह की धुंध और पेड़ों के बीच से छनकर आती सूरज की किरणें एक जादुई वातावरण बनाती है।
विज्ञापन
दुधवा टाइगर रिजर्व केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है अगर किस्मत अच्छी रही, तो नए साल की पहली सुबह जंगल के राजा के दर्शन हो सकते। यहां गैंडा पुनर्वास क्षेत्र है, दुधवा में बारहसिंगा को देखना एक अनूठा अनुभव है और सर्दियों में यहां साइबेरिया और अन्य ठंडे प्रदेशों से आए प्रवासी पक्षी चार चांद लगा देते हैं।
विज्ञापन
इस समय दुधवा में 31 दिसंबर तक रहने की व्यवस्था फुल हो चुकी है। माना जा रहा है कि यह स्थिति जनवरी पहले हफ्ते तक हो जाएगी। जंगल भ्रमण करने वाली गाड़ियां भी लगभग इसी तारीख तक फ्री नहीं होंगी। इधर वीआईपी की आमद से उसके रिजर्व रेस्ट हाउस और हट भी फुल चल रहें हैं। आगे भी हालत ऐसे ही रहने की उम्मीद दिख रही है। दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश आर ने बताया कि दुधवा की वीआईपी हट भी फुल चल रही हैं।
दुधवा में वन निगम के पास हैं कितने हट
दुधवा में वन निगम के पास 10 हट, दो डाॅरमेट्री, जिसमें महिला में 10 बेड और पुरुष में 15 बेड शामिल हैं।
-बनकटी के भी रेस्ट हाउस के चारकमरे यह जनवरी के पहले हफ्ते तक फुल।
-सोनारीपुर और सठियाना के गेस्ट हाउसों पर लटका ताला
एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत है ऐसा
दुधवा टाइगर रिजर्व के शौकीनों और पर्यटकों के लिए बुरी खबर है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की नई गाइडलाइन के बाद पार्क प्रशासन ने सोनारीपुर और सठियाना स्थित रेस्ट हाउसों को बंद कर दिया है। इसके चलते अब पर्यटक इन लोकेशनों पर रात नहीं बिता सकेंगे। सोनारीपुर रेंज स्थित रेस्ट हाउस के चार कक्षों को बंद कर दिया गया है। पर्यटकों को खूब पसंद आने वाले सठियाना रेंज में भी चार रेस्ट हाउस कमरे और चार लॉग हट पर ताले लटक गए हैं। सठियाना अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की सघनता के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां की रौनक गायब है। ऐसा इसलिए है कि एनटीसीए ने बाघों के प्राकृतिक आवास और उनके ''''''''कोर एरिया'''''''' में मानवीय दखल को कम करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं और इसके तहत कोर एरिया में पड़ने इन विश्रामगृह में पर्यटकों के ठहरने पर रोक लगा दी गई है।
गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में नहीं होगी हाथी की सवारी
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर गैंडा पुनर्वास परिक्षेत्र में हाथी की सवारी को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला क्षेत्र में जंगली हाथियों के मूवमेंट के चलते लिया गया है। गैंडा परिक्षेत्र के आसपास जंगली हाथियों के झुंड को देखा जा रहा है। जंगली हाथी कभी-कभी आक्रामक हो जाते हैं, जिससे पालतू हाथियों और उन पर सवार पर्यटकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, पर्यटकों को निराश होने की जरूरत नहीं है। पार्क प्रशासन ने केवल गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में ही यह अस्थाई पाबंदी लगाई गई बाकी पार्क के अन्य चिन्हित स्थानों पर हाथी की सवारी का संचालन हो रहा है।