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‘मृतकों’ को बांट दिया मुफ्त बीज
बांकेगंज
Updated Fri, 17 Apr 2015 07:21 PM IST
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मृदा सुधार योजना में किसानों को मुफ्त वितरण के लिए आए ढैंचा बीज के वितरण में घोटाला सामने आया है। इसका खुलासा एक किसान को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से हुआ है। विभाग ने सूचना के अधिकार के तहत लाभार्थी किसानों की जो सूची उपलब्ध कराई है, उसमें कई मृतकों के नाम शामिल हैं। कई किसानों के नाम एक ही सूची में कई जगह दर्ज हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि मुफ्त ढैंचा बीज किसानों को न बांटकर बाजार में बेच दिया गया।
मृदा सुधार योजना के तहत वर्ष 2011-12 में बांकेगंज ब्लाक के किसानों को वितरित करने के लिए 198 क्विंटल ढैंचा बीज आया था। प्रत्येक किसान को 18 किग्रा बीज मुफ्त वितरित किया जाना था, लेकिन यह बीज किसानों को वितरित करने के बजाए जिम्मेदार लोगों ने बाजार में बेच दिया। निकटवर्ती गांव दौलतपुर के किसान अनिल यादव ने कृषि विभाग से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत दिसंबर 2014 में उप निदेशक कृषि प्रसार से सूचना मांगी कि वर्ष 2011-12 में बांकेगंज ब्लाक के किसानों को मुफ्त वितरण के लिए आया ढैंचा बीज किन-किन किसानों को वितरित किया गया है। जो जानकारी दी गई उसमें एक ही लाभार्थी का नाम सूची में कई जगह दर्ज होने और मृतकों के नाम भी शामिल होने के बात सामने आई।
इन लोगों के भी चढ़ा दिए गए नाम
सूची में कस्बा निवासी देवीप्रसाद मिश्र का नाम है, जबकि उनका निधन वर्ष 2005 में हो गया था। उनका नाम सूची में तीन जगह दर्ज है। इसी तरह कुछ अन्य मृतकों के नाम भी दर्ज हैं। यही नहीं कस्बे के ही सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पंकज कुमार का नाम भी सूची में शामिल है। इस बाबत पंकज कुमार का कहना है उन्होंने राजकीय बीज भंडार से कभी कोई बीज न मुफ्त में लिया और न ही खरीदा। सूची की जो छाया प्रति उपलब्ध कराई गई है उसमें एक ही लाभार्थी के अलग-अलग जगहों पर नाम दर्ज हैं, पर उनके सामने हस्ताक्षर अलग हैं, कहीं हिन्दी में तो कहीं अंग्रेजी में हस्ताक्षर हैं तो कहीं अंगूठा लगाया गया है। इससे वितरण में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो रही है।
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हरी खाद बनाने के लिए होती है बुवाई
खेतों में ढैंचा बीज हरी खाद बनाने के लिए बोया जाता है, इससे मिट्टी की सेहत सही रहती है तो उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
198 क्विंटल बांटा गया था बीज
वर्ष 2011-12 में राजकीय कृषि बीज भंडार बांकेगंज से 198 क्विंटल ढैंचा बीज 1089 लोगों को 18-18 किग्रा मुफ्त बांटा गया। इसमें वास्तविक रूप से कितने किसानों को मुफ्त बीज मिला यह तो सत्यापन करने के बाद ही पता चलेगा लेकिन प्रथम दृष्टया 75 से 80 फीसदी लोगों को बीज फर्जी रूप से बांट दिया गया। अनिल यादव ने इस मामले को उठाते हुए पूरे मामले की जांच के लिए सूबे के कृषि उत्पादन आयुक्त और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा है।
उप निदेशक कृषि, लखीमपुर-खीरी डॉ. शिव कुमार केसरी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। बांकेगंज ब्लाक में वर्ष 2011- 12 में हुए मुफ्त ढैंचा बीज वितरण मामले की जांच कराई जा रही है। अनियमितता मिलने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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मृदा सुधार योजना के तहत वर्ष 2011-12 में बांकेगंज ब्लाक के किसानों को वितरित करने के लिए 198 क्विंटल ढैंचा बीज आया था। प्रत्येक किसान को 18 किग्रा बीज मुफ्त वितरित किया जाना था, लेकिन यह बीज किसानों को वितरित करने के बजाए जिम्मेदार लोगों ने बाजार में बेच दिया। निकटवर्ती गांव दौलतपुर के किसान अनिल यादव ने कृषि विभाग से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत दिसंबर 2014 में उप निदेशक कृषि प्रसार से सूचना मांगी कि वर्ष 2011-12 में बांकेगंज ब्लाक के किसानों को मुफ्त वितरण के लिए आया ढैंचा बीज किन-किन किसानों को वितरित किया गया है। जो जानकारी दी गई उसमें एक ही लाभार्थी का नाम सूची में कई जगह दर्ज होने और मृतकों के नाम भी शामिल होने के बात सामने आई।
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इन लोगों के भी चढ़ा दिए गए नाम
सूची में कस्बा निवासी देवीप्रसाद मिश्र का नाम है, जबकि उनका निधन वर्ष 2005 में हो गया था। उनका नाम सूची में तीन जगह दर्ज है। इसी तरह कुछ अन्य मृतकों के नाम भी दर्ज हैं। यही नहीं कस्बे के ही सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पंकज कुमार का नाम भी सूची में शामिल है। इस बाबत पंकज कुमार का कहना है उन्होंने राजकीय बीज भंडार से कभी कोई बीज न मुफ्त में लिया और न ही खरीदा। सूची की जो छाया प्रति उपलब्ध कराई गई है उसमें एक ही लाभार्थी के अलग-अलग जगहों पर नाम दर्ज हैं, पर उनके सामने हस्ताक्षर अलग हैं, कहीं हिन्दी में तो कहीं अंग्रेजी में हस्ताक्षर हैं तो कहीं अंगूठा लगाया गया है। इससे वितरण में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो रही है।
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खेतों में ढैंचा बीज हरी खाद बनाने के लिए बोया जाता है, इससे मिट्टी की सेहत सही रहती है तो उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
198 क्विंटल बांटा गया था बीज
वर्ष 2011-12 में राजकीय कृषि बीज भंडार बांकेगंज से 198 क्विंटल ढैंचा बीज 1089 लोगों को 18-18 किग्रा मुफ्त बांटा गया। इसमें वास्तविक रूप से कितने किसानों को मुफ्त बीज मिला यह तो सत्यापन करने के बाद ही पता चलेगा लेकिन प्रथम दृष्टया 75 से 80 फीसदी लोगों को बीज फर्जी रूप से बांट दिया गया। अनिल यादव ने इस मामले को उठाते हुए पूरे मामले की जांच के लिए सूबे के कृषि उत्पादन आयुक्त और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा है।
उप निदेशक कृषि, लखीमपुर-खीरी डॉ. शिव कुमार केसरी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। बांकेगंज ब्लाक में वर्ष 2011- 12 में हुए मुफ्त ढैंचा बीज वितरण मामले की जांच कराई जा रही है। अनियमितता मिलने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।