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ये मत समझो आजादी डोली में सजकर आई थी...
गोला गोकर्णनाथ।
Updated Sun, 29 Mar 2015 11:54 PM IST
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ऐतिहासिक चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर नगर के कवियों ने हास्य, श्रृंगार, वीर रस समेत तमाम विधाओं में काव्य पाठ किया।
छोटी काशी के ऐतिहासिक चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर हुए स्थानीय कवियों के कवि सम्मेलन का उद्घाटन कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. जटाशंकर सिंह, मुख्य अतिथि आनंद प्रकाश शुक्ल ने दीप जलाकर और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। अतिथियों ने नगर के चैती मेले की प्रशंसा कर इसे नगर की शान बताया है।
कवि सम्मेलन की शुरुआत इसहाक अली की वाणी वंदना से हुई-
वंदना मैं तेरी करूं यह मेरी औकात नहीं,
मैं तुझसे दूर रहूं मेरे बस की बात नहीं।
डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि-
उसी गोला के भोला का लिये आशीष आया हूं ।
जवानी की रगो में दौड़ता फौलाद लाया हूं।।
नंदीलाल निराश ने कुछ यूं कहा-
सोन चिरैया रोजु उड़ावौ राजा हौ।
जतनै चहौ पलान बनावौ राजा हौ।
रमेश पांडे शिखर ने कहा-
वही वट वृक्ष दे पाया घना साया मुसाफिर को,
दहकती धूप में जलना जिसे स्वीकार होता है।
संत कुमार वाजपेयी ने कहा -
रिश्वत की आंधी में बड़े बड़े नेता,
गिरे धड़ाम धड़ाम हमारे आंगन में।
सुधीर अवस्थी ने आज की स्थितियों पर कहा-
मां बस रखना इतना ध्यान,
नहीं बनाना मुझे देवता बना रहूं इंसान।
कन्हैयासिंह रास ने वियोग रस बिखेरा-
मोहब्बत प्यास ऐसी है बुझाने पर भड़कती है।
जिगर रांझा का जलता है, हीर की रूह तड़फती है।
आज कवि कनक तिवारी ने कहा -
ये मत समझो आजादी डोली में सजकर आयी थी,
ये आजादी तो तलवारों की धार पर चलकर आयी थी।
कवियत्री रजनी पांडे ने गजल पढ़ी-
अपने अश्क पी लिये, हमने होठ सी लिये।
संचालन करते हुए अमर फतेहपुरी ने आधुनिकता पर कहा-
दानी कर्णकठोर हो गए श्रोणित जनता का पीते हैं।
भगवान विष्णु आराम तलब ले ले टानिक जीते हैं।
अवधेश पांडे ने आपसी सौहार्द पर कहा-
घर घर में महक प्यार की आये खुदा करे,
नफरत कोई जहां से मिटाये खुदा करे।
इनके साथ ही मुरलीधर त्रिपाठी, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, बेनीराम अंजान, रामकुमार गुप्ता, मुनेंद्रप्रताप वर्मा, जसकरनलाल शर्मा, मधुकर सैदाई, ब्रजेश तिवारी, श्याममोहन मिश्र, एसआई शंखधर भट्ट, आलोक तिवारी, ऋतिक गुप्ता, प्रीती राठौर आदि ने भी काव्यपाठ किया। पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने कवियों को शाल भेंटकर सम्मानित कर अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
देर रात तक हुये कवि सम्मेलन में पालिका परिषद के अधिकारी कर्मचारी, प्रबुद्ध श्रोता डटे रहे।
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छोटी काशी के ऐतिहासिक चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर हुए स्थानीय कवियों के कवि सम्मेलन का उद्घाटन कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. जटाशंकर सिंह, मुख्य अतिथि आनंद प्रकाश शुक्ल ने दीप जलाकर और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। अतिथियों ने नगर के चैती मेले की प्रशंसा कर इसे नगर की शान बताया है।
कवि सम्मेलन की शुरुआत इसहाक अली की वाणी वंदना से हुई-
वंदना मैं तेरी करूं यह मेरी औकात नहीं,
मैं तुझसे दूर रहूं मेरे बस की बात नहीं।
डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि-
उसी गोला के भोला का लिये आशीष आया हूं ।
जवानी की रगो में दौड़ता फौलाद लाया हूं।।
नंदीलाल निराश ने कुछ यूं कहा-
सोन चिरैया रोजु उड़ावौ राजा हौ।
जतनै चहौ पलान बनावौ राजा हौ।
रमेश पांडे शिखर ने कहा-
वही वट वृक्ष दे पाया घना साया मुसाफिर को,
दहकती धूप में जलना जिसे स्वीकार होता है।
संत कुमार वाजपेयी ने कहा -
रिश्वत की आंधी में बड़े बड़े नेता,
गिरे धड़ाम धड़ाम हमारे आंगन में।
सुधीर अवस्थी ने आज की स्थितियों पर कहा-
मां बस रखना इतना ध्यान,
नहीं बनाना मुझे देवता बना रहूं इंसान।
कन्हैयासिंह रास ने वियोग रस बिखेरा-
मोहब्बत प्यास ऐसी है बुझाने पर भड़कती है।
जिगर रांझा का जलता है, हीर की रूह तड़फती है।
आज कवि कनक तिवारी ने कहा -
ये मत समझो आजादी डोली में सजकर आयी थी,
ये आजादी तो तलवारों की धार पर चलकर आयी थी।
कवियत्री रजनी पांडे ने गजल पढ़ी-
अपने अश्क पी लिये, हमने होठ सी लिये।
संचालन करते हुए अमर फतेहपुरी ने आधुनिकता पर कहा-
दानी कर्णकठोर हो गए श्रोणित जनता का पीते हैं।
भगवान विष्णु आराम तलब ले ले टानिक जीते हैं।
अवधेश पांडे ने आपसी सौहार्द पर कहा-
घर घर में महक प्यार की आये खुदा करे,
नफरत कोई जहां से मिटाये खुदा करे।
इनके साथ ही मुरलीधर त्रिपाठी, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, बेनीराम अंजान, रामकुमार गुप्ता, मुनेंद्रप्रताप वर्मा, जसकरनलाल शर्मा, मधुकर सैदाई, ब्रजेश तिवारी, श्याममोहन मिश्र, एसआई शंखधर भट्ट, आलोक तिवारी, ऋतिक गुप्ता, प्रीती राठौर आदि ने भी काव्यपाठ किया। पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने कवियों को शाल भेंटकर सम्मानित कर अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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देर रात तक हुये कवि सम्मेलन में पालिका परिषद के अधिकारी कर्मचारी, प्रबुद्ध श्रोता डटे रहे।