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जंगल से चार लंगूर चोरी कर ला रहे छह तस्कर पकड़े
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)।
Updated Sat, 19 Aug 2017 07:36 PM IST
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वन विभाग की टीम ने तस्करों की बोलेरो भी कब्जे में ली
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज के जंगल से बोरों में भरकर चार लंगूर ले जा रहे छह तस्करों को वन विभाग की टीम ने दबोच लिया। टीम ने बोलेरो को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
मैलानी के रेंजर डीएस यादव ने बताया कि शुक्रवार शाम चार बजे एक सूचना पर उन्होंने वन विभाग की टीम के साथ भरिगवां बीट के कंपार्टमेंट उत्तरी कठिना (3) की घेराबंदी कर एक बोलेरो में सवार छह लोगों को पकड़ लिया। टीम में शामिल डिप्टी रेंजर सुदर्शन सिंह, वन दरोगा, राजेश कुमार, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, सुखपाल सिंह, शारिक आदि ने बोलेरो की तलाशी ली तो उसमें एक बोरे से चार लंगूर बरामद हुए। पूछताछ में वन्यजीव तस्करों ने अपना नाम महिपाल, हरिओम, मनोज, छोटे, श्रीपाल और अनुराग निवासी चरखौला, थाना खुदागंज (शाहजहांपुर) बताया और कहा कि वे लंगूर पालने के लिए जंगल से पकड़ कर ले जा रहे थे। रेंजर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण के बाद वन्यजीव अधिनियम की धारा 2 के तहत चालान कर दिया गया। उनकी बोलेरो गाड़ी सीज कर दी गई है।
चिकित्सा क्षेत्र में लंगूरों का है योगदान
उप्र वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि लंगूर शेड्यूल-टू की श्रेणी में आता है। चिकित्सा क्षेत्र में लंगूरों का बहुत बड़ा योगदान है। इंसानों की जीवन रक्षक दवाइयों का पहले लंगूरों पर ही प्रयोग किया जाता है। इसके बाद ही तय होता है कि उनका इंसानों पर प्रभाव और दुष्प्रभाव कैसा होगा। इसके बाद ही दवा को आमजन के इस्तेमाल की इजाजत मिलती है।
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बंदरों के आतंक से निजात को भी लंगूरों की बेहद मांग
रिहायशी इलाकों में बंदरों के आतंक से निजात के लिए भी लंगूरों की बेहद मांग है। लंगूरों को सामान्य सा प्रशिक्षण देकर उन्हें बंदरों को भगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लंगूरों से बंदर बहुत ज्यादा डरते हैं, इसलिए लोग बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों की मदद लेते हैं।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज के जंगल से बोरों में भरकर चार लंगूर ले जा रहे छह तस्करों को वन विभाग की टीम ने दबोच लिया। टीम ने बोलेरो को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
मैलानी के रेंजर डीएस यादव ने बताया कि शुक्रवार शाम चार बजे एक सूचना पर उन्होंने वन विभाग की टीम के साथ भरिगवां बीट के कंपार्टमेंट उत्तरी कठिना (3) की घेराबंदी कर एक बोलेरो में सवार छह लोगों को पकड़ लिया। टीम में शामिल डिप्टी रेंजर सुदर्शन सिंह, वन दरोगा, राजेश कुमार, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, सुखपाल सिंह, शारिक आदि ने बोलेरो की तलाशी ली तो उसमें एक बोरे से चार लंगूर बरामद हुए। पूछताछ में वन्यजीव तस्करों ने अपना नाम महिपाल, हरिओम, मनोज, छोटे, श्रीपाल और अनुराग निवासी चरखौला, थाना खुदागंज (शाहजहांपुर) बताया और कहा कि वे लंगूर पालने के लिए जंगल से पकड़ कर ले जा रहे थे। रेंजर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण के बाद वन्यजीव अधिनियम की धारा 2 के तहत चालान कर दिया गया। उनकी बोलेरो गाड़ी सीज कर दी गई है।
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चिकित्सा क्षेत्र में लंगूरों का है योगदान
उप्र वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि लंगूर शेड्यूल-टू की श्रेणी में आता है। चिकित्सा क्षेत्र में लंगूरों का बहुत बड़ा योगदान है। इंसानों की जीवन रक्षक दवाइयों का पहले लंगूरों पर ही प्रयोग किया जाता है। इसके बाद ही तय होता है कि उनका इंसानों पर प्रभाव और दुष्प्रभाव कैसा होगा। इसके बाद ही दवा को आमजन के इस्तेमाल की इजाजत मिलती है।
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बंदरों के आतंक से निजात को भी लंगूरों की बेहद मांग
रिहायशी इलाकों में बंदरों के आतंक से निजात के लिए भी लंगूरों की बेहद मांग है। लंगूरों को सामान्य सा प्रशिक्षण देकर उन्हें बंदरों को भगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लंगूरों से बंदर बहुत ज्यादा डरते हैं, इसलिए लोग बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों की मदद लेते हैं।