फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   dudhawa jungal

बाघ के हमलों में अब तक हो चुकी छह गैंडों की मौत

Sun, 15 Mar 2020 06:22 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 06:22 PM IST
विज्ञापन
dudhawa jungal
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों की मौत आपसी संघर्ष व अन्य वन्यजीवों के हमले में लगातार हो रही है। अभी दिसंबर जाते-जाते ही दक्षिण सोनारीपुर रेंज के ककरहा एरिया में दो नर गैंडों के आपसी संघर्ष में एक गैंडे की मौत हो गई थी। इससे पहले भी कई वन्यजीव असमय काल के गाल में समा चुके हैं।
विज्ञापन

बता दें कि बीता साल 2019 दुधवा नेशनल पार्क के लिए काफी निराशाजनक रहा था। यहां कई वन्यजीव असमय काल के गाल में समा गए थे। इसमें 31 दिसंबर 2019 को दुधवा टाइगर रिजर्व में संचालित गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज वन में दो गैंडो के बीच हुए आपसी संघर्ष में एक नर गैंडे की मौत हो गई थी। सन 2019 की नौ जनवरी को पलिया-भीरा रोड पर एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक बारहसिंगा असमय काल के गाल में समा गया था। इसी तरह 22 फरवरी 2019 को एक बार फिर दो गैंडों में आपसी संघर्ष के चलते एक नर गैंडे की मौत हो गई थी। भीम नामक इस गैंडे की मौत से पार्क में गैंडों की संख्या भी कम हुई थी। इसके बाद सात अप्रैल 2019 को दुधवा के बफर जोन की सुमेरनगर गांव के पास एक नर तेंदुए का शव बरामद हुआ था। चार साल के इस नर तेंदुए की भी आपसी संघर्ष में जान चली गई थी। इसके बाद 27 जुलाई 2019 को दुधवा टाइगर रिजर्व की सठियाना रेंज से लगभग सौ मीटर की दूरी पर पलिया रेंज के बफर जोन में निषादनगर घोला में एक गन्ने के खेत में नर हाथी की करंट लगने से मौत हो गई थी। लगातार हो रही वन्यजीवों की मौतों से पार्क प्रशासन भी काफी है। इन वन्यजीवों की मौतों में कहीं आपसी संघर्ष तो कहीं दूसरे वन्यजीव के हमले में मौतों का मामला सामने आ रहा है।
विज्ञापन

अब तक छह गैंडों की मौत
दुधवा नेशनल पार्क में साल 1984 में शुरू हुई गैंडा पुनर्वास योजना को कई बार कई आपदाएं झेलनी पड़ीं। कभी आपसी संघर्ष में गैंडों की मौत हुई तो कभी बाघों ने उनके शावकों का शिकार किया। जिसके चलते गैंडों की आबादी में उस तेजी से बढ़ोतरी नहीं हुई, जितनी तेजी से होनी चाहिए थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज में सलूकापुर बीट की 27 वर्ग किलोमीटर भूमि में बसाई गई गैंडा पुनर्वास योजना का मकसद लुप्त हो रही इस प्रजाति को बचाना था। इसी मकसद से यहां एक सींग वाले दुर्लभ गैंडे असम और नेपाल से लाए गए थे। परियोजना के शुरुआती दौर में ही यहां बदले माहौल के चलते एक गैंडे की जान चली गई। लग रहा था कि परियोजना पूरी तरह फ़्लॉप हो जाएगी, लेकिन अंदाजे गलत साबित हुए और गैंडों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। इस बीच आए दिन यहां कोई न कोई हादसा हो जाता है और इस हादसे में कभी वयस्क तो कभी गैंडा शावकों की मौत हो जाती है।
फेज वन में अब रह गए 34 गैंडे
गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज वन में अब गैंडों की संख्या 34 रह गई है। यह परियोजना सन 1984 में शुरू की गई थी। जिसमें चार गैंडे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम व एक नेपाल से लाकर छोड़ा गया था। धीरे-धीरे वंशावली में वृद्धि के बाद इनकी संख्या 35 पहुंच गई थी। लेकिन अब इस गैंडा शिशु की मौत के बाद संख्या 34 रह गई है।

दुधवा नेशनल पार्क बाघों का स्वाभाविक घर है। यहां बाघों के अलावा गैंडा, हाथी आदि वन्यजीव एक साथ रहते हैं। इनमें अक्सर संघर्ष होता है, और कभी-कभी किसी जीव की मौत होती है। यह एक स्वाभाविक और नैसर्गिक प्रक्रिया है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed