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डेथ सर्टिफिकेट के लिए बच्चे की लाश लेकर भटकता रहा
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:38 PM IST
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बच्चे का शव लेकर भटकता पिता
- फोटो : अमर उजाला
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तेज बुखार से पीड़ित था बच्चा
गुरुवार को चिल्ड्रन वार्ड में इलाज के दौरान हुई मौत
तेज बुखार से पीड़ित बच्चे की मौत बाद डेथ सर्टिफिकेट के लिए पिता जिला अस्पताल में भटकता रहा। करीब एक घंटे बाद डॉक्टर ने ओपीडी कक्ष में बुलाकर मृत्यु प्रमाण पत्र सौंपा।
मितौली तहसील के गांव अंबेडकर नगर निवासी प्रमोद कुमार के चार वर्षीय पुत्र पवन को बुधवार की रात में तेज बुखार आ गया। जिस पर प्रमोद ने उसे गुरुवार की सुबह मितौली सीएचसी में भर्ती कराया, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में कुछ देर चले इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। इस मामले की सूचना स्टाफ नर्स ने डॉ. राजेश सिंह को दी, जिससे वह वार्ड आकर बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र बना दें, लेकिन डॉक्टर ने वार्ड ना जाकर प्रमोद को बच्चे के शव के साथ अपने ओपीडी रूम में आने का फरमान सुना दिया। पुत्र की मौत से आहत प्रमोद बच्चे का शव अपने कंधे पर लादकर चिल्ड्रेन वार्ड से ओपीडी कक्ष जा पहुंचा। तब जाकर उन्होंने उसे मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर दिया। मृत्यु प्रमाण के लिए बच्चे के शव के साथ बाप को अपने कक्ष में बुलाए जाने के मामले की अस्पताल में निंदा होती रही।
यदि बच्चे की मौत हो गई थी तो डॉक्टर को वार्ड में ही जाकर मृत्यु प्रमाण पत्र बना देना चाहिए था। शव के साथ बच्चे को अपने पास बुलाना गलत है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. जावेद अहमद, सीएमओ
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गुरुवार को चिल्ड्रन वार्ड में इलाज के दौरान हुई मौत
तेज बुखार से पीड़ित बच्चे की मौत बाद डेथ सर्टिफिकेट के लिए पिता जिला अस्पताल में भटकता रहा। करीब एक घंटे बाद डॉक्टर ने ओपीडी कक्ष में बुलाकर मृत्यु प्रमाण पत्र सौंपा।
मितौली तहसील के गांव अंबेडकर नगर निवासी प्रमोद कुमार के चार वर्षीय पुत्र पवन को बुधवार की रात में तेज बुखार आ गया। जिस पर प्रमोद ने उसे गुरुवार की सुबह मितौली सीएचसी में भर्ती कराया, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में कुछ देर चले इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। इस मामले की सूचना स्टाफ नर्स ने डॉ. राजेश सिंह को दी, जिससे वह वार्ड आकर बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र बना दें, लेकिन डॉक्टर ने वार्ड ना जाकर प्रमोद को बच्चे के शव के साथ अपने ओपीडी रूम में आने का फरमान सुना दिया। पुत्र की मौत से आहत प्रमोद बच्चे का शव अपने कंधे पर लादकर चिल्ड्रेन वार्ड से ओपीडी कक्ष जा पहुंचा। तब जाकर उन्होंने उसे मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर दिया। मृत्यु प्रमाण के लिए बच्चे के शव के साथ बाप को अपने कक्ष में बुलाए जाने के मामले की अस्पताल में निंदा होती रही।
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यदि बच्चे की मौत हो गई थी तो डॉक्टर को वार्ड में ही जाकर मृत्यु प्रमाण पत्र बना देना चाहिए था। शव के साथ बच्चे को अपने पास बुलाना गलत है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. जावेद अहमद, सीएमओ