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वाराणसी हादसे में दो महिलाओं की मौत से शोक
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:00 AM IST
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- बिजुआ और ईसानगर के गांवों में मातम
वाराणसी में जयगुरुदेव की शोभायात्रा में हुई भगदड़ से 25 अनुयायियों की मौत हुई थी, जिसमें खीरी जिले की दो महिलाएं शामिल हैं। भीरा थाना के दौलतापुर गांव की एक महिला अनुयायी, जबकि ईसानगर क्षेत्र के गांव महरिया निवासी 58 वर्षीय सुशीला देवी की वाराणसी हादसे में मौत हुई है।
बिजुआ/गुलरिया/ईसानगर। भीरा थाना एवं पुलिस चौकी बिजुआ क्षेत्र के दौलतापुर गांव की रामपति (60) पत्नी लालजी की भी वाराणसी के राजघाट पुल पर हुए हादसे में मौत हो गई। रामपति गांव के श्रीपाल, बाबू जी, रामगुलाम, जीत राम के साथ एक बस से 13 अक्टूबर को वाराणसी रवाना हुई थी। इन पांचों के अलावा इलाके के पकरिया, सल्लिहा, रैनागंज, तिखड़ा, पड़रिया गांवों से करीब 55 लोग भी कार्यक्रम में गए थे। हादसे के समय सभी अनुयायी अलग-अलग हो गए, सिर्फ रामपति एवं एक पकरिया गांव का साथी एक साथ थे। राजपति के पुत्र रामसरन के पास करीब दो बजे फोन आया कि उनकी मां बेहोश हो गई हैं, उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फोन करने वाला शख्स अंजान था। शाम चार बजे उसी नंबर से पता चला कि रामपति की मौत हो गई है। शाम को ही पुत्र रामसरन समेत कुछ लोग वाराणसी के लिए रवाना हो गए। रात को ही प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम कराया, जिससे सुबह 10 बजे शव को परिवार वालों को सौंप दिया गया। उधर ईसानगर के गांव महरिया की सुशीला देवी अपने जत्थे के साथ गुरुवार को यहां से रवाना हुईं थी। दोनों के परिवारीजनों ने अलग-अलग बताया कि वह शव लेकर वाराणसी से चल चुके हैं।
10 साल से जयगुरुदेव संगत से जुड़ा है इनका परिवार
दौलतापुर गांव के करीब 90 फीसदी लोग जयगुरुदेव के अनुयायी हैं। यहां से हर सत्संग में लोग शामिल होने जरूर जाते हैं। लालजी का परिवार भी करीब दस साल से बाबा का अनुयायी हैं। शनिवार वाले कार्यक्रम में लालजी धान की कटाई होने के चलते नहीं गए। रामपति ने जिद की इस बार बाबा के बुलाने पर जरूर जाना चाहिए, लाल जी ने मना कर दिया। 13 तारीख की सुबह तक रामपति के जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था, लेकिन बस से जा रहे एक अनुयायी के अचानक न जाने के चलते उसकी जगह वह चली गईं।
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वाराणसी में जयगुरुदेव की शोभायात्रा में हुई भगदड़ से 25 अनुयायियों की मौत हुई थी, जिसमें खीरी जिले की दो महिलाएं शामिल हैं। भीरा थाना के दौलतापुर गांव की एक महिला अनुयायी, जबकि ईसानगर क्षेत्र के गांव महरिया निवासी 58 वर्षीय सुशीला देवी की वाराणसी हादसे में मौत हुई है।
बिजुआ/गुलरिया/ईसानगर। भीरा थाना एवं पुलिस चौकी बिजुआ क्षेत्र के दौलतापुर गांव की रामपति (60) पत्नी लालजी की भी वाराणसी के राजघाट पुल पर हुए हादसे में मौत हो गई। रामपति गांव के श्रीपाल, बाबू जी, रामगुलाम, जीत राम के साथ एक बस से 13 अक्टूबर को वाराणसी रवाना हुई थी। इन पांचों के अलावा इलाके के पकरिया, सल्लिहा, रैनागंज, तिखड़ा, पड़रिया गांवों से करीब 55 लोग भी कार्यक्रम में गए थे। हादसे के समय सभी अनुयायी अलग-अलग हो गए, सिर्फ रामपति एवं एक पकरिया गांव का साथी एक साथ थे। राजपति के पुत्र रामसरन के पास करीब दो बजे फोन आया कि उनकी मां बेहोश हो गई हैं, उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फोन करने वाला शख्स अंजान था। शाम चार बजे उसी नंबर से पता चला कि रामपति की मौत हो गई है। शाम को ही पुत्र रामसरन समेत कुछ लोग वाराणसी के लिए रवाना हो गए। रात को ही प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम कराया, जिससे सुबह 10 बजे शव को परिवार वालों को सौंप दिया गया। उधर ईसानगर के गांव महरिया की सुशीला देवी अपने जत्थे के साथ गुरुवार को यहां से रवाना हुईं थी। दोनों के परिवारीजनों ने अलग-अलग बताया कि वह शव लेकर वाराणसी से चल चुके हैं।
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10 साल से जयगुरुदेव संगत से जुड़ा है इनका परिवार
दौलतापुर गांव के करीब 90 फीसदी लोग जयगुरुदेव के अनुयायी हैं। यहां से हर सत्संग में लोग शामिल होने जरूर जाते हैं। लालजी का परिवार भी करीब दस साल से बाबा का अनुयायी हैं। शनिवार वाले कार्यक्रम में लालजी धान की कटाई होने के चलते नहीं गए। रामपति ने जिद की इस बार बाबा के बुलाने पर जरूर जाना चाहिए, लाल जी ने मना कर दिया। 13 तारीख की सुबह तक रामपति के जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था, लेकिन बस से जा रहे एक अनुयायी के अचानक न जाने के चलते उसकी जगह वह चली गईं।
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