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प्रापर्टी के लालच में चाचा की हत्या कर शव फेंका

अमर उजाला ब्यूरो/अलीगंज/गोला गोकर्णनाथ। Updated Sat, 25 Jun 2016 11:52 PM IST
murder
murder - फोटो : amar ujala
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- मृतक के भतीजे, उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज 
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- तीस सालों से मकान बनाकर अकेले रह रहा था सीताराम 

जमीन जायदाद के लालच में रिश्ते का खून कर दिया गया। गांव बद्रीपुर में मकान बनाकर अकेले रह रहे 50 वर्षीय सीताराम की उसके भतीजे ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी और शव को गांव से एक किलोमीटर दूर सड़क किनारे फेंक दिया। पुलिस ने मृतक के ताऊ के लड़के की ओर से आरोपी भतीजे और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
गांव निवासी खुशीराम ने बताया कि उनका चेचेरा भाई थाना फूलबेहड़ क्षेत्र के गांव जोधपुर निवासी सीताराम 30 वर्षों से गोला कोतवाली क्षेत्र के गांव बद्रीपुर में मकान बनाकर रहता था और फार्मों पर मेहनत मजदूरी करके गुजर बसर करता था। सीताराम के पत्नी और बच्चे नहीं है। उसके हिस्से में गांव जोधपुर में ढाई एकड़ जमीन थी। जिसे वह बेचकर बद्रीपुर में जमीन खरीदना चाहता था। जिसका विरोध उसके बड़े भाई रिक्खी का पुत्र टेकचंद कर रहा था। 24 जून की शाम को टेकचंद को सीताराम के साथ बद्रीपुर गांव में देखा गया था। अगले दिन सुबह सीताराम का शव अलीगंज चौकी क्षेत्र के गांव हर्रैया के बसंतसिंह के खेत में पड़ा मिला। शव के नाक से खून निकल रहा था। गर्दन भी सूजी हुई थी। माथे पर चोट के निशान थे। पुलिस ने खुशीराम की तहरीर पर टेकचंद और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। चौकी इंचार्ज शंखधर भट्ट ने बताया कि मृतक सीताराम के गले पर रस्सी के कसाव के निशान हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। आरोपी की तलाश जारी है।

कुछ माह पूर्व ही हुई थी मृतक के मझले भाई की मौत
गोला गोकर्णनाथ। सीताराम की हत्या की सूचना पाकर बद्रीपुर गांव पहुंचे मृतक के चचेरे भाई कामता प्रसाद और गांव के लोगों ने बताया कि मृतक सीताराम तीन भाई थे। जिसमें सबसे बड़े भाई रिक्खी के एक पुत्र और पोता, पोती हैं जबकि मझले भाई रामासरे और सबसे छोटे मृतक सीताराम के आगे पीछे कोई नहीं है। तीनों भाइयों के बीच पांच एकड़ जमीन है। कुछ माह पूर्व ही मृतक के मझले भाई रामासरे की भी मौत संदिग्धावस्था में हो गई थी। जिससे तीनों के हिस्से की जमीन दो भाइयों के बीच आ गई। इससे दोनों भाई रिक्खी और सीताराम ढाई-ढाई एकड़ के मालिक बन गए। मृतक सीताराम बद्रीपुर गांव में रिश्ते की बहन के संरक्षण में लगभग 30 वर्षों से कच्चा मकान बनाकर रह रहा था और लोगों के यहां मेहनत मजदूरी कर पेट पालता था। वह अपने हिस्से की जमीन बेंचकर बद्रीपुर में जमीन खरीदना चाहता था।
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