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कहीं तस्करों ने तो नहीं कर दी एसएसबी के एसआई की हत्या
पलियाकलां-गौरीफंटा
Updated Thu, 07 Jan 2016 10:40 PM IST
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एसएसबी 39वीं वाहिनी की कजरिया बीओपी में तैनात एसआई की हत्या किसने और क्यों की? इस घटना के बाद यह एक बड़ा सवाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है। फिलहाल पुलिस और एसएसबी अधिकारियों ने हर पहलू पर जांच शुरू कर दी है। एसपी अखिलेश चौरसिया का भी कहना है कि मामला तस्करी से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल विवेचना से पहले उन्होंने मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। एसआई ने कुछ दिन पूर्व ही सीमा पर लाखों रुपये के तस्करी के माल को बरामद किया था, इससे भी मामले को जोड़कर देखा जा रहा है।
मृतक एसआई दीप सिंह सोडा का व्यक्तित्व हंसमुख था। उनकी किसी से रंजिश भी नहीं बताई जा रही है। फिर उनकी इस तरह से हत्या किसने और क्यों की इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है और इसको लेकर पुलिस और एसएसबी दोनो ही पसोपेश में हैं। माना यह भी जा रहा है कि सुबह चेकिंग के दौरान उन्होंने तस्करों को कुछ ले जाते देखा हो और फिर उनमें से किसी को पकड़ लिया हो जिस पर उनके ही साथियों ने उनकी हत्या कर दी। इन्हीं सब बातों के चलते पहली बारगी तस्करों पर हत्या का अंदेशा है। फिलहाल हत्या के कारणों पर पर्दा है हालांकि पुलिस कह रही कि हत्या की गुत्थी को सुलझा लिया जाएगा। हंसमुख स्वभाव के एसआई की हत्या पूरी एसएसबी समेत इलाके के लोगों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
कोतवाल कृष्णमुरारी शर्मा का कहना है कि वह हर पहलू पर गौर कर रहे हैं जल्द ही गुत्थी को सुलझा लिया जाएगा।
लौटकर एक जनवरी को ही आए थे
एसएसबी मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक वह इससे पहले यहां से करीब बनकटी वीओपी में तैनात थे और तस्करी का माल बरामदगी मामले के बाद छुट्टी पर घर गए थे। बताया गया है कि वह एक जनवरी को लौट कर आए थे इसके बाद उनको कजरिया में तैनाती मिली थी। इसके चंद दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई।
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आतंक से तो नहीं जुड़ी है हत्या!
देश में सीमावर्ती सेना के मुख्यालयों, एयरबेस आदि पर हो रहे आतंकी हमलों को देखते हुए इस हत्या को उससे जोड़कर देखा जाना सही है या फिर गलत इस पर कोतवाली प्रभारी का कहना है कि इस सीमा पर आतंकवाद नहीं है जिससे इसको इससे जोड़ा जा सके। फिलहाल पुलिस जो भी कह रही हो लेकिन नेपाल में आईएसआई की सक्रियता जग जाहिर है।
आखिर किसकी है मौके पर पड़ी चप्पल
जहां एसआई का शव पड़ा मिला, वहां किसी व्यक्ति की एक चप्पल भी पाई गई है वह किसकी है इसको लेकर भी पुलिस और एसएसबी छानबीन में जुट गई है। हो सकता है कि यह चप्पल किसी ग्रामीण की हो और पहले से यहां पड़ी हो या फिर यह भी हो सकता है कि एसआई के हत्यारों की।
शोक में डूबा एसएसबी महकमा
एसआई की इस तरह हुई हत्या से कजरिया ही नहीं आसपास की बीओपी और मुख्यालय में भी शोक की लहर दौड़ गई है और साथी गमगीन हैं।
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मृतक एसआई दीप सिंह सोडा का व्यक्तित्व हंसमुख था। उनकी किसी से रंजिश भी नहीं बताई जा रही है। फिर उनकी इस तरह से हत्या किसने और क्यों की इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है और इसको लेकर पुलिस और एसएसबी दोनो ही पसोपेश में हैं। माना यह भी जा रहा है कि सुबह चेकिंग के दौरान उन्होंने तस्करों को कुछ ले जाते देखा हो और फिर उनमें से किसी को पकड़ लिया हो जिस पर उनके ही साथियों ने उनकी हत्या कर दी। इन्हीं सब बातों के चलते पहली बारगी तस्करों पर हत्या का अंदेशा है। फिलहाल हत्या के कारणों पर पर्दा है हालांकि पुलिस कह रही कि हत्या की गुत्थी को सुलझा लिया जाएगा। हंसमुख स्वभाव के एसआई की हत्या पूरी एसएसबी समेत इलाके के लोगों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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कोतवाल कृष्णमुरारी शर्मा का कहना है कि वह हर पहलू पर गौर कर रहे हैं जल्द ही गुत्थी को सुलझा लिया जाएगा।
लौटकर एक जनवरी को ही आए थे
एसएसबी मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक वह इससे पहले यहां से करीब बनकटी वीओपी में तैनात थे और तस्करी का माल बरामदगी मामले के बाद छुट्टी पर घर गए थे। बताया गया है कि वह एक जनवरी को लौट कर आए थे इसके बाद उनको कजरिया में तैनाती मिली थी। इसके चंद दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई।
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आतंक से तो नहीं जुड़ी है हत्या!
देश में सीमावर्ती सेना के मुख्यालयों, एयरबेस आदि पर हो रहे आतंकी हमलों को देखते हुए इस हत्या को उससे जोड़कर देखा जाना सही है या फिर गलत इस पर कोतवाली प्रभारी का कहना है कि इस सीमा पर आतंकवाद नहीं है जिससे इसको इससे जोड़ा जा सके। फिलहाल पुलिस जो भी कह रही हो लेकिन नेपाल में आईएसआई की सक्रियता जग जाहिर है।
आखिर किसकी है मौके पर पड़ी चप्पल
जहां एसआई का शव पड़ा मिला, वहां किसी व्यक्ति की एक चप्पल भी पाई गई है वह किसकी है इसको लेकर भी पुलिस और एसएसबी छानबीन में जुट गई है। हो सकता है कि यह चप्पल किसी ग्रामीण की हो और पहले से यहां पड़ी हो या फिर यह भी हो सकता है कि एसआई के हत्यारों की।
शोक में डूबा एसएसबी महकमा
एसआई की इस तरह हुई हत्या से कजरिया ही नहीं आसपास की बीओपी और मुख्यालय में भी शोक की लहर दौड़ गई है और साथी गमगीन हैं।