{"_id":"5d2ff0ce3e13deabd943d51bf7b4a17c","slug":"raw-get-tough-banned-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘कच्ची’ पर रोक लगा पाना कड़ी चुनौती","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
‘कच्ची’ पर रोक लगा पाना कड़ी चुनौती
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 29 Aug 2015 07:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की दस्तक के साथ ही गांवों का माहौल सियासी होने लगा है, जिससे गांवों में कच्ची शराब का बड़े पैमाने पर बनाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। ऐसे में शांतिपूर्ण माहौल में पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हैै। गांवों में कुटीर उद्योग की तर्ज पर फल-फूल चुके कच्ची शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग ने अभियान शुरू कर दिया है। सीमित संसाधन और स्टाफ के कारण इस पर रोक लगा पाना पुलिस और आबकारी विभाग के सामने चुनौती है।
आबकारी विभाग ने अब तक करीब 190 गांव ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। जबकि छोटे स्तर पर करीब एक हजार से अधिक गांवों में कच्ची का धंधाकर लोग रोजी-रोटी चला रहे हैं, क्योंकि जिले में 1167 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें औसतन चार से आठ तक मजरे जुड़े हैं। गांवों में कुछ लोग घरों में चूल्हे की आग से कच्ची शराब बना रहे हैं, तो बड़े पैैमाने पर नदी के किनारे खेतों में भट्ठियां धधक रहीं हैं। इस धंधे के बारे में सूत्र बताते हैं कि देशी शराब के दामों में प्रति वर्ष बेतहाशा वृद्धि के चलते गांवों में कच्ची शराब की डिमांड बढ़ गई है, जिससे ठेकेदार भी आजिज होकर सस्ती शराब की सप्लाई कराने की डिमांड कर चुके हैं। आबकारी विभाग के एक अधिकारी बताते हैैं कि अब देशी शराब का पौवा 77 रुपये हो गया हैै, जिससे मजदूर तबके के लोग गांवों में सस्ती कच्ची शराब की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
जिला आबकारी अधिकारी ईश्वरदयाल ने बताया कि पुलिस के साथ मिलकर कच्ची शराब के अड्डों पर छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा विशेष दल तैयार कर छापे मारने की कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसमें पीएसी बल की मदद ली जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आबकारी विभाग ने अब तक करीब 190 गांव ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। जबकि छोटे स्तर पर करीब एक हजार से अधिक गांवों में कच्ची का धंधाकर लोग रोजी-रोटी चला रहे हैं, क्योंकि जिले में 1167 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें औसतन चार से आठ तक मजरे जुड़े हैं। गांवों में कुछ लोग घरों में चूल्हे की आग से कच्ची शराब बना रहे हैं, तो बड़े पैैमाने पर नदी के किनारे खेतों में भट्ठियां धधक रहीं हैं। इस धंधे के बारे में सूत्र बताते हैं कि देशी शराब के दामों में प्रति वर्ष बेतहाशा वृद्धि के चलते गांवों में कच्ची शराब की डिमांड बढ़ गई है, जिससे ठेकेदार भी आजिज होकर सस्ती शराब की सप्लाई कराने की डिमांड कर चुके हैं। आबकारी विभाग के एक अधिकारी बताते हैैं कि अब देशी शराब का पौवा 77 रुपये हो गया हैै, जिससे मजदूर तबके के लोग गांवों में सस्ती कच्ची शराब की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विज्ञापन
जिला आबकारी अधिकारी ईश्वरदयाल ने बताया कि पुलिस के साथ मिलकर कच्ची शराब के अड्डों पर छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा विशेष दल तैयार कर छापे मारने की कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसमें पीएसी बल की मदद ली जा रही है।
विज्ञापन