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पिंजरे के पास बंधा रहा पड्डा, नहीं आई बाघिन
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी।
Updated Mon, 22 Aug 2016 10:05 PM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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सोमवार को भी लोकेशन नहीं मिली, हाथियों से की गई कांबिंग
ठिकाना बदलने की संभावना, ट्रेंक्युलाइज करने की तैयारी पूरी
आदमखोर बाघिन की सोमवार को भी लोकेशन नहीं मिली। वनकर्मियों ने हाथियों के साथ सुबह जंगल के किनारे संभावित स्थानों पर चार घंटे कांबिंग की, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। ऑटोमोशन कैमरे से भी बाघिन की कोई लोकेशन नहीं मिली। अब उसके ठिकाना बदलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि शाम को तरसेम के खेत में बाघिन के देखे जाने की सूचना पर वनकर्मियों ने वहां भी हाथियों के साथ कांबिंग की, लेकिन वहां भी कुछ हासिल न हुआ। बाद में राजेपुर गांव के पास भी बाघिन देखे जाने की सूचना मिली तो वनकर्मी हाथी से वहां कांबिंग के लिए रवाना हो गए। इधर, आदमखोर बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
छेदीपुर में आदमखोर बाघिन ने एक दिन के अंतराल पर हमला कर दो ग्रामीणों टीकाराम तथा बाबूराम की जान ले ली थी। दो लोगों की जान जाने के बाद वन विभाग की नींद खुली और बाघिन को पकड़ने की योजना तैयार की गई। रविवार को चीफ कंजरवेटर इवा शर्मा के निर्देशन और डीएफओ साउथ खीरी संजीव बिस्वाल के नेतृत्व में वनकर्मियों ने अभियान चलाया। इस दौरान छेदीपुर में बाघिन के पगमार्क देखे गए। वनकर्मियों तथा लखनऊ से आए ट्रेंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला के मुताबिक बाघिन उसी इलाके के गन्ने के खेतों में हैं जहां उसने दो ग्रामीणों की जान ली। वनकर्मियों ने शाम को खेतों तथा जंगल में सात ऑटोमोशन कैमरे तथा तीन जाल लगाए और एक पड्डा जाल के बाहर बांधा, लेकिन बाघिन न तो पड्डे के पास आई और न ही कैमरों में उसकी कोई लोकेशन मिली। इससे पहले दुधवा पार्क से आए हाथियों पवन कली तथा पुष्पा कली के साथ वनकर्मियों ने सुबह चार से आठ बजे तक संभावित स्थानों पर बाघिन की खोज में कांबिंग की, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। यहां कई टीमें बाघिन की खोज में लगी हुई हैं। इसी बीच शाम चार बजे ग्रामीणों ने बताया कि तरसेम के गन्ने के खेत में बाघिन दिखाई दी है। वन क्षेत्राधिकारी मैलानी ने फौरन हाथियों से वहां भी कांबिंग कराई, लेकिन वहां भी कोई कामयाबी नहीं मिली।
वन क्षेत्राधिकारी मैलानी डीएस यादव ने बताया कि शाम को ही राजेपुुुर के पास कलुआकुंडी इलाके में बाघिन दिखाई देने की खबर मिलने पर वनकर्मियों को हाथियों के साथ वहां कांबिंग करने के लिए भेजा गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की अधिक भीड़ से संभवत: बाघिन ने अपना ठिकाना बदल दिया है और इसी से उसकी खोज करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने ऑपरेशन टाइगर के दौरान ग्रामीणों से बाघिन के संभावित स्थानों पर न जाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि आदमखोर बाघिन को ट्रेंक्युलाइज कर पकड़ा जाएगा, इसीलिए पड्डे को पिंजरे के अंदर रखने के बजाए बाहर बांधा गया था, लेकिन तब भी बाघिन नहीं आई। उधर चीफ कंजरवेटर ईवा शर्मा सोमवार को भी मैलानी में ही कैंप किए रहीं।
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छेदीपुर पहुंची पीएसी: मैलानी। ऑपरेशन टाइगर के दौरान ग्रामीणों की भीड़ ऑपरेशन में बाधा बन रही है। ग्रामीणों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए छेदीपुर में एक सेक्शन पीएसी शाम को पहुंच गई।
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ठिकाना बदलने की संभावना, ट्रेंक्युलाइज करने की तैयारी पूरी
आदमखोर बाघिन की सोमवार को भी लोकेशन नहीं मिली। वनकर्मियों ने हाथियों के साथ सुबह जंगल के किनारे संभावित स्थानों पर चार घंटे कांबिंग की, लेकिन कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। ऑटोमोशन कैमरे से भी बाघिन की कोई लोकेशन नहीं मिली। अब उसके ठिकाना बदलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि शाम को तरसेम के खेत में बाघिन के देखे जाने की सूचना पर वनकर्मियों ने वहां भी हाथियों के साथ कांबिंग की, लेकिन वहां भी कुछ हासिल न हुआ। बाद में राजेपुर गांव के पास भी बाघिन देखे जाने की सूचना मिली तो वनकर्मी हाथी से वहां कांबिंग के लिए रवाना हो गए। इधर, आदमखोर बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
छेदीपुर में आदमखोर बाघिन ने एक दिन के अंतराल पर हमला कर दो ग्रामीणों टीकाराम तथा बाबूराम की जान ले ली थी। दो लोगों की जान जाने के बाद वन विभाग की नींद खुली और बाघिन को पकड़ने की योजना तैयार की गई। रविवार को चीफ कंजरवेटर इवा शर्मा के निर्देशन और डीएफओ साउथ खीरी संजीव बिस्वाल के नेतृत्व में वनकर्मियों ने अभियान चलाया। इस दौरान छेदीपुर में बाघिन के पगमार्क देखे गए। वनकर्मियों तथा लखनऊ से आए ट्रेंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला के मुताबिक बाघिन उसी इलाके के गन्ने के खेतों में हैं जहां उसने दो ग्रामीणों की जान ली। वनकर्मियों ने शाम को खेतों तथा जंगल में सात ऑटोमोशन कैमरे तथा तीन जाल लगाए और एक पड्डा जाल के बाहर बांधा, लेकिन बाघिन न तो पड्डे के पास आई और न ही कैमरों में उसकी कोई लोकेशन मिली। इससे पहले दुधवा पार्क से आए हाथियों पवन कली तथा पुष्पा कली के साथ वनकर्मियों ने सुबह चार से आठ बजे तक संभावित स्थानों पर बाघिन की खोज में कांबिंग की, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। यहां कई टीमें बाघिन की खोज में लगी हुई हैं। इसी बीच शाम चार बजे ग्रामीणों ने बताया कि तरसेम के गन्ने के खेत में बाघिन दिखाई दी है। वन क्षेत्राधिकारी मैलानी ने फौरन हाथियों से वहां भी कांबिंग कराई, लेकिन वहां भी कोई कामयाबी नहीं मिली।
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वन क्षेत्राधिकारी मैलानी डीएस यादव ने बताया कि शाम को ही राजेपुुुर के पास कलुआकुंडी इलाके में बाघिन दिखाई देने की खबर मिलने पर वनकर्मियों को हाथियों के साथ वहां कांबिंग करने के लिए भेजा गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की अधिक भीड़ से संभवत: बाघिन ने अपना ठिकाना बदल दिया है और इसी से उसकी खोज करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने ऑपरेशन टाइगर के दौरान ग्रामीणों से बाघिन के संभावित स्थानों पर न जाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि आदमखोर बाघिन को ट्रेंक्युलाइज कर पकड़ा जाएगा, इसीलिए पड्डे को पिंजरे के अंदर रखने के बजाए बाहर बांधा गया था, लेकिन तब भी बाघिन नहीं आई। उधर चीफ कंजरवेटर ईवा शर्मा सोमवार को भी मैलानी में ही कैंप किए रहीं।
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छेदीपुर पहुंची पीएसी: मैलानी। ऑपरेशन टाइगर के दौरान ग्रामीणों की भीड़ ऑपरेशन में बाधा बन रही है। ग्रामीणों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए छेदीपुर में एक सेक्शन पीएसी शाम को पहुंच गई।