{"_id":"e6fc843785a61c90bb16da52c27c5018","slug":"czech-flood-relief-scam-called-the-bank-manager-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ राहत चेक घोटाले में बैंक मैनेजर तलब","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बाढ़ राहत चेक घोटाले में बैंक मैनेजर तलब
निघासन
Updated Fri, 20 Mar 2015 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाढ़ राहत घोटाले में एसडीएम ने जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान उन्होंने बैंक मैनेजर को संबंधित पत्रावलियों के साथ तलब किया है। एसडीएम पीके सिंह की जांच में प्रथम दृष्टया लेखपाल और कुछ दलालों की गर्दन फंसती नजर आ रही है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी इस मामले में फंस सकते हैं जो फर्जी आईडी बनाकर जालसाजी करते हैं।
बाढ़ राहत घोटाले के मामले में चार दिन बाद एसडीएम पीके सिंह ने जांच शुरू की। जांच के दौरान उन्होंने बताया कि बैंक मैनेजर से फर्जी आईडी के बाबत विस्तृत पूछताछ की गई है। उन्होंने बताया कि जिन खातों में ग्राम प्रधान ने निवास प्रमाणपत्र जारी किए हैं उन प्रधानों को भी तलब किया जाएगा। खातों में लगे फोटो वाले व्यक्तियों को चिह्नित कर बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा एसडीएम ने जांच में ऐसे लोगों को भी शामिल किया है, जिन्होंने फर्जी खाताधारकों की पहचान के लिए बैंक के फार्म पर अपने हस्ताक्षर किए हैं।
एसडीएम के अनुसार मृत व्यक्ति के नाम चेक बनाकर और उनका भुगतान कराने वाले लेखपालों की जांच चल रही है। जांच में कई लेखपाल इस चपेट में आ सकते हैं। एसडीएम की जांच से तहसील में हडकंप मच गया है वहीं दूसरी तरफ कुछ दलाल अपनी गर्दन बचाने के लिए सत्तापक्ष के नेताओं की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है।
विज्ञापन
एसडीएम पीके सिंह ने बताया कि मामले में कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वह चाहे जितना ताकतवर क्यों न हो
निघासन में फर्जी वोटर आईडी बनाने का भी गोरखधंधा
तहसील निघासन में फोटो पहचानपत्र या दूसरा कोई आईडी या प्रमाणपत्र बनवाना है तो आपको तहसील के चक्कर काटने की जरूरत नहीं। तहसील के बाहर सक्रिय दलाल कुछ घंटे में ही आपको फर्जी फोटो पहचानपत्र या फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर आपके हाथों में पकड़ा देंगे। तहसील प्रशासन के नाक के नीचे 50 से 200 रुपये तक में फर्जी मतदाता पहचान बनाने का गोरखधंधा चल रहा है।
गांव मंझिलीपुरवा निवासी सुरेश समेत कई लोगों ने बताया कि तहसील गेट और भारतीय स्टेट बैंक के पास आसानी से फर्जी पहचानपत्र बनवाए जा सकते है। बाढ़ राहत घोटाले में बैंक का खाता खोलने में जिन फर्जी मतदाता पहचानपत्रों का इस्तेमाल किया गया है वे पहचानपत्र निघासन में ही बनवाए गए हैं। प्रधानों के फर्जी मोहरें भी यहां आसानी से बनवाई जा सकती हैं।
इन्हें भी नहीं मिलीं बाढ़ राहत की चेक
गांव मंझिलीपुरवा निवासी संतराम ने बताया कि करीब दो एकड़ से अधिक जमीन में लगी फसल बाढ़ आने के कारण तबाह हो गई थी। हल्का लेखपाल ने चेक बनाई जरूर लेकिन उसे नहीं दी। यह चेक कहां गई इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। ऐसे ही न जाने कितने किसान हैं जिनके बाढ़ राहत चेकों का भुगतान फर्जी बैंक खातों के जरिए निकाल लिया गया।
एसडीएम पीके सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत राशि के घोटाले की जांच के दौरान फर्जी फोटो पहचानपत्र बनाने का मामला भी सामने आया है। ऐसी दुकानों और दलालों को चिह्नित कर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बाढ़ राहत घोटाले के मामले में चार दिन बाद एसडीएम पीके सिंह ने जांच शुरू की। जांच के दौरान उन्होंने बताया कि बैंक मैनेजर से फर्जी आईडी के बाबत विस्तृत पूछताछ की गई है। उन्होंने बताया कि जिन खातों में ग्राम प्रधान ने निवास प्रमाणपत्र जारी किए हैं उन प्रधानों को भी तलब किया जाएगा। खातों में लगे फोटो वाले व्यक्तियों को चिह्नित कर बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा एसडीएम ने जांच में ऐसे लोगों को भी शामिल किया है, जिन्होंने फर्जी खाताधारकों की पहचान के लिए बैंक के फार्म पर अपने हस्ताक्षर किए हैं।
विज्ञापन
एसडीएम के अनुसार मृत व्यक्ति के नाम चेक बनाकर और उनका भुगतान कराने वाले लेखपालों की जांच चल रही है। जांच में कई लेखपाल इस चपेट में आ सकते हैं। एसडीएम की जांच से तहसील में हडकंप मच गया है वहीं दूसरी तरफ कुछ दलाल अपनी गर्दन बचाने के लिए सत्तापक्ष के नेताओं की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है।
विज्ञापन
एसडीएम पीके सिंह ने बताया कि मामले में कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वह चाहे जितना ताकतवर क्यों न हो
निघासन में फर्जी वोटर आईडी बनाने का भी गोरखधंधा
तहसील निघासन में फोटो पहचानपत्र या दूसरा कोई आईडी या प्रमाणपत्र बनवाना है तो आपको तहसील के चक्कर काटने की जरूरत नहीं। तहसील के बाहर सक्रिय दलाल कुछ घंटे में ही आपको फर्जी फोटो पहचानपत्र या फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर आपके हाथों में पकड़ा देंगे। तहसील प्रशासन के नाक के नीचे 50 से 200 रुपये तक में फर्जी मतदाता पहचान बनाने का गोरखधंधा चल रहा है।
गांव मंझिलीपुरवा निवासी सुरेश समेत कई लोगों ने बताया कि तहसील गेट और भारतीय स्टेट बैंक के पास आसानी से फर्जी पहचानपत्र बनवाए जा सकते है। बाढ़ राहत घोटाले में बैंक का खाता खोलने में जिन फर्जी मतदाता पहचानपत्रों का इस्तेमाल किया गया है वे पहचानपत्र निघासन में ही बनवाए गए हैं। प्रधानों के फर्जी मोहरें भी यहां आसानी से बनवाई जा सकती हैं।
इन्हें भी नहीं मिलीं बाढ़ राहत की चेक
गांव मंझिलीपुरवा निवासी संतराम ने बताया कि करीब दो एकड़ से अधिक जमीन में लगी फसल बाढ़ आने के कारण तबाह हो गई थी। हल्का लेखपाल ने चेक बनाई जरूर लेकिन उसे नहीं दी। यह चेक कहां गई इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। ऐसे ही न जाने कितने किसान हैं जिनके बाढ़ राहत चेकों का भुगतान फर्जी बैंक खातों के जरिए निकाल लिया गया।
एसडीएम पीके सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत राशि के घोटाले की जांच के दौरान फर्जी फोटो पहचानपत्र बनाने का मामला भी सामने आया है। ऐसी दुकानों और दलालों को चिह्नित कर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।