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एक साथ उठी तीन अर्थियां, सैकड़ों आंखें हो गईं नम
अमर उजाला ब्यूरो खजुरिया।
Updated Fri, 13 Jan 2017 11:28 PM IST
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सड़क हादसा
गमगीन माहौल में शारदा नदी तट पर किया गया अंतिम संस्कार
आजमगढ़ के पास हुए सड़क हादसे में मारे गए कमलापुर गांव के एक ही परिवार के तीन लोगों के शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब तीन अर्थियां उठीं तो वहा मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें भर आईं। गमगीन माहौल में हजारा शारदा नदी के किनारे शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
तीन दिन पहले कमलापुर निवासी पुलकेश अपने निजी चार पहिया वाहन से पत्नी ज्योति चारो और बेटी चाहत को लेकर घर से मिहिपुरवा (बहराइच) गए थे। यहां पर उन्होंने अपने बहनोई महेश सोनी, बहन रजनी सोनी, भांजे मयंक, भांजी दर्पण और शिवान्या को साथ लेकर बनारस अपने रिश्तेदारी में जा रहे थे। इस दौरान बुधवार रात 11 बजे आजमगढ़ से पहले कस्बा कप्तान गंज के पास घना कोहरे के कारण उनकी कार ट्रक से टकरा गयी। हादसे में कमलापुरी निवासी पुलकेश, उनकी पत्नी ज्योति, पुत्री चाहत के अलावा बहनोई महेश, भांजे मयंक, भांजी दर्पण की मौके पर मौत हो गई थी। शुक्रवार की सुबह शवों के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया और ग्रामीणों की भीड़ उनके घर पर जमा हो गई। एक साथ तीन शव को देखकर सभी की आंखें नम हो गई। गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार हजारा की शारदा नदी के किनारे किया गया।
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आजमगढ़ के पास हुए सड़क हादसे में मारे गए कमलापुर गांव के एक ही परिवार के तीन लोगों के शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब तीन अर्थियां उठीं तो वहा मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें भर आईं। गमगीन माहौल में हजारा शारदा नदी के किनारे शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
तीन दिन पहले कमलापुर निवासी पुलकेश अपने निजी चार पहिया वाहन से पत्नी ज्योति चारो और बेटी चाहत को लेकर घर से मिहिपुरवा (बहराइच) गए थे। यहां पर उन्होंने अपने बहनोई महेश सोनी, बहन रजनी सोनी, भांजे मयंक, भांजी दर्पण और शिवान्या को साथ लेकर बनारस अपने रिश्तेदारी में जा रहे थे। इस दौरान बुधवार रात 11 बजे आजमगढ़ से पहले कस्बा कप्तान गंज के पास घना कोहरे के कारण उनकी कार ट्रक से टकरा गयी। हादसे में कमलापुरी निवासी पुलकेश, उनकी पत्नी ज्योति, पुत्री चाहत के अलावा बहनोई महेश, भांजे मयंक, भांजी दर्पण की मौके पर मौत हो गई थी। शुक्रवार की सुबह शवों के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया और ग्रामीणों की भीड़ उनके घर पर जमा हो गई। एक साथ तीन शव को देखकर सभी की आंखें नम हो गई। गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार हजारा की शारदा नदी के किनारे किया गया।
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