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Lakhimpur Kheri News: ड्रायर मशीन सही कराई नहीं, क्रय केंद्र से लाैटा रहे नमी भरा धान
Wed, 29 Oct 2025 11:49 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 29 Oct 2025 11:49 PM IST
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मंडी में लगी ड्रायर मशीन-फाइल फोटो
- फोटो : टूंडला एटारोड पर कार को घसीट कर ले गया डंपर संवाद
लखीमपुर खीरी। राजापुर स्थित मंडी में ड्रायर मशीन होने के बावजूद नमी वाला धान लेकर आ रहे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। करीब 10 लाख रुपये की लागत वाली यह मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में आढ़तियों को सस्ते दामों पर किसान फसल बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। खरीद शुरू हुए एक माह बीतने वाला है, लेकिन जिम्मेदार अब भी कह रहे हैं कि मशीन ठीक करने के लिए गोरखपुर से इंजीनियर बुलाए गए हैं।
सरकारी क्रय केंद्रों पर अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद अब गति पकड़ रही है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक 116 केंद्रों पर खरीद शुरू हुई है, जबकि आठ केंद्रों पर खरीद शून्य है। मौजूदा समय में धान में सबसे ज्यादा नमी करीब साढ़े 19 प्रतिशत तक निकल रही है। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर किसानों की फसल नहीं खरीदी जा रही। मजबूरन किसान अपनी फसल आढ़तियों के हाथ बेच रहे हैं।
धान की नमी को सुखाने के लिए किसानों की मांग के बाद मंडी की ओर से एक ड्रायर मशीन लगाई गई। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह मशीन खराब होने के कारण कहीं पड़ी धूल फांक रही है। उधर, मंडी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ड्रायर मशीन चलाने में काफी खर्च आता है, जिसकी लागत किसान वहन नहीं कर पाते हैं।
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किसान कहते हैं कि अगर मशीन होती तो सुखाने में एक से दो सौ रुपये खर्च होते, लेकिन मशीन न होने से आढ़तों पर चार से पांच सौ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
इस तरह से काम करती है मशीन
धान की ताजा फसल होने की वजह से उसमें नमी रहती है। धान नम होने की वजह से कुटाई के वक्त चावल टूट जाता था। इसको देखते हुए ड्रायर मशीन में इसे सुखाने का कार्य किया जाता है। यह मशीन गर्म हवा फेंककर धान को इतना सुखा देती थी कि धान मानक के अनुरूप हो जाता है। किसानों को मशीन में खपत होने वाले डीजल का खर्च देना होता था।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद अब गति पकड़ रही है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक 116 केंद्रों पर खरीद शुरू हुई है, जबकि आठ केंद्रों पर खरीद शून्य है। मौजूदा समय में धान में सबसे ज्यादा नमी करीब साढ़े 19 प्रतिशत तक निकल रही है। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर किसानों की फसल नहीं खरीदी जा रही। मजबूरन किसान अपनी फसल आढ़तियों के हाथ बेच रहे हैं।
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धान की नमी को सुखाने के लिए किसानों की मांग के बाद मंडी की ओर से एक ड्रायर मशीन लगाई गई। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह मशीन खराब होने के कारण कहीं पड़ी धूल फांक रही है। उधर, मंडी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ड्रायर मशीन चलाने में काफी खर्च आता है, जिसकी लागत किसान वहन नहीं कर पाते हैं।
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किसान कहते हैं कि अगर मशीन होती तो सुखाने में एक से दो सौ रुपये खर्च होते, लेकिन मशीन न होने से आढ़तों पर चार से पांच सौ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
इस तरह से काम करती है मशीन
धान की ताजा फसल होने की वजह से उसमें नमी रहती है। धान नम होने की वजह से कुटाई के वक्त चावल टूट जाता था। इसको देखते हुए ड्रायर मशीन में इसे सुखाने का कार्य किया जाता है। यह मशीन गर्म हवा फेंककर धान को इतना सुखा देती थी कि धान मानक के अनुरूप हो जाता है। किसानों को मशीन में खपत होने वाले डीजल का खर्च देना होता था।