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कब्जा हटाने गई वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों का हमला, पत्थरबाजी  

Wed, 03 May 2017 11:20 PM IST
लखीमपुरखीरी
लखीमपुरखीरी Updated Wed, 03 May 2017 11:20 PM IST
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The villagers' attack on the forest department's team, stone-throwing
हमला - फोटो : amar ujala
   
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लाठी-डंडे लेकर दौड़े ग्रामीण, भागने पर मजबूर हुई टीम, वार्ता के बाद भी नहीं माने 

मदनापुर पतेड़ा गांव में बुधवार को वन विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। टीम को लाठी डंडा लेकर दौड़ा लिया। उन पर पथराव किया। मजबूरी में टीम को वापस होना पड़ा। बाद में अफसरों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, पर वे नहीं माने। घटना के बाद वन विभाग की तरफ से छह नामजद समेत सैकड़ों अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।      
नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन के अंतर्गत परसपुर रेंज के मदनपुर पतेड़ा गांव में दशकों से सैकड़ों परिवार घर बनाकर रह रहे हैं। यह जमीन वन विभाग अपनी बताकर लगातार खाली करवाने का प्रयास करता चला आ रहा है। लेकिन आजतक उसे कामयाबी नहीं मिली है। बुधवार को पुन: कब्जा हटाने पहुंची टीम ने जब जमीन ट्रैक्टर से जोतने का प्रयास किया तो ग्रामीण उग्र हो गए और अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों को भी दौड़ा लिया। यह वाकया तब हुआ जब पुलिस नहीं पहुंच पाई थी। ग्रामीणों ने अधिकारियों को दौड़ा लिया जिसके बाद अधिकारी जान बचाकर अपनी-अपनी गाड़ियों से वहां से भागने लगे और आकर परसपुर वन चौकी पर शरण ली। यहां रणनीति बनी जिसके बाद दोबारा डीएफओ दिव्या, एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी, रेंजर आरके दीक्षित, रेंजर रनवीर मिश्रा सहित एसओ पलिया विपिन कुमार सिंह और अन्य पुलिस बल मौके के लिए रवाना हुआ। पलिया एसओ बिपिन तथा संपूर्णानगर एसओ बृजराज यादव ने भी ग्रामीणों को लगभग आधा घंटा तक समझाने का प्रयास किया। भारी पीएसी की मौजूदगी में उन्होंने ग्रामीणों से लंबी बात की। लेकिन ग्रामीणों ने सालों से खेती करने व रहने की बात कही तथा अधिकारियों से वार्ता करने को कहा। गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 
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चौतरफा हुआ हमला      
आसपास गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने जब वन विभाग की टीम को पहुंचकर कब्जा किए जाने की खबर सुनीं तो रोड के रास्ते न होकर ग्रामीणों ने खेतों से ही पैदल ही मौके पर पहुंचना शुरू कर दिया। पुरूष, महिला, बच्चे समेत सभी पैदल ही लाठी-डंडा लेकर मौके पर पहुंचे। जिससे अधिकारियों में भी हड़कंप मचा रहा। हमले में जेसीबी और पुलिस जीप में तोड़फोड़ की गई। हालात यह हुए कि लगभग तीन-चार जेसीबी चालक अपनी-अपनी जेसीबी लेकर वहां से भागने लगे। जबकि एक जेसीबी खेत में ही रह गई जिसको ग्रामीणों ने बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया।         
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डीएफओ और एसडीएम ने गुरुद्वारे में कई घंटा की बातचीत     
डीएफओ दिव्या और एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी ने वन अधिकारियों व पुलिस बल, पीएसी की मौजूदगी में लगभग एक घंटा तक ग्रामीणों से बातचीत की। इसमें एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी के कहने पर फसल कटने तक जमीन न कब्जाने की बात कही गई। जबकि खाई बुधवार से ही खोदने की बात की। जिस पर एक तरफ तो सहमति बन गई थी। लेकिन डीएफओ और अन्य अधिकारियों के वहां से जाने के बाद खाई खोदने पहुंचे वन कर्मचारियों को ग्रामीणों ने फिर से खदेड़ दिया।      


वर्षों से काबिज हैं किसान, करते हैं खेती          
ग्राम गदनियां, मदनपुर पतेड़ा, परसपुर, बाजपुर के कई ग्रामीणों ने बताया कि पाकिस्तान-भारत के विभाजन के समय वर्ष 1949 से 1955 के मध्य नदी के किनारे भूमियों में तत्कालीन सरकार ने बसने व खेती करने के लिए जुबानी कहा था। जिसके बाद लगभग 67 साल से ग्रामों की भूमियों पर लगभग चार हजार परिवार निर्धारित सीमांत सीमा के अंतर्गत अधिकतम तीन से पांच एकड़ भूमि पर काबिज होकर अपना पेट पाल रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई सरकारें आईं, कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए लेकिन उसके बाद भी आज तक कब्जेदारों के नाम भूमि नहीं की गई है। जानकार ग्रामीण बताते हैं कि सन् 1965 में तत्कालीन एसडीएम ने बेढंग तरीके से जमीन को सेक्शन 20 के तहत वन विभाग के सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद से वन विभाग इसको अपनी जमीन मानने लगा तथा आए दिन घर उजाड़ने एवं जमीन छीनने के लिए प्रयास करने लगा। बताया कि उक्त कब्जे वाली भूमि के अलावा जीविकोपार्जन एवं आवास के लिए ग्रामीणों के पास कोई भी भूमि नहीं है। जिसके छिन जाने से वह रोड पर आ जाएंगे व अपने परिवार की जीविका भी नहीं चला पाएंगे।     


 झाला जलाने और अधिकारियों पर आरोप     
पलियाकलां। परसपुर रेंज की मदनपुर पतेड़ा में जमीन की खाई खोदने गए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर एक घर को जला देने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तीन भाई गुलजार सिंह, प्रताप सिंह, बलकार सिंह का घर यहां पर स्थित है। जिसके झोपड़ीनुमा एक झाले में वन विभाग के अधिकारियों औीर कर्मचारियों ने आग लगा दी। जिससे पूरा झाला जलकर राख हो गया। ग्रामीणों ने वन विभाग के रेंजर व अन्य अधिकारियों पर भूमि पर रहने तथा खेती करने के एवज में हर महीने पैसा लेने का आरोप लगाया है। कहा गया कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आए दिन परेशान करते हैं लेकिन जब पैसा मिल जाता है तो वह शांत हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा कई सालों से चल रहा था।       
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